हालात का जायजा लेने के बाद विदेशी राजनयिकों ने कहा कि स्थानीय लोगों ने रक्तपात के पाकिस्तानी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। हिंसा के लिए पाकिस्तान को ही कसूरवार ठहराते हुए स्थानीय लोगों ने उस पर दबाव बनाने को कहा है।
एक लेखक और पत्रकार है - आतिश तासीर। इसे ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया (OCI) स्टेटस मिला हुआ था। लेकिन अब यह रद्द कर दिया गया है। कारण है - भारतीय गृह मंत्रालय से यह जानकारी छुपाना कि उसके पिता पाकिस्तानी मूल के थे।
"जैसे भारत दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में दखलंदाज़ी नहीं करने की नीति पर चलता है, वैसी ही उम्मीद वह दूसरे देशों से अपने आंतरिक मामलों के लिए भी करता है।" - रवीश कुमार का इशारा चीन की शिनजियांग, तिब्बत और हॉन्ग कॉन्ग में दमनकारी नीति की ओर था।
"हम उत्तर-पूर्वी सीरिया में तुर्की की एकतरफ़ा सैन्य हमले को लेकर चिंता में हैं। तुर्की की हरकतों से क्षेत्र की स्थिरता और आतंक के खिलाफ़ लड़ाई को खतरा हो सकता है।"
"हमने बार-बार पाक से कहा है कि वह अपनी सेनाओं से 2003 के सीजफायर समझौते का पालन करने और नियंत्रण रेखा तथा अंतरराष्ट्रीय सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए कहे। भारतीय बल अधिकतम संयम बरतते हैं और आतंकवादी घुसपैठ पर जवाब देते हैं।"
जाधव 2016 से पाकिस्तान की जेल में बंद हैं। भारतीय नौसेना के इस पूर्व अधिकारी को उसने ईरान से अगवा किया था जहॉं वे कारोबार के सिलसिले में गए थे। बाद में उसने जासूसी का आरोप लगाते हुए उन्हें मौत की सजा सुनाई थी, जिस पर आईसीजे ने रोक लगा रखी है।
यह वीडियो अल-क़ायदा के मीडिया विंग कमांडर अल शबाब ने ‘डोन्ट फॉरगेट कश्मीर’ नाम से जारी किया। इसमें जवाहिरी ने कश्मीर में सीमा पार से आतंकवाद के मामलों में पाकिस्तान का हाथ होने की बात भी कही।
सुषमा स्वराज, सरकार और लोगों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी थीं। कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने सरकार के शुरुआती महीनों में स्वराज को मोदी के लिए चुनौती के रूप में देखा। उन्होंने अपनी भूमिका में तालमेल बिठाया और पहली बार विदेश मंत्रालय को एक मानवीय चेहरा दिया।
‘वाइट शिपिंग’ समझौते के तहत दो देश एक दूसरे के समुद्री क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों के बारे में दोनों देशों की नौसेना के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान करते हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बचाया कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति सोलेह ने संयुक्त रूप से गर्मजोशी से चर्चा की।
अपने पत्र में बच्ची ने इस बात का जिक्र भी किया है कि वो भले ही अभी अपनी माँ के साथ है लेकिन फिर भी वो अपने पसंदीदा देश में बिताई अपनी पुरानी जिंदगी को बहुत याद करती है।