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विदेश मंत्री का चीन को स्पष्ट संदेश: गलवान घाटी में जो हुआ वो चीन द्वारा पूर्व नियोजित था, जिसने अन्य घटनाओं को अंजाम दिया

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि इस घटना का भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि समय की माँग यह थी कि चीनी पक्ष अपनी गतिविधियों पर विचार करता और आवश्यक कदम उठाता।

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारत से अपील की है कि इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा दें। साथ ही भारत को अपने जवानों पर नियंत्रण रखने की सलाह भी दी है। भारतीय विदेश मंत्री द्वारा चीन को कड़ा संदेश देते हुए कहा गया कि गलवान घाटी में जो हुआ वह चीन द्वारा पूर्व नियोजित और सुनियोजित कार्रवाई थी, जो इसके बाद की अन्य घटनाओं के लिए जिम्मेदार था।

चीन ने भरोसा दिलाया है कि जितनी जल्दी संभव होगा, वह तनाव कम करने और पीछे हटने की कोशिश करेगा। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारत से यह भी कहा है कि वह उन लोगों को दंडित करें जिन्होंने यह विवाद शुरू किया।

चीनी विदेश मंत्री वांग ने जोर देते हुए कहा कि दोनों पक्षों को मतभेदों को सुलझाने के लिए मौजूदा तंत्र के माध्यम से संचार और समन्वय मजबूत करना चाहिए।

बातचीत के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि इस घटना का भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि समय की माँग यह थी कि चीनी पक्ष अपनी गतिविधियों पर विचार करता और आवश्यक कदम उठाता।

चीनी विदेश मंत्रालय ने लद्दाख क्षेत्र में सीमा पर हुई इस हिंसक झड़प के बाद कहा है कि भारत और चीन, दोनों देश विवाद सुलझाने के लिए उचित तरीका अपनाने पर सहमत हुए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भारत के बलिदानी सैनिकों को श्रद्दांजलि देते हुए कहा कि उनका यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। PM मोदी ने कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में लद्दाख में चल रहे विवाद पर कहा कि भारत शांति चाहता है, लेकिन करारा जवाब देने की क्षमता रखता है। पीएम मोदी ने इस विषय पर आगामी शुक्रवार को एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है।

उल्लेखनीय है कि लद्दाख की गलवान घाटी में सोमवार रात भारत और चीनी सैनिकों के बीच हाथापाई और संघर्ष हुआ, जिसमें भारत के 20 जवान वीरगति को प्राप्त हुए जबकि चीन के 40 से अधिक जवानों के हताहत होने की सूचना सामने आई हैं। चीन अभी तक अपने सैनिकों की मौत का आँकड़ा छुपा रहा है और सीमा पर संघर्ष के लिए भारत को ही दोषी ठहरा रहा है।

चीन और भारत के बीच तकरीबन पिछले एक माह से चले आ रहे सीमा विवाद को निपटाने के लिए कई स्तर की बैठकें हुईं। गत 6 जून को दोनों देशों के बीच हुई बातचीत के बाद चीन विवादित सीमा से पीछे हटने को तैयार हो गया। लेकिन चीन ने बाद में सेना नहीं हटाई। जब भारतीय पक्ष ने इसे लेकर शिकायत दर्ज की तो बड़ी संख्या में आए सैनिकों ने भारतीय जवानों पर लाठी, डंडों और रॉड से हमला कर दिया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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