कोरोना जैसी महामारी के बीच सरकार ने फार्मास्युटिकल घटकों के लिए चीन पर चली आ रही निर्भरता को ख़त्म करने के उद्देश्य से देश में बड़े पैमाने पर दवा निर्माण की मदद के लिए 14 हजार करोड़ रुपए निवेश की घोषणा की है।
काशी की खास पहचान कल-कल बहती गंगा की मौज तो वही है, बस किनारे पर हलचल थम सी गई है। आज सुबह से ही गंगा में अठखेलियाँ करती नौकाएँ किनारे पर बँधी नजर आईं और कोरोना अलर्ट की वजह से मंदिरों, मठों तक में माहौल बेहद शांत है और गतिविधियाँ काफी सीमित रहीं।
देश के जिन राज्यों में कोरोना के पॉजिटिव मरीज मिल रहे हैं, उनके 75 जिलों को पूरी तरह से लॉकडाउन किया गया है। इसके साथ ही सभी शहरों की मेट्रो 31 मार्च तक बंद रहेंगे।
"मेरी सबसे प्रार्थना है कि आप जिस शहर में हैं, कृप्या कुछ दिन वहीं रहिए। इससे हम सब इस बीमारी को फैलने से रोक सकते हैं। रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों पर भीड़ लगाकर हम अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। कृप्या अपनी और अपने परिवार की चिंता करिए, आवश्यक न हो तो अपने घर से बाहर न निकलिए।"
ये वह समाज है जिससे मोदी कह दें कि विष्ठा मलद्वार से करनी चाहिए तो वह अपने मुख से करने लगेगा। इनका ऑक्सीजन भी मोदी-विरोध है। इनका गड़बड़ाया पाचन तंत्र भी मोदी को गाली देकर दुरुस्त होता है। इस समाज के गाँजा और सेक्स लाइफ का एक्स फैक्टर है मोदी विरोध।
एक दिन अचानक शास्त्री ने घर के लोगों को बुलाया और कहा कि अगले सात दिन तक शाम को चूल्हा नहीं जलेगा। प्रयोग सफल रहा तो फिर उन्होंने देशवासियों से अपील की। संकट के उस समय में उनके इस प्रयोग ने गहरा असर छोड़ा था।
शशि थरूर ने कोरोना महामारी के बीच भी नेहरू भक्ति में कोई ढील नहीं दी और फ़ौरन ट्विटर के माध्यम से नेहरू की भक्ति में एक फोटो ट्वीट करते हुए लिखा- "बिना किसी कमेन्ट के, रीसीव किया और साझा किया।"
राजदीप ने जनता कर्फ्यू के आह्वाहन का मजाक बनाते हुए फ़ौरन बयान दिया कि क्या जनता कर्फ्यू के दिन पुलिस उसके घर के आगे मौजूद रहेगी? दरअसल, स्पष्ट सी बात यह है कि राजदीप जैसे लोग सदियों से चली आ रही सत्ता की गुलामी के कारण स्वयं को इतना ज्यादा सुरक्षित महसूस करने लगे हैं कि कोरोना जैसी किसी महामारी का भी ये लोग उपहास बनाते नजर आते हैं।
कोरोनावायरस के संकट को देखते हुए फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण के साथ बातचीत करके COVID-19 Economy Task Force (आर्थिक टास्क फ़ोर्स) बनाने का फैसला किया है। यह हर परिस्थिति का आँकलन करते हुए निकट भविष्य में फैसले लेगी। टास्कफोर्स सभी से सलाह लेकर फैसले लेगा।
पीएम मोदी ने सार्क देशों की तर्ज पर ही सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान के साथ टेलीफोन पर कोरोना संक्रमण से निपटने के उपायों पर बातचीत की। G-20 समूह के मौजूदा मुखिया (अध्यक्ष) सऊदी अरब ने इस संगठन की बैठक बुलाने के मोदी के सुझाव को स्वीकार कर लिया है।