पीटीआई नेता ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में छात्राओं के बीच बॉंटे बुर्के। कहा इससे छेड़छाड़ से बचेंगी। पिछले दिनों प्रांतीय सरकार ने स्कूलों में बुर्का अनिवार्य करने का आदेश जारी किया था। हालॉंकि विवाद होने पर इसे वापस ले लिया था।
निखिल पाल ने बताया कि उन्हें जब पहली बार धमकी भरा कॉल आया तो उन्होंने इसे किसी की शरारत समझ कर नज़रअंदाज़ कर दिया। लेकिन दोबारा यही धमकी दी गई तो उन्होंने पलट कर जवाब देते हुए कहा, "कश्मीर तुम्हारे बाप का नहीं है।"
यहाँ तक कि जब चौधरी को उनका वह ट्वीट दिखा दिया गया, जिसमें उन्होंने "50 से अधिक देशों" के UNHRC में पाकिस्तान के समर्थन का दावा किया था, तो भी उन्हें समझ नहीं आया कि उसमें गलत क्या है। "मैंने जो कहा, उस पर मैं कायम हूँ। इसमें इतनी हैरत की क्या बात है? आप किसका एजेंडा चला रहे हो?"
वीडियो में दिखाया गया है कि स्थानीय पुलिस उन चार नाईयों को हिरासत में लेकर उनसे 5,000 रुपए का जुर्माना वसूलने के बाद चेतावनी के साथ रिहा कर देती है। साथ ही चेतावनी भी दी कि अगर उन्होंने गैर इस्लामिक तरीके से दाढ़ी आगे भी काटी तो अंजाम और बुरा होगा।
संसदीय मामलों के राज्य मंत्री अली मोहम्मद ने विपक्षी सांसद के इस प्रस्तावित बिल का विरोध किया। मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान एक इस्लामिक रिपब्लिक है जहाँ सिर्फ मुस्लिम ही राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बन सकता है।
विपक्षी पार्टियों का आरोप है कि खान आर्थिक संकट से गुजर रहे देश को समस्याओं से बाहर निकाल पाने में असफल हैं। पार्टी ने इमरान खान को प्रधानमंत्री पद से हटाने के लिए आजादी मार्च निकालने की घोषणा की है।
पोस्टरों पर नारा लिखा है, 'एलओसी तोड़ दो, बिखरा कश्मीर जोड़ दो।' गुलाम कश्मीर के लोगों को आगे कर सीमा पर बड़े पैमाने पर हिंसा की रची गई साजिश को देखते हुए भारत ने सीमा पर सुरक्षा के काफी पुख्ता प्रबंध किए हैं।
दिल्ली में आतंकी गतिविधि को अंजाम देने के लिए गुप्त योजना पाँच दिन पहले क़रीब 900 किलोमीटर दूर कश्मीर में सेब के बाग में तैयार हुई। इसका खाका आतंकी संगठन जैश के जम्मू-कश्मीर कमांडर अबु उस्मान ने तैयार किया और इस गुप्त योजना को नाम दिया ‘डी’।
कोर्ट के इस आदेश पर पाकिस्तानन के एक पत्रकार ने ट्वीट किया कि कोर्ट ने कार्यकर्ता गुलालाई इस्माइल के ख़िलाफ़ ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी किया है। यह कोर्ट ने नहीं किया है। पाक सेना चाहती है और हम सब जानते हैं कि न्याय व्यवस्था कितनी स्वतंत्र है।
इस कार्यक्रम में फ्रांस के सांसदों के नहीं पहुँचने की आशंका की वजह से पाकिस्तानी राजदूत को मसूद ख़ान के सम्मान में आयोजित डिनर को भी रद्द करना पड़ा। ये डिनर नेशनल असेंबली के कार्यक्रम की पूर्वसंध्या यानी 23 सितंबर को आयोजित होना था।