अब ये पाक के ऊपर है कि उसके साथ कैसा व्यवहार हो, अगर वाकई वह चाहता है कि भारत आतंक रोधी अभियान के तहत उसे कठोर कदमों का सामना न करना पड़े तो, कस्मों-वादों के चक्कर में न पड़के आतंक की कमर तोड़ने में लग जाए। नहीं तो क्या पता अगली बार भारतीय जवान जिस गति और मजबूती से कश्मीर सहित देश के हर उस हिस्से से जहाँ से आतंक की बू आ रही है, साफ कर रहे हैं, बेमुरव्वत आतंकियों को ठिकाने लगा रहे हैं। कल को पाक की सिर्फ कमर तोड़ने के लिए छोटे-मोटे सर्जिकल स्ट्राइक नहीं बल्कि जड़ से आतंक के नासूर को उखाड़ फेंकने के लिए कोई और तरीका ही ईजाद कर लें!
गुलालाई इस्माइल के पिता प्रोफेसर मोहम्मद इस्माइल ने 4 जून को एक ट्वीट करते हुए कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों के हाथों उनके परिवार का उत्पीड़न हो रहा था।
हालाँकि, अपनी इस हरकत पर लोगों की प्रतिक्रिया देखने के बाद लड़के ने सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर माफी माँग ली है। लेकिन लोगों का गुस्सा उसके प्रति शांत नहीं हो रहा है।
"एक दिन दाऊद पोरबंदर से मुंबई लौट रहा था, तो उसकी कार में पीछे की सीट पर बैठे उसके साथी ने गोली चलाई, यह गोली ग़लती से दाऊद को लग गई थी, जबकि निशाना विरोधी करीम लाला के क़रीबी आलमजेब पर था। यह गोली दाऊद की गर्दन में लगी थी। तभी उसे बड़ौदा के सयाजी हॉस्पिटल ले जाया गया था।"
जिन्हें अपने देश भारत के कानून इतने दमनकारी लगते हैं कि लैला जैसी डिस्टोपिया बनाकर वह मुस्लिमों की प्रताड़ना दिखाना चाहते हैं, उन्हें केवल एक हफ़्ते पाकिस्तान में बिता कर आना चाहिए। आपके हिन्दूफ़ोबिक यूटोपिया जितना तो अच्छा नहीं है, लेकिन वैसे हिंदुस्तान का लोकतंत्र काफी अच्छा है...
मुहम्मद बिलाल को पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई की आलोचना करने के लिए जाना जाता था। पुलिस ने बताया कि मोहम्मद बिलाल खान अपने एक दोस्त के साथ थे। तभी उन्हें एक फोन आया, जिसके बाद एक व्यक्ति रात में उन्हें पास के जंगल में लेकर गया। जहाँ पर उनकी हत्या कर दी गई।
पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र 28 जून तक भारत के सभी विमानों की आवाजाही के लिए बंद रहेगा। इस बात की जानकारी नागरिक उड्डयन प्राधिकरण द्वारा जारी एक नोटिस में दी गई है।
पाकिस्तान को FATF में ब्लैकलिस्ट किए जाने की भारत माँग करता रहा है। जवाब में पाकिस्तान में भारत को उसके एशिया-प्रशांत सह-चेयर पद से हटाए जाने की माँग की है। इसके लिए उसने दोनों देशों के बिगड़े संबंधों का हवाला दिया है।
मुझे अच्छी तरह याद है 1992 का मुकाबला जब पहली बार भारत पाकिस्तान विश्वकप में भिड़े थे। यह भारत बनाम पाकिस्तान, सचिन तेंदुलकर और मेरा, तीनों का पहला विश्व कप था। वह विश्व कप जिसकी वजह से क्रिकेट मेरे लिए धर्म बन गया।
सिखों के इस जत्थे में देश के विभिन्न राज्यों के 130 सिख श्रद्धालु शामिल थे, इन लोगों ने पाकिस्तान जाने नहीं देने पर रेलवे स्टेशन के बाहर ही नारेबाजी की।