CISF के DIG अनिल पांडे ने बताया कि था कि उन्हें मंगलूरू एयरपोर्ट के टिकट काउंटर पर यह बैग मिला, इसमें IED होने के सबूत मिले। इसके बाद पूरे क्षेत्र को खाली कराते हुए बैग को एयरपोर्ट से बाहर निकाल दिया गया।
250 से अधिक छात्र-छात्राओं ने कुलपति को मेल व मैसेज के जरिए अपनी परेशानी बताई है। इनका कहना है कि कब तक इस आंदोलन के चलते यूनिवर्सिटी को बंद रहेगा। परीक्षाओं के साथ भी तो वे आंदोलन जारी रख सकते हैं।
सोहेल ने बताया कि हत्या के बाद शव ठिकाने लगाने का उसे कोई रास्ता नहीं दिख रहा था। फिर क्राइम आधारित टीवी शो देख उसे शव को टुकड़े-टुकड़े कर फेंकने का विचार आया। अम्मी की लाश के उसने टुकड़े किए और उन्हें अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिया।
मामला 25 अगस्त 2015 का है। अहमदाबाद में एक रैली के दौरान भड़की हिंसा के बाद बसों, पुलिस चौकियों और अन्य सरकारी संपत्तियों को आग के हवाले कर दिया गया था। एक पुलिसकर्मी सहित करीब दर्जन भर लोग मारे गए थे।
यह उस आज़ादी की माँग है। जिसकी एक झलक पिछले दिनों जामिया और जेएनयू में प्रदर्शनकारियों के हाथों में पकड़े पोस्टरों में दिखाई दी थी। इस आज़ादी की माँग को उन शिक्षकों ने दोहराया है, जिनके ऊपर विश्वविद्यालय के छात्रों को उज्ज्वल भविष्य की राह दिखाने की ज़िम्मेदारी है।
पड़ोसी ने चोरी की शिकायत पुलिस को दी। शिकायत पर पुलिस ने इमाम के साथ उसकी पत्नी को थाने बुलाया। जहाँ से उसे जेल भेजने से पहले महिला पुलिसकर्मी द्वारा जाँच कराई गई, क्यों कि उसने सैंडल और हिजाब पहना हुआ था, लेकिन जाँच के दौरान महिला पुलिसकर्मी दंग रह गई।
सोनु को पता चला कि नीतीश कुमार के शिक्षा विभाग ने खुद बताया है कि बिहार पुलिस के पेपरों के उत्तर परीक्षा से पहले ही वॉट्सऐप पर आ गए थे। इसके बाद वो निराशा में मुख्यमंत्री से फॉर्म भरने के पैसे और उनका 3 दिन का समय वापस करने की माँग कर दी।
"प्रदर्शनकारियों की वजह से सड़कें अवरुद्ध हो रही थीं और आम लोगों एवं पर्यटकों को परेशानी हो रही थी। हमने प्रदर्शनकारियों से बाहर निकलने के लिए कई बार अपील की थी। अब उन्हें आजाद मैदान में स्थानांतरित कर दिया है।"
"पूरी हिंसा के लिए कट्टरपंथी समूहों और मुख्यधारा की राजनैतिक पार्टियाँ जिम्मेदार हैं। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI), सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) समेत समाजवादी पार्टी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भड़की हिंसा के लिए उत्तरदायी हैं।"
"हमने 28 व्यक्तियों को नोटिस जारी किए जिनकी भूमिका पुलिस ने जाँच के दौरान पाई। पुलिस ने उनके खिलाफ सबूत जमा किए। उन्हें एक सप्ताह के भीतर जवाब देने के लिए कहा गया है। अगर वो ऐसा नहीं करेंगे तो उनके खिलाफ वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।"