ख़बर मिज़ोरम की है। एक बच्चे से गलती से अपने पड़ोसी के चूजे पर साईकिल चढ़ जाती है। इस दौरान मासूम बच्चे को अपराधबोध का एहसास होता है और वो उसके इलाज के लिए अपने पास जमा पूरी पॉकेट मनी लेकर तुरंत अस्पताल पहुँच जाता है।
मलाला से महिलाओं के अधिकार पर आवाज उठाने की माँग करने वाली लड़कियों के ट्विटर एकाउंट्स में अपने जननांगों की तस्वीरें भेजने वाले ये लोग पाकिस्तान और कश्मीर के युवा थे। भारतीय मीडिया गिरोह इन्हें भटके हुए युवाओं के नाम से जानता है, जो या तो किसी हेडमास्टर के बेटे निकल जाते हैं या फिर भारतीय सेना द्वारा सताए गए मजबूर युवा।
यह साफ देखा जा सकता है कि वीडियो को राठी के प्रोपेगेंडा को आईना दिखाने के लिए, एक व्यंग्य के रूप में संपादित किया गया था, यह साबित करने के लिए कि अरविंद केरीवाल भी मूल वीडियो में बताए गए रणनीति का ही उपयोग करते हैं।
सोशल मीडिया पर अक्सर हम देखते हैं कि मोटिवेशनल कोट्स और पंक्तियों को किसी भी शायर या बड़े लेखक के नाम से 'वायरल' कर दिया जाता है। इस प्रचलन के सबसे बड़े शिकार अब तक सबसे ज्यादा गाँधी, ग़ालिब, रूमी और चाणक्य हुए हैं।
एक्ट्रेस गौहर ख़ान ने चुटकी लेते हुए जवाब में लिखा कि ये बात वो शख़्स कर रहा है जो ख़ुद 90% मुस्लिम आबादी के बीच ख़ुशी से रह रहा है। मुझे अब, बिल्डिंग में रहने वाले मुस्लिमों पर गर्व है जो तुम्हारे जैसे शख़्स को बर्दाश्त कर रहा है।
PIB सोशल मीडिया के माध्यम से MEME बनाकर जनता से मतदान करने का सन्देश दे रहा है। एक MEME में PIB युवाओं से मतदान के दिन मोबाइल पर PUBG खेलने की जगह मतदान करने का निर्देश दे रहा है।
फेसबुक के सिक्योरिटी पॉलिसी प्रमुख गलेचार ने अपने ब्लॉग में कश्मीर को भारत से अलग सत्ता बताते हुए उसे एक अलग देश की तरह सम्बोधित किया था। उन्होंने बताया कि ऐसे हज़ारों फ़र्ज़ी पेजेज व एकाउंट्स को हटाया गया है, जिनके द्वारा आपत्तिनजक सामग्रियाँ पोस्ट की जा रही थी।
अब उनकी खैर नहीं जो किसी खास दल को जिताने, धर्म या भाषा संबंधी भड़काऊ भाषण या किसी तरह की अफवाह फैलाने जैसी पोस्ट डालकर चुनाव और मतदाता को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं।
यह पोस्ट उस दिन चर्चा में आया है जब से कुछ मुस्लिम संगठनों ने रमजान के दिन पड़ने वाली तारीखों पर चुनाव आयोग से आपत्ति जतानी शुरू की और रमजान के दिन पड़ने वाली तारीखों को बदलने की माँग की है।
अगली बार कोई एन्टीसैप्टिक क्रीम वाले लोग ऐसा विज्ञापन बनाएँगे जिसमें किसी नमाज़ पढ़ने जाते बच्चे पर हिन्दू बच्चों ने बम उछाल दिया हो, और उसकी चमड़ी जल जाए। बाद में पता चले कि वो तो हिन्दू ही था जिसने अपने मजहबी दोस्त के लिए टोपी पहनकर बम झेला! फिर आप चुपके से अपनी क्रीम बेच लेना यह कहकर कि साम्प्रदायिक सद्भावना का परिचायक है यह विज्ञापन।