राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के मुताबिक उन्हें शिकायत मिली हैं कि इन राज्यों में चल रहे तथाकथित किसान आंदोलन की वजह से उद्योग धंधों और परिवहन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
ऐसा पहली बार नहीं है जब किसी गुरुद्वारे का इस्तेमाल सिख युवाओं को कट्टरपंथी बनाने या केंद्र सरकार या कृषि कानूनों के बारे में गलत सूचना फैलाने के लिए किया गया हो।