एकता नाम की जिस हिन्दू महिला का बेरहमी से कत्ल कर दिया गया, उसके लिए आरफा के मन में कोई सहानुभूति नहीं है। दिक्कत खबर छापने वाले से है। समोसे में गोमांस, या पत्थर, कंडोम और गुटखा डाल कर खिलाने वालों के भी वो समर्थन में हैं।
फालतू डिस्क्लेमर डाल कर पौराणिक पात्रों का मजाक बनाने वाला 'न्यूजलॉन्ड्री' क्या इस्लाम, जन्नत, 72 हूरों और दारू की नदी पर व्यंग्य करेगा? यहाँ तो तथ्य कहने पर 'सर तन से जुदा' हो जाता है, सोचिए व्यंग्य पर क्या होगा।
जब इमरान खान और पाकिस्तान सरकार डर से काँप रही थी, भारत का मीडिया गिरोह दुश्मन मुल्क के महिमामंडन में लगा था। नए खुलासे के बाद क्या कहेगा राजदीप-बरखा गिरोह?