आरएसएस प्रमुख ने कहा कि जिन लोगों को देश के टुकड़े करना है वह समाज में एकता लाना बर्दाश्त नहीं करेंगे। क्रांति के रास्ते समाज में समरसता नहीं लाई जा सकती है।
5 अगस्त यानी 8 दिन पहले महंत नृत्य गोपाल दास प्रधानमंत्री मोदी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के साथ अयोध्या में राम मंदिर के भूमिपूजन में शामिल हुए थे। इसके साथ उन्होंने उनके साथ मंच भी साझा किया था।
भाषण के शुरू में ही मोहन भागवत स्पष्ट कहते सुने जा सकते हैं कि शब्दों का अर्थ बदलता जा रहा है। इसके बाद ही उन्होंने बताया है कि राष्ट्रवाद शब्द के इस्तेमाल करने पर आपके कथन का सीधा अर्थ फासीवाद और नाजीवाद से जोड़ दिया जाता है।
"तलाक के अधिक मामले शिक्षित और सम्पन्न परिवारों से सामने आ रहे हैं, क्योंकि शिक्षा और संपन्नता अहंकार पैदा करती है, जिससे परिवार टूट रहे हैं।" - इस लाइन को मीडिया ने भुनाया, सोनम कपूर ने भी प्रोपेगेंडा फैलाया। लेकिन हकीकत में किसी ने भी RSS चीफ के पूरे विडियो को देखने की कोशिश नहीं की।
"भारत में शक्ति का केंद्र सिर्फ संविधान है और कोई दूसरा शक्ति केंद्र हो, ऐसी हमारी कोई इच्छा नहीं है। यदि ऐसा हुआ तो हम विरोध करेंगे। संविधान में देश के भविष्य की तस्वीर एकदम साफ है। वही प्रारंभ बताता है और गंतव्य भी।"
"एक प्रचलित वाक्य है- विविधता में एकता। लेकिन हमारा देश एक कदम आगे जाता है। केवल विविधता में एकता नहीं बल्कि एकता की ही विविधता है। हम विविधताओं में एकता नहीं खोज रहे हैं, हम उस एकता को खोज रहे हैं जिससे विविधता निकली है।"
संघ प्रमुख ने कहा कि महिला के प्रति पुरुषों को शुद्ध दृष्टि रखनी होगी, जो अपराध करने वाले हैं इनकी भी तो माताएँ-बहने होंगी, तभी तो इनका भी अस्तित्व है।