उस्मानी ने कहा कि बाबरी विध्वंस को वो लोग न तो भूल सकते हैं और न ही इसमें शामिल लोगों को माफ़ कर सकते हैं। आरोपित ने कहा कि उसने जब यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया, तब से ही ऐसी सभाओं का आयोजन करता रहा है।
इसमें कहा कि रामराज्य कुछ और नहीं बल्कि शिर्क (अत्याचारी, गैर मजहबी) का झंडा और बाबरी विध्वंस तौहीद अर्थात न्याय के झंडे के पतन के अलावा और कुछ नहीं है।
अखिल भारत हिन्दू महासभा ने बाबरी मस्जिद ध्वंस के एवज में मुआवजे के रूप में मुस्लिम पक्ष को मिल रही 5 एकड़ ज़मीन के खिलाफ याचिका दायर करने जा रही है। इस आदेश पर आपत्ति जताते हुए महासभा अदालत से इस आदेश पर पुनर्विचार करने के लिए कहेगी।
“मुझे ये बताया गया कि मुझे केस से हटा दिया गया है, क्योंकि मेरी तबियत ठीक नहीं है। ये बिल्कुल बकवास बात है। जमीयत को ये हक है कि वो मुझे केस से हटा सकते हैं लेकिन जो वजह दी गई है वह गलत है।”
शाह ने कहा कि सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि राम जन्मभूमि मामले की सुनवाई में जल्दबाजी न करें। लेकिन, जनता ने मोदी को चुना। हमने अदालत से जल्द सुनवाई का आग्रह किया।
जमीयत ने कहा है कि पर्यटकों और घुमंतुओं के रचित वृत्तांतों पर अदालत को भरोसा नहीं करना चाहिए। उसने कहा है कि मंदिर गिराकर मस्जिद बनाने के कोई सबूत नहीं है। साथ ही इतिहास में हुई ग़लतियों को कोर्ट सुधार नहीं सकता है।
"मुस्लिमों के लिए एक देश बनाया गया है- पाकिस्तान। मगर भारत में ऐसा नहीं है, और अगर भारत में ऐसा है तो सिर्फ बहुसंख्यक हिन्दुओं की वजह से। भारत को हिन्दू जैसे धर्म की जरूरत है। अगर भारत सेक्युलर है तो हिन्दू की वजह से।"