कॉन्ग्रेस नेता हरीश रावत ने कहा कि सभी भारतीय चाहते हैं कि राम मंदिर का निर्माण अयोध्या में हो। उन्होंने यह भी कहा कि अगर आप किसी मुस्लिम भाई से भी पूछेंगे तो वह भी अयोध्या में राम मंदिर बनाने को लेकर कहेगा कि राम मंदिर अयोध्या में नहीं बनेगा तो कहाँ बनेगा?
“मैं आप में से एक हूँ। मेरे पूर्वज यहीं के यूपी और बिहार से थे। भारतीय संस्कृति इतनी समृद्ध है कि हमने इसे सहेज कर रखा है। फिजी का हर नागरिक मरने से पहले कम से कम एक बार भारत आने का सपना देखता है।”
दरअसल, अब दिवाली और राम मंदिर पर आने वाले फ़ैसले को देखते हुए क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए होमगार्डों की ज़रूरत भी बढ़ गई है। इसलिए, होमगार्डों की ड्यूटी बरकरार रखने का निर्णय लिया गया है।
वसीम रिजवी ने दावा किया कि अयोध्या की विवादित ज़मीन सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड की संपत्ति है ही नहीं, वो शिया वक़्फ़ बोर्ड की संपत्ति है। इसके पीछे तर्क देते हुए उन्होंने कहा कि बाबर के जिस सेनापति ने इस मस्जिद को बनवाया था, वो एक शिया मुसलमान था।
राजदीप सरदेसाई के इस बदले सुर से सभी हैरान हैं। अपनी ही बात से पलट गए हैं। पहले उन्होंने जल्दी सुनवाई ख़त्म करने का स्वागत किया था, अब वह पूछ रहे हैं कि इतनी जल्दी भी क्या है? उन्होंने गिरगिट की तरह रंग बदला है। राजदीप जजों को ही खरी-खोटी सुनाने लगे।
"अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के दूरगामी असर वाले परिणाम देखने होंगे, इसीलिए बेहतर होगा अगर सुप्रीम कोर्ट अपने इस ऐतिहासिक फैसले को कुछ इस तरह पेश करे, जिससे वह उन संवैधानिक मूल्यों का भी प्रदर्शन करे, जिन पर इस देश को भरोसा है।"
हिंदू पक्षों ने मंदिर निर्माण और उसके प्रबंधन की देखरेख को शीर्ष अदालत को सुझाव दिए हैं। वहीं, मुस्लिम पक्षकारों ने यह बताया है कि यदि विवादित भूमि का मालिकाना अधिकार उन्हें नहीं मिलता है तो उस सूरत में क्या किया जा सकता है।
वे पर्दे के पीछे से साजिश रचेंगे और डराने के लिए खून भी बहाएँगे। वे चाहेंगे कि माहौल बिगड़े ताकि मंदिर निर्माण टलता रहे। वे नक्शे को फाड़ेंगे, क्योंकि वे जानते हैं कि जिस दिन हिंदू जगेगा उनका इतिहास हर गली-नुक्कड़ पर फाड़ा जाएगा।
सत्ता के परिवर्तन और समय के चक्र से कभी-न-कभी कॉन्ग्रेस, माकपा, हिन्दू कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले 'मुल्ला मुलायम' की सपा जैसे लोग वापिस आ ही जाएँगे। उस समय अगर राम मंदिर सरकारी नियंत्रण में रहे तो क्या होगा, ये कभी सोचा है?