Homeवीडियोबेंगलुरु, माल्मो, ऑस्लो: इस कोढ़ का क्या इलाज है? | Ajeet Bharti speaks on...

बेंगलुरु, माल्मो, ऑस्लो: इस कोढ़ का क्या इलाज है? | Ajeet Bharti speaks on Sweden riots

स्वीडन में दंगे इसलिए हुए क्योंकि वहाँ पर ‘कुरान जलाओ रैली’ निकाली गई। माना कि यह रैली निकालना गलत और अवैध है। अवैध है तो उस स्टेट के पुलिस सिस्टम, नेता या प्रतिनिधियों के पास जाने के बजाए खुद को कानून मान लेना कहाँ तक उचित है।

पिछले दिनों स्वीडन और नॉर्वे में हुए दंगे के बारे में आपने काफी कुछ पढ़ा और सुना होगा। आपने कई लिबरल्स को इन दंगों को जस्टिफाई करते भी देखा होगा कि उनका कुरान जला दिया गया तो उन्होंने थोड़ा सा ये कर दिया तो क्या हो गया। किसी ने लिखा कि वहाँ तो सिर्फ 300 लोगों ने दंगे किए। यूपी में रेप हो रहा, तो कहीं पर कुछ और समस्या है, लेकिन भक्तों को सिर्फ स्वीडन का दंगा दिख रहा है।

सच्चाई यह है कि वहाँ पर 300 की संख्या काफी मायने रखती है, क्योंकि वहाँ की जनसंख्या काफी कम है। स्वीडन में दंगे इसलिए हुए क्योंकि वहाँ पर ‘कुरान जलाओ रैली’ निकाली गई। माना कि यह रैली निकालना गलत और अवैध है। अवैध है तो उस स्टेट के पुलिस सिस्टम, नेता या प्रतिनिधियों के पास जाने के बजाए खुद को कानून मान लेना कहाँ तक उचित है। नॉर्वे में भी यही हुआ।

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक करके देखें

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अजीत भारती
अजीत भारती
पूर्व सम्पादक (फ़रवरी 2021 तक), ऑपइंडिया हिन्दी

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

विवादों में ‘कॉकरोचों’ का 6 जून का प्रदर्शन, दिपके ने माना- ‘नहीं ली प्रोटेस्ट की परमिशन’: समझें- SC का फैसला, 7 दिन वाला नियम...

CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन के बहाने समझिए जंतर-मंतर पर धरना देने की पूरी प्रक्रिया, दिल्ली पुलिस के नियम और सुप्रीम कोर्ट का रुख।

‘पहले मंदिर में नमाज पढ़ेंगे, फिर कहेंगे मस्जिद थी’: बुलंदशहर से भोजशाला तक, हिंदू पवित्र स्थलों पर दावों का कट्टरपंथियों का पैटर्न और लिबरल...

हिंदुओं के पवित्र स्थानों पर नमाज अदा करना भूल नहीं, सोची-समझी साजिश है। यदि कट्टरपंथियों का मन इतना ही साफ होता तो मंदिरों पर कब्जा नहीं करते।
- विज्ञापन -