Homeदेश-समाजकॉन्ग्रेस के नए जोगी-जोगन की जटाएँ रामावतार राहुल और दुर्गावतार प्रियंका बन कर बाहर...

कॉन्ग्रेस के नए जोगी-जोगन की जटाएँ रामावतार राहुल और दुर्गावतार प्रियंका बन कर बाहर आ रही हैं

कॉन्ग्रेस का नेतृत्व कन्फ़्यूज़्ड है कि वो अपना जनेऊ दिखाता फिरे, या फिर नए-नए जोगी की सामाजिक स्वीकार्यता के लिए धूल और राख मिलाकर तुरत-फुरत में बनाई जटाओं को अपनी पहचान बनाए, या योगियों और संतों को गंगास्नान करते हुए देखने पर पापी कहता फिरे।

चुनाव आते जा रहे हैं, और धर्म को नकारने वाले, राम को मिथक कहकर झुठलाने वाले, अब राम और दुर्गा बनकर सामने आने लगे हैं। कल की ख़बर में राहुल गाँधी को राम के रूप में दिखाया गया था, और वहीं प्रियंका गाँधी को ‘गंगा की बेटी’ कहकर एक पोस्टर लगाया गया था।

आज प्रियंका गाँधी को दुर्गा के रूप में दिखाया जा रहा है। इस से पहले एक रोचक बात शशि थरूर के ट्विटर से आई थी जहाँ उन्होंने गंगा को हमाम और उसमें नहाने वालों को पापी और नंगा कहा था।

कॉन्ग्रेस का नेतृत्व कन्फ़्यूज़्ड है कि वो अपना जनेऊ दिखाता फिरे, या फिर नए-नए जोगी की सामाजिक स्वीकार्यता के लिए धूल और राख मिलाकर तुरत-फुरत में बनाई जटाओं को अपनी पहचान बनाए, या योगियों और संतों को गंगास्नान करते हुए देखने पर पापी कहता फिरे।

हम आपके लिए राहुल और प्रियंका की कुछ तस्वीरें छोड़ रहे हैं ताकि आप उन्हें देखकर शशि थरूर की भाषा में कॉन्ग्रेसियों की तरह पाप धो लें।

दुर्गा रूप में प्रियंका
गंगा की बेटी प्रियंका
राम के रूप में राहुल गाँधी
भगवान परशुराम के वंशज राहुल
रामभक्त पंडित राहुल गाँधी
थरूर
शशि थरूर का हिन्दू संतों और प्रतीकों को लेकर नज़रिया
Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

विवादों में ‘कॉकरोचों’ का 6 जून का प्रदर्शन, दिपके ने माना- ‘नहीं ली प्रोटेस्ट की परमिशन’: समझें- SC का फैसला, 7 दिन वाला नियम...

CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन के बहाने समझिए जंतर-मंतर पर धरना देने की पूरी प्रक्रिया, दिल्ली पुलिस के नियम और सुप्रीम कोर्ट का रुख।

‘पहले मंदिर में नमाज पढ़ेंगे, फिर कहेंगे मस्जिद थी’: बुलंदशहर से भोजशाला तक, हिंदू पवित्र स्थलों पर दावों का कट्टरपंथियों का पैटर्न और लिबरल...

हिंदुओं के पवित्र स्थानों पर नमाज अदा करना भूल नहीं, सोची-समझी साजिश है। यदि कट्टरपंथियों का मन इतना ही साफ होता तो मंदिरों पर कब्जा नहीं करते।
- विज्ञापन -