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दुकानों में मुर्गा-बकरा काटते दिखे तो खैर नहीं: अवैध बूचड़खानों पर योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

योगी ने कहा कि बूचड़खाने का मतलब सिर्फ स्लॉटर-हॉउस न समझा जाए बल्कि बाज़ारों में सड़क किनारे खुले-आम कट रहे जानवर वाली दुकानें भी इसमें शामिल हैं। योगी का कहना है कि इनपर भी प्रतिबन्ध लगाया जाए क्योंकि इनसे संक्रमण फैलता है, जिससे लोग बीमारियों के शिकार होते हैं।

योगी सरकार ने प्रदेश में बीमारी और संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रयास करते हुए बूचड़खानों पर कड़ा रुख अपनाया है। यूपी में योगी अदित्यनाथ की सरकार ने बूचड़खाने को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। प्रदेश सरकार ने दिवाली के दौरान इस सम्बन्ध में कठोर नीति अपनाते हुए यह फैसला किया है कि यदि इस नियम के पालन में किसी भी तरह की लापरवाही बरतने में गाज सीधे पुलिस और प्रशासन पर गिरेगी।

बता दें कि इस नीति के लिए सभी अधिकारियों को आदेश दे दिए गए हैं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी मंडलायुक्त, डीएम, आईजी और डीआईजी अधिकारियों से वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए इस सम्बन्ध में बात की। बैठक पर ज्यादा जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने बताया कि अवैध बूचड़खानों को लेकर योगी बेहद सख्त हैं और कोताही बरतने वाले डीएम और एसपी दोनों के खिलाफ सीधे कार्रवाई की जाएगी।

सीएम के मुताबिक प्रदेश में अवैध बूचड़खाने पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं बावजूद इसके कई जिलों में बूचड़खानों की शिकायत मिल रही है। योगी ने कहा कि बूचड़खाने का मतलब सिर्फ स्लॉटर-हॉउस न समझा जाए बल्कि बाज़ारों में सड़क किनारे खुले-आम कट रहे जानवर वाली दुकानें भी इसमें शामिल हैं। योगी का कहना है कि इनपर भी प्रतिबन्ध लगाया जाए क्योंकि इनसे संक्रमण फैलता है, जिससे लोग बीमारियों के शिकार होते हैं।

बता दें की यह कोई पहला मौका नहीं है जब प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने बूचड़खानों को लेकर ऐसा कोई आदेश दिया हो। 2017 में प्रचंड बहुमत के साथ यूपी की सत्ता में आने के बाद ही योगी सरकार ने बूचड़खानों को लेकर सख्ती दिखाई थी। उस वक़्त दावा किया गया था कि अवैध स्लॉटर-हॉउस किसी मानदंड को नहीं मानते हैं जिसके कारण उनके यहाँ काटे जाने वाले जानवर और उनका मीट बीमारी के मुख्य कारणों में से एक है।

बता दें कि उस वक़्त रिटेल में मीट बेचने वाले दुकानदारों को भी इस बात के निर्देश दिए गए थे कि वह लाइसेंसी बूचड़खाने से ही मीट खरीदकर बेचें। साथ ही दुकान पर पशु को न काटें। ऐसे दुकानों को या तो पर्दे या फिर चटाई से ढक कर मीट बेचने का आदेश दिया गया था। इस नीति का पालन उस वक़्त पूरी सख्ती के साथ कराया गया था, मगर एक बार फिर से इस तरह की दुकानें नियमों की धज्जियाँ उड़ाकर खुलना शुरू हो गई हैं यही वजह है कि योगी सरकार ने इस पर सख्ती दिखाई है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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