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किसी महिला को सबके सामने ‘वेश्या’ बताना नहीं है अपराध (धारा 509): केरल हाई कोर्ट ने दूसरी धारा का दिया तर्क

केरल हाई कोर्ट में 30 सितम्बर, 2024 को हुई एक सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी जस्टिस बदरुद्दीन ने की। जस्टिस बदरुद्दीन ने कहा कि धारा 509 के तहत इसको अपराध तब माना जाता जब यह शब्द महिला के सामने कहा गया होता और उसकी निजता का उल्लंघन किया गया होता।

केरल हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि किसी महिला को दूसरों के सामने ‘वेश्या’ कहना भारतीय दंड संहिता की धारा 509 के तहत अपराध नहीं है। हाई कोर्ट ने कहा कि यह अपराध तब होता जब यह बात महिला के सामने कही गई होती। हाई कोर्ट ने कहा कि महिला को लोगों से वेश्या बताना दूसरी धारा के अंतर्गत अपराध भले माना जा सकता है।

केरल हाई कोर्ट में 30 सितम्बर, 2024 को हुई एक सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी जस्टिस बदरुद्दीन ने की। जस्टिस बदरुद्दीन ने कहा कि धारा 509 के तहत इसको अपराध तब माना जाता जब यह शब्द महिला के सामने कहा गया होता और उसकी निजता का उल्लंघन किया गया होता।

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि यह दोनों ही शर्तें इस मामले में पूरी नहीं होती थी। ऐसे में कोर्ट ने इसे धारा 509 के तहत अपराध मानने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि महिला को बाकी लोगों से वेश्या बताना दूसरी धाराओं के अंतर्गत अपराध माना जा सकता है।

कोर्ट ने कहा, “यहाँ अपराध होने के लिए जरूरी पहला शर्त नहीं बनती क्योंकि महिला को आरोपित ने सीधे तौर पर अपशब्द कहे हों। ना महिला ने ऐसा सुना या देखा है। महिला का आरोप है कि आरोपित ने फ्लैट के निवासियों और पास के दुकानदारों से ऐसा कहा था। महिला को इस संबंध में कोई भी सीधी जानकारी नहीं है।”

हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी 2021 में केरल के कोच्चि में दर्ज किए गए एक मामले में सुनवाई करते हुए की है। यहाँ एर्नाकुलम इलाके की एक सोसायटी में रहने वाली एक महिला समीरा ने इसी सोसायटी में रहने वाले राहुल जॉर्ज, एनसन आइजे और द्य्विन कुरुविल्ला पर आरोप लगाया था कि इन तीनों ने सोसायटी और आसपास के इलाके में महिला के विषय में अपशब्द बोले।

महिला का आरोप था कि इन तीनों ने आसपास के लोगों से उसे वेश्या बताया। इसी को लेकर उसने शिकायत दर्ज करवाई थी। महिला की शिकायत के आधार पर तीनों के विरुद्ध धारा 509 (किसी महिला की लज्जा भंग करने के लिए अपशब्द कहना) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

इसके बाद आरोपितों ने यह FIR रद्द करवाने के लिए केरल हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। केरल हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए इसे याचिकाकर्ताओं की दलीलों को सही माना और उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई को रद्द कर दिया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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