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Pak में सिंधु नदी तक पहुँचने का लक्ष्य: 40000 भारतीय सैनिकों का रेगिस्तान में ‘सिंधु सुदर्शन’ शुरू

40,000 सैनिकों के साथ, 700 आर्मर्ड वाहन और दक्षिणी कमान के सुदर्शन चक्र कोर के 300 तोप भी इस अभ्यास में हिस्सा ले रहे हैं। इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल पॉड्स, हेल्मेट-माउंटेड और नाइट विज़न गॉगल्स से लैस...

जैसलमेर के रेगिस्तान में भारतीय सेना का दम देखने को मिल रहा है। सेना ने अपनी तैयारियों को परखने और उसे और धारदार बनाने के लिए गुरूवार (14 नवंबर) से थार के रेगिस्तान में ऑपरेशन सिंधु सुदर्शन शुरू किया है। इसमें सेना भारी भरकम हथियारों से युद्धाभ्यास करने में जुटी हुई है। सेना टैंकों के ज़रिए अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन कर रही है। इस अभ्यास को सिंधु सुदर्शन का नाम दिया गया है, जो सिंधु नदी तक पहुँचने के लक्ष्य को दर्शाता है।

अभ्यास में थल सेना और वायु सेना के बीच उच्च स्तर का तालमेल भी शामिल है, जिसमें वायुसेना को हवाई हमले और आपातकालीन निकासी की महत्वपूर्ण भूमिका करनी है। 40,000 सैनिकों के साथ, 700 आर्मर्ड वाहन और दक्षिणी कमान के सुदर्शन चक्र कोर के 300 तोप भी इस अभ्यास में हिस्सा ले रहे हैं। इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल पॉड्स, हेल्मेट-माउंटेड और नाइट विज़न गॉगल्स से लैस हेलीकॉप्टर रुद्र का उपयोग किया जा रहा है। हाल ही में शामिल 155 मिमी K9 वज्र भी एक्शन में है।

ख़बर के अनुसार, सिंधु सुदर्शन ऑपरेशन में लगातार 12 घंटे तक युद्ध लड़ने की क्षमता को मैदान में परखा जाएगा। युद्धाभ्यास के दौरान मैकेनाइज्ड फ़ोर्स पहली बार शूटर ग्रिड सेंसर का प्रयोग करने जा रही है। इसके तहत युद्ध क्षेत्र में इज़रायली यूएवी हेरोन, हेलीकॉप्टर व सैटेलाइट से टारगेट कर ग्रिड की तस्वीरें भेजी जाएँगी।

युद्धाभ्यास के हिस्से के रूप में, कई एकीकृत युद्ध समूह लगभग 100 किमी की सीमा के साथ विभिन्न स्थानों पर हमलों का अनुकरण कर रहे हैं। अभ्यास के दौरान, व्यक्तिगत युद्ध समूह पहले रॉकेट और आर्टिलरी गन का उपयोग कर हमले की शुरुआत करते हैं। बाद में, बख्तरबंद यूनिट सीमांकित अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को पार करते हैं और दुश्मन इकाइयों को घेर लिया जाता है। इसके बाद, इन्फैन्ट्री फॉर्मेशन प्रतिकूल बिंदुओं पर कब्जा कर लेती है। इस अभ्यास के दौरान, दुश्मन बलों की भूमिका निभाने वाली टुकड़ी पर आक्रामक प्रतिक्रिया का जवाब दिया जाता है। साथ ही हमलावर बलों की बाद की जवाबी कार्रवाई का भी मूल्यांकन किया जाता है और अभ्यास की आकलन किया जाता है।

ख़बर के अनुसार, निगरानी और आक्रामक प्रणालियों के साथ, इस अभ्यास में सेना के वायु रक्षा विंग और इंजीनियरिंग जैसे सहायक एलिमेंट्स भी शामिल हैं। इंजीनियरिंग एलिमेंट्स एंटी-टैंक माइंस को हटाकर और यांत्रिक पुलों को बिछाकर सैनिकों को आवाजाही की सुविधा प्रदान करता है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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