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‘द बंगाल फाइल्स’ विवाद में पल्लवी जोशी ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र, फिल्म को रोकने के लिए TMC के राजनीतिक दबाव और धमकियों का किया जिक्र: डायरेक्टर विवेक अग्निहोत्री ने माँगी सुरक्षा

राजनीतिक दबाव और धमकियों के बीच 'द बंगाल फाइल्स' रिलीज अटकी, निर्माता पल्लवी जोशी ने राष्ट्रपति से सुरक्षा की अपील की, विवेक अग्निहोत्री ने पोस्ट साझा कर आवाज बुलंद की।

फिल्म ‘द बंगाल फाइल्स’ की निर्माता पल्लवी जोशी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर फिल्म की रिलीज और टीम की सुरक्षा की माँग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के राजनीतिक दबाव और धमकियों के कारण मल्टीप्लेक्स फिल्म दिखाने से डर रहे हैं। कई FIR दर्ज हुईं, ट्रेलर ब्लॉक किया गया और थिएटर मालिकों को धमकी मिल रही है।

The Bengal Files फिल्म के निर्देशक विवेक रंजन अग्निहोत्री ने गुरुवार (4 सितम्बर 2025) को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर यह पत्र साझा किया। यह पोस्ट चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि इसमें फिल्म की रिलीज को रोकने के पीछे राजनीतिक दबाव और धमकियों का मुद्दा उठाया गया है।

पत्र की शुरुआत में पल्लवी जोशी ने स्पष्ट किया कि यह पत्र किसी विशेष सुविधा के लिए नहीं, बल्कि केवल सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए लिखा गया है। उन्होंने लिखा कि द बंगाल फाइल्स भारत के इतिहास के एक दर्दनाक अध्याय हिंदू नरसंहार और विभाजन की त्रासदियों को सामने लाती है।

उनके अनुसार यह केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि सच की आवाज है, जिसे जनता तक पहुँचाना जरूरी है। पल्लवी जोशी ने पत्र में आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने पहले ही फिल्म का विरोध किया था और उसके बाद से इस पर राजनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।

कई पुलिस FIR दर्ज हो चुकी हैं, ट्रेलर ब्लॉक कर दिया गया है और थिएटर मालिकों को धमकियाँ दी जा रही हैं, जिससे वे फिल्म दिखाने से डर रहे हैं। उनका कहना है कि यह सब फिल्म की रिलीज रोकने की कोशिश का हिस्सा है।

उन्होंने आगे बताया कि उनका परिवार भी इन धमकियों से प्रभावित हो रहा है। इसलिए उन्होंने राष्ट्रपति से निवेदन किया है कि फिल्म और इससे जुड़े कलाकारों को सुरक्षा प्रदान की जाए ताकि सत्य की आवाज दब न सके।

पत्र में उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि पद्म भूषण से सम्मानित अभिनेता विक्टर बनर्जी समेत कई बंगाली संगठनों ने पहले ही राष्ट्रपति को पत्र लिखकर फिल्म का समर्थन किया है। इससे यह साबित होता है कि सच के पक्ष में खड़े लोग मौजूद हैं, लेकिन राजनीतिक दबाव अब भी सबसे बड़ी बाधा है।

विवेक अग्निहोत्री ने इस पत्र को साझा करते हुए इसे ‘तत्काल अपील’ बताया। अपने कैप्शन में उन्होंने राष्ट्रपति से मामले में हस्तक्षेप करने और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्रालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को भी टैग किया, ताकि यह मुद्दा जल्द सुलझाया जा सके और फिल्म बंगाल में रिलीज हो पाए।

हिन्दुओं नरसंहार था ‘डायरेक्ट एक्शन डे’

यह फिल्म 1946 में अविभाजित बंगाल में हुई हिन्दू नरसंहार को दर्शाती है। इसमें 1946 का डायरेक्ट एक्शन डे और 1946 का ही नोआखली दंगा शामिल है। ये नरसंहार 5 दिनों तक चला था। कोलकत्ता में ही सिर्फ 72 घंटों में करीब 6000 हिन्दू मार दिए गए थे।

इस मजहबी दंगे में करीब 20,000 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए। 100000 लोगों को अपना सबकुछ छोड़कर पलायन करना पड़ा। हिंदुओं को चुन-चुन कर मारा गया, हिन्दू महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया, हिंदुओं की संपत्तियों को जला दिया गया।

पूर्वी बंगाल के नोआखाली में हिन्दुओं का कत्लेआम इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज है। ये कई महीनों तक चलता रहा। इस दौरान हजारों हिन्दुओं की हत्या कर दी गई।

एक अनुमान के मुताबिक करीब 75 हजार हिन्दुओं ने सिर्फ नोआखली में घर- बार छोड़ा जबकि टिप्परा से 20 हजार से ज्यादा लोग अपना सबकुछ छोड़ कर चले गए। फिल्ममेकर विवेक अग्निहोत्री ने बताया कि फिल्म हिन्दुओं के नरसंहार पर आधारित है और इसमें उस इतिहास को दिखाया गया है जिसको अब तक दबा कर रखा गया था।

बता दें कि 1946 में बंगाल में हुए ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ के नाम से हिन्दुओं के नरसंहार को सामने लाने जा रही फिल्म के डायरेक्टर विवेक रंजन अग्निहोत्री हैं। बंगाल की टीएमसी सरकार इस फिल्म को रोकने का प्रयास कर रही है। इसके लिए पश्चिम बंगाल के कई शहरों में विवेक अग्निहोत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। ये फिल्म 5 सिंतबर 2025 को रिलीज होने वाली है। इसे रोकने के लिए टीएमसी ने पूरा जोर लगा दिया है। पश्चिम बंगाल के मल्टीप्लेक्स ने इस फिल्म को दिखाने से मना कर दिया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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