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धर्मस्थल पर लगाए आरोपों में पीठाधीशों की गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात, साजिशों को देख की NIA जाँच की माँग: विरोध में उतरी कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार, छिपाया क्या जा रहा?

कर्नाटक के विभिन्न मठों के पीठाधीशों ने मिलकर केंद्र सरकार से धर्मस्थल विवाद मामले में की NIA (राष्ट्रीय जाँच एजेंसी) जाँच की माँग। लेकिन कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर इस माँग का विरोध कर रहे हैं।

धर्मस्थल विवाद मामले में NIA (राष्ट्रीय जाँच एजेंसी) द्वारा जाँच किए जाने की माँग तेज हो गई है। हाल ही में कर्नाटक के विभिन्न मठों के पीठाधीशों ने केंद्र सरकार से इस मामले की जाँच NIA से करवाने की माँग की। इस मुद्दे पर कर्नाटक के गृहमंत्री जी परमेश्वर ने NIA जाँच प्रस्ताव पर विरोध जताया है।

NIA जाँच की माँग

कर्नाटक के विभिन्न मठों के पीठाधीशों ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और उन्हें धर्मस्थल विवाद की गंभीरता के बारे में बताया। धर्मस्थल में एक व्यक्ति ने दावा किया था कि उसने सैकड़ों शवों को दफनाया है, जिनमें महिलाओं के शव भी शामिल थे, जिनके साथ यौन उत्पीड़न के संकेत पाए गए थे।

पीठाधीशों ने इस मामले की जाँच NIA से कराने की माँग की, क्योंकि उनका मानना है कि यह एक व्यापक साजिश का हिस्सा है। इसका उद्देश्य हिंदू धर्मस्थलों को बदनाम करना है। पीठाधीशों ने गृह मंत्री से इस मामले में त्वरित कार्रवाई का अनुरोध किया और कहा कि यह केवल धर्मस्थल का मामला नहीं, बल्कि अन्य हिंदू तीर्थ स्थलों को भी निशाना बनाने का प्रयास हो सकता है।

कॉन्ग्रेस सरकार का NIA जाँच पर विरोध

हालाँकि, कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने NIA जाँच के प्रस्ताव का विरोध किया है। जी परमेश्वर ने कहा कि राज्य सरकार ने पहले ही एक विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया हुआ है और इस जाँच को पूरा होने देना चाहिए।

जी परमेश्वर का यह भी कहना था कि अगर SIT जाँच में कोई कमी पाई जाती है तो उसे राज्य सरकार के पास लाया जाएगा। लेकिन फिलहाल NIA को इस मामले में शामिल करने का कोई औचित्य नहीं है।

जी परमेश्वर ने कहा, “हमने पहले SIT का गठन किया था, लेकिन अब कुछ धार्मिक नेता कह रहे हैं कि NIA जाँच की जाए। क्या SIT जाँच भी पूरी नहीं है?” जी परमेश्वर ने आगे कहा कि अगर NIA को इसकी जाँच का औचित्य साबित करना होता है तो राज्य सरकार उसे स्वीकार कर सकती है।

धर्मस्थल मामले की गंभीरता

धर्मस्थल मामले में एक व्यक्ति सी एन चिन्नैया ने दावा किया था कि वह सैकड़ों शवों को दफनाने का गवाह है, जिनमें यौन उत्पीड़न के निशान वाले शव भी शामिल थे। हालाँकि बाद में चिन्नैया को झूठी गवाही देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया।

धर्मस्थल विवाद में NIA जाँच की माँग और राज्य सरकार के विरोध के बीच, यह स्पष्ट है कि राजनीतिक और धार्मिक उथल-पुथल का यह मुद्दा अब पूरे कर्नाटक और देश में एक गर्म बहस बन चुका है। NIA की जाँच पर कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार की तरफ से खड़ी होने वाली दिक्कतें इस बात को और बढ़ा सकती हैं कि क्या यह मामला केवल एक स्थानीय विवाद है या यह कहीं बड़ा राजनीतिक और धार्मिक संकट पैदा कर सकता है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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