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पूरी तरह भूमिगत, ₹9785 करोड़ की लागत: मुंबई मेट्रो की जिस लाइन को डिरेल करना चाहती थी महाराष्ट्र की MVA सरकार, जानिए उससे कैसे जीवन होगा सुगम

मुंबई एक्वा लाइन का ये दूसरा विस्तार है। इस लाइन की शुरुआत 2024 में की गई थी। उस वक्त ये आरे और बीकेसी को जोड़ता था। मई 2025 में इसे आचार्य अत्रे चौक तक विस्तारित किया गया। अब साइंस म्यूजियम स्टेशन से कफ परेड स्टेशन तक ये चलेगा।

दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश और देश के सबसे अधिक आबादी वाले शहरों में एक मुंबई, इनदिनों पर्यावरण और यातायात की गंभीर समस्याओं से जुझ हो रहा है। इसको देखते हुए मुंबई मेट्रो लाइन 3 की शुरुआत हो रही है। इस लाइन को एक्वा लाइन भी कहा जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 अक्टूबर को इसका उद्घाटन करने वाले हैं। यह परिवहन सिस्टम को दुरुस्त करने में अहम भूमिका अदा कर सकता है।

आरे और बीकेसी को जोड़ने वाली एक्वा लाइन के प्रारंभिक चरण का उद्घाटन अक्टूबर 2024 में किया गया था। इसके बाद, मई 2025 में इसे आचार्य अत्रे चौक तक विस्तारित किया गया। अब साइंस म्यूजियम स्टेशन से कफ परेड स्टेशन तक ये चलेगा। इसमें 11 प्रमुख भूमिगत स्टेशन शामिल हैं। यात्रियों को कम से कम आधी दूरी तय करने की सुविधा देने के लिए पिछले कुछ वर्षों में इस लाइन को धीरे-धीरे विस्तारित किया गया है।

मुंबई सेंट्रल, ग्रांट रोड, गिरगाँव, कालबादेवी, सीएसएमटी, हुतात्मा चौक, चर्चगेट, विधान भवन, कफ परेड और साइंस सेंटर, मुंबई मेट्रो-3 के तीसरे और अंतिम खंड में आते हैं। यह मेट्रो कॉरिडोर उत्तर में आरे से दक्षिण में कफ परेड तक 33.5 किलोमीटर लंबा है और इसमें 27 स्टेशन हैं। इसका निर्माण मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमएमआरसीएल) ने किया है। आरे डिपो इस लाइन का एकमात्र हिस्सा है जो भूमिगत नहीं है।

9,785 करोड़ रुपये की लागत वाले इस चरण के साथ मेट्रो 3 कॉरिडोर का निर्माण पूरा हो गया। 2011 में इसकी योजना बनाई गई थी। इस पर काम जनवरी 2017 में देवेंद्र फडणवीस सरकार ने शुरू किया। सरकार ने इस दौरान 23,136 करोड़ रुपए का प्रारंभिक अनुमान बढ़कर 37,276 करोड़ रुपए हो गया। जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) ने 60% खर्च का वहन किया है, जबकि बाकि 40 फीसदी राशि केंद्र और राज्य सरकारों ने 50:50 के अनुपात में दिया है।

एक्वा लाइन के निर्माण के दौरान इंजीनियरों को दक्षिण मुंबई में ऐतिहासिक इमारतों और मुश्किल जमीन से निपटना पड़ा। उन्होंने कालबा देवी, गिरगाँव और फोर्ट जैसी जगहों पर 100 साल पुरानी इमारतों को बचाने के लिए नियंत्रित माइक्रोब्लास्टिंग और कीहोल टनलिंग जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया। इस दौरान किसी भी निवासी को स्थायी रूप से बेदखल नहीं किया गया, बल्कि 730 से अधिक परिवारों को MMRCL द्वारा यथास्थान पुनर्वास प्रदान किया गया।

परिवहन में क्रांति है एक्वा लाइन

माना जा रहा है कि एक्वा लाइन हर दिन 17 लाख यात्रियों को ले जाएगी, जिससे मुंबई की परिवहन व्यवस्था पर दबाव काफी कम होगा। पूरी तरह भूमिगत मार्ग होने की वजह से सड़कों और दूसरे विकल्पों पर असर भी नहीं पड़ेगा।

मेट्रो लाइन 3 मुंबई के सबसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक, आवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्रों से होकर गुजरती है। इसके अलावा यह छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय टर्मिनलों के साथ-साथ कफ परेड, नरीमन पॉइंट, फोर्ट और बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) जैसे वाणिज्यिक और कॉर्पोरेट केंद्रों के साथ-साथ मुंबई सेंट्रल, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) और चर्चगेट जैसे क्षेत्रों को जोड़ता है।

(फोटो साभार- टाइम्स ऑफ इंडिया)

एक्वा लाइन के माध्यम से शहर के मध्य क्षेत्रों, जैसे आरे और सीप्ज़ ​​(सांताक्रूज इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्र) जैसे आवासीय और औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुँचना आसान होगा। धारावी और शीतलदेवी जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों को भी बेहतर सार्वजनिक विकल्प मिलेगा। यानी मुंबई के भीड़भाड़ वाले बसों और लोकल ट्रेनों का बोझ थोड़ा कम हो जाएगा।

इस मेट्रो लाइन से आने-जाने का समय काफी कम होने की उम्मीद है। दरअसल बिजी टाइम के दौरान कफ परेड से आरे (जेवीएलआर) तक की यात्रा में केवल 54 मिनट लगेंगे। इससे सड़क पर कारों की संख्या कम होने से यातायात में 35% और ईंधन की खपत में प्रतिदिन करीब 3.54 लाख गैलन की कमी आएगी।

यह मेट्रो लाइन फिलहाल चल रहे मेट्रो लाइनों के साथ मिल कर पूरे शहर में कनेक्टिविटी में सुधार करेगी, जिससे सार्वजनिक परिवहन का एक व्यापक और प्रभावी नेटवर्क तैयार होगा।

यह मरोल नाका पर लाइन 1 (नीली लाइन), आरे जेवीएलआर (जोगेश्वरी-विक्रोली लिंक रोड) पर लाइन 6 (गुलाबी लाइन), सीएसएमटी पर लाइन 7ए (लाल लाइन) और लाइन 8 (गोल्ड लाइन), बीकेसी पर लाइन 2बी (पीली लाइन) के साथ-साथ दादर, महालक्ष्मी, मुंबई सेंट्रल, ग्रांट रोड और चर्चगेट पर पश्चिमी लाइन से जुड़ेगी।

द फ्री प्रेस जर्नल के अनुसार, एमएमआरसीएल के एक अधिकारी ने बताया है कि एक्वा लाइन गति के बारे में नहीं है, बल्कि आवागमन में सुगमता, सुरक्षा और सम्मान के बारे में भी है। एक बार पूरी तरह से चालू हो जाने पर, एक्वा लाइन मुंबई के सार्वजनिक परिवहन को बदल देगी। सड़कों पर भीड़भाड़ कम होगी और मुंबईवासियों के लिए एक सस्ता, सुगम परिवहन का साधन बनकर उभरेगी।

किफायती किराया, आराम पूरा

मुंबई मेट्रो लाइन 3 का किराया भी ज्यादा नहीं है। इसकी दरें 10 रुपए से 60 रुपए तक का है। टैरिफ चार्ट में बताया गया है कि 3 किलोमीटर तक यात्रा करने में 10 रुपए लगेंगे, जबकि 3 से 12 किलोमीटर के बीच की दूरी तय करने के लिए 20 रुपए लगेंगे।

टैक्सियों की तुलना में ये कम खर्चीला है, क्योंकि इतनी दूरी की यात्रा के लिए टैक्सियाँ 700 रुपए वसूलती हैं। नई प्रणाली भीड़भाड से बचाने के साथ-साथ वक्त पर चलने और गंतव्य तक पहुँचने की गारंटी देती है। साथ में एयरकंडीशन फ्री।

मेट्रो लाइन-3 के निर्माण में सामने आई चुनौतियाँ

एमएमआरसी ने मेट्रो लाइन के आसपास के इलाकों के आर्थिक विकास का बीड़ा भी उठाया है। एमएमआरसी ने नई रणनीति तैयार की है। इसके तहत मेट्रो लाइन के पास नरीमन पॉइंट पर 4.16 एकड़ भूमि के लिए भारतीय रिजर्व बैंक को पहले ही 3,472 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुका है।

पिछले साल 7 अक्टूबर 2024 को आरे कॉलोनी और बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) के बीच 12.69 किलोमीटर लंबे खंड को जनता के लिए खोल दिया गया था। 9 मई को, बीकेसी से वर्ली तक 9.8 किलोमीटर लंबे खंड का उद्घाटन किया गया। वर्ली (आचार्य अत्रे चौक) और कफ परेड के बीच 10 किलोमीटर का खंड अब 8 अक्टूबर 2025 से उपलब्ध है।

इसलिए, 33.5 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर को पूरा होने में 8 साल और 9 महीने लगे। इस बीच, 15,000 से ज़्यादा मज़दूरों, इंजीनियरों, वास्तुकारों और सुरंग निर्माण विशेषज्ञों ने इसमें योगदान दिया है।

मुंबई की घनी आबादी के चलते यहाँ भूमि अधिग्रहण बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। पूरी तरह से भूमिगत डिज़ाइन के कारण, मेट्रो-3 के लिए खुदाई, सुरंग बनाना और दूसरे जमीनी कारणों की वजह से पूरी प्रक्रिया में काफ़ी समय लग गया।

मुंबई में सुरंग निर्माण के दौरान जल-जमाव वाली मिट्टी, बेसाल्ट चट्टानों सहित अलग-अलग तरह की दिक्कतें बड़ी चुनौती बनी।

मुंबई जैसे महानगर के लिए मानसून एक बड़ी समस्या है। क्योंकि बारिश होते ही पूरा शहर पानी में डूब जाता है। इसके अलावा, मुंबई मेट्रो 3 के लिए मार्ग झुग्गी-झोपड़ियों, व्यस्त बाज़ारों और ऐतिहासिक ढाँचों के नीचे से गुजर रहे थे। इसके लिए अधिक ध्यान और समय की आवश्यकता थी। ऐतिहासिक ढाँचों के पास किसी भी भूमिगत निर्माण से ढाँचे को नुकसान पहुँच सकता था। इसलिए अति सतर्कता की जरूरत थी।

मेट्रो लाइन में देरी की वजह राजनीति भी रही

मेट्रो लाइन में देरी की एक वजह राजनीति भी रही। इस महत्वपूर्ण परियोजना के विस्तार को प्रभावित किया और इसकी लागत भी बढ़ा दी। पिछले साल अक्टूबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस ओर ध्यान दिलाया था।

ठाणे में एक रैली में उन्होंने आरोप लगाया, “मेट्रो लाइन 3 का काम देवेंद्र फडणवीस के मुख्यमंत्री रहते शुरू हुआ था और 60% काम उनके कार्यकाल में पूरा हुआ था। हालाँकि, जब महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सत्ता में आई, तो उन्होंने अहंकार के कारण परियोजना को रोक दिया, जिससे लागत में 14,000 करोड़ रुपये की वृद्धि हो गई। यह पैसा किसका है? क्या यह उनका पैसा है? नहीं, यह महाराष्ट्र के करदाताओं की गाढ़ी कमाई है।”

अलग-अलग चैनलों, सोशल मीडिया, एक्टिविटों, अभिनेताओं और गैर-सरकारी संगठनों एनजीओ के माध्यम से पेड़ों के कटने और पर्यावरण को बचाने के नाम पर आरे में मेट्रो शेड के निर्माण को रोकने के लिए ‘आरे बचाओ’ अभियान शुरू किया गया। हालाँकि आम लोग अपने आनेजाने के लिए हर दिन भयानक दिक्कतों का सामना कर रहे थे। शिवसेना उद्धव गुट के नेता आदित्य ठाकरे ने ‘मेट्रो विरोध’ को अपना पसंदीदा अभियान बना लिया और पर्यावरण के नाम पर मेट्रो शेड परियोजना को रोकने की कोशिश की।

महा विकास अघाड़ी ने 2019 में मेट्रो कार शेड को आरे से कांजुरमार्ग ले जाने का फैसला लिया। ठाकरे ने पदभार संभालने के तुरंत बाद घोषणा की, “मैंने आज आरे मेट्रो कार शेड परियोजना का काम रोकने का आदेश दिया है। मेट्रो का काम नहीं रुकेगा, लेकिन अगले फैसले तक आरे का एक पत्ता भी नहीं काटा जाएगा। मैं पहला मुख्यमंत्री हूँ जिसका जन्म मुंबई में हुआ है। मेरे दिमाग में यह चल रहा है कि मैं शहर के लिए क्या कर सकता हूँ।”

हालाँकि, बॉम्बे हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई थी क्योंकि कांजुरमार्ग की भूमि विवादित था। यहाँ जमीन के मालिकाना हक का मामला लंबित था और मामले के सुलझने तक इसका इस्तेमाल कोई नहीं कर सकता था। तब यह खुलासा हुआ था कि सरकार को पता था कि कांजुरमार्ग की संपत्ति पर मुकदमा चल रहा है।

बाद में, महाराष्ट्र के महाधिवक्ता को बॉम्बे उच्च न्यायालय में एक आवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया जिसमें कहा गया कि सरकार 2022 में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पहली कैबिनेट बैठक के दौरान शेड को कांजुरमार्ग से वापस आरे में स्थानांतरित कर देगी।

भारत में जापानी राजदूत सुजुकी सातोशी ने भी 17 फ़रवरी 2021 को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखे एक पत्र में अनुमानित खर्च और परियोजना में हो रही देरी को लेकर चिंता जताई थी।

जापानी राजदूत ने जोर देकर कहा, “इस परियोजना के वित्तपोषक होने के नाते, जापान सरकार और जेआईसीए इस बात को लेकर बेहद चिंतित हैं कि अगर समय पर ऋण नहीं दिया गया, तो परियोजना में देरी या गतिरोध जैसी गंभीर चुनौतियाँ आ सकती हैं।”

एमवीए के सत्ता से बेदखल होने के बाद भी यह दुष्प्रचार जारी रहा। आदित्य ठाकरे कई विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुए और यहाँ तक कि झूठ भी बोला कि मेट्रो नेटवर्क कार शेड के बिना भी चल सकता है। पूर्व मंत्री के अनुसार, कारों को हर तीन से चार महीने में केवल रखरखाव की आवश्यकता होती है, इसलिए यह मुंबई मेट्रो का अनिवार्य हिस्सा नहीं है।

दूष्प्रचार के लिए आदित्य ठाकरे ने बच्चों का इस्तेमाल किया। इसके बाद राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) को हस्तक्षेप करना पड़ा। दिलचस्प बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इन दावों को खारिज कर दिया था, फिर भी दुष्प्रचार बेरोकटोक जारी रहा।

राजनीतिक और अन्य, कई चुनौतियों और देरी का सामना करने के बावजूद, यह इंजीनियरिंग चमत्कार आखिरकार साकार हो गया है, जिससे न केवल मुंबई के निवासियों को लाभ हुआ है, बल्कि देश की तकनीकी क्षमताओं का लोहा दुनिया ने माना है।

(ये लेख अंग्रेजी में मूल रूप से लिखी गई है। इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)

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Rukma Rathore
Rukma Rathore
Accidental journalist who is still trying to learn the tricks of the trade. Nearing three years in the profession.

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