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37% शादी कुंडली नहीं मिलाने के कारण टूटी, 63% सनातनी रीतियों की उपेक्षा से… BHU के शोध से सामने आए आँकड़े: 36 गुण ही नहीं, ग्रहों का मिलान भी जरूरी

रिसर्च में पाया गया कि 37 प्रतिशत शादियाँ सिर्फ इसलिए टूट रही हैं क्योंकि वर-वधु की कुंडली ठीक से मिलाई ही नहीं गई। ग्रह दोषों को नजरअंदाज कर शादियाँ कर ली जाती हैं, जिसके बाद रिश्ते बिखर जाते हैं।

आज के दौर में शादियाँ टूटने की खबरें आम हो गई हैं। लव अफेयर, लिव-इन रिलेशनशिप और घरेलू हिंसा जैसे कारणों के बीच अब एक नया पहलू सामने आ रहा है- कुंडली मिलान की लापरवाही। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के ज्योतिष विभाग के तीन प्रोफेसरों और दो शोधार्थियों ने इस मुद्दे पर गहन रिसर्च की है। उनके निष्कर्ष चौंकाने वाले हैं।

रिसर्च में पाया गया कि 37 प्रतिशत शादियाँ सिर्फ इसलिए टूट रही हैं क्योंकि वर-वधु की कुंडली ठीक से मिलाई ही नहीं गई। ग्रह दोषों को नजरअंदाज कर शादियाँ कर ली जाती हैं, जिसके बाद रिश्ते बिखर जाते हैं। कभी लव अफेयर में फँसकर एक-दूसरे का मर्डर करवा देते हैं, तो कभी नया साथी तलाशने लगते हैं।

यह रिसर्च बीएचयू के ज्योतिष विभाग में सोमवार (13 अक्टूबर 2025) को आयोजित एक सेमिनार में पेश की गई। सेमिनार में इंदौर के माँ शारदा ज्योतिषधाम अनुसंधान संस्थान ने मेजबानी की। भारत के 15 राज्यों से शोधार्थी पहुँचे, साथ ही नेपाल, सिंगापुर और दुबई से भी विशेषज्ञ शामिल हुए। इस सेमिनार में प्रोफेसर विनय पाण्डेय ने अपना शोधपत्र पढ़ा।

प्रोफेसर विनय पाण्डेय ने कहा, “लड़का-लड़की की कुंडली में 36 में से 32 गुण मिलने के बावजूद ग्रहों का मिलान जरूरी है। लेकिन आजकल लोग मॉडर्न दिखने के चक्कर में सनातन रस्में निभाते ही नहीं। शादी में फोटोशूट और सेल्फी में व्यस्त रहते हैं। मंत्रों का उच्चारण तक नहीं होता। नतीजा? शादियाँ टूट रही हैं, पति-पत्नी एक-दूसरे का खून कर रहे हैं।”

रिसर्च की जरूरत क्यों पड़ी?

प्रोफेसर विनय पाण्डेय से ऑपइंडिया ने खास बातचीत की। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में पति-पत्नी के बीच जघन्य हत्याओं के मामले बढ़े हैं। ज्यादातर केसों में एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर का हाथ होता है। प्रो. विनय ने कहा, “ये चौंकाने वाले हैं। जब कुंडली और ग्रह मिलान ठीक से होता है, तो रिश्ता 100 प्रतिशत सही चलता है। ज्योतिष तो एक तरह की गणित है, वैज्ञानिक तथ्य है।”

रिसर्च की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि हिंदू धर्म में विवाह को अटूट बंधन माना जाता है। लेकिन आधुनिकता के नाम पर परंपराओं को ठुकरा दिया जा रहा है। ज्योतिष विभाग के प्रमुख प्रो. शत्रुघ्न त्रिपाठी कहते हैं, “लोग आधुनिक होने का ढोंग करते हैं। कुंडली मिलान को बकवास मानते हैं। नतीजे आपके सामने हैं – तलाक, हिंसा और हत्याएँ।” रिसर्च टीम ने महसूस किया कि ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक यही समस्या फैल रही है। लिव-इन और लव अफेयर को बढ़ावा मिल रहा है, लेकिन शादी के बाद रिश्ते संभाल नहीं पाते।

रिसर्च कैसे की गई? कितने बड़े दायरे में?

ये रिसर्च करीब डेढ़ साल से चल रही है। आँकड़े आने के बाद उन पर रिसर्च में छह महीने लगे। टीम में प्रो. विनय पाण्डेय, प्रो. आशुतोष त्रिपाठी, प्रो. अमित कुमार मिश्रा, शोधार्थी गणेश प्रसाद और नेपाल की पीएचडी छात्रा रोदना घिनरे शामिल थे।

डेटा इकट्ठा करने के लिए दो तरीके अपनाए गए। पहला बीएचयू ज्योतिष विभाग की ओपीडी से। यहाँ पूरे देश से लोग कुंडली दिखाने आते हैं। दूसरे शोधार्थियों को यूपी के 12 जिलों में भेजा गया। वहाँ उन जोड़ों को चुना गया जिनकी शादी के तीन साल के अंदर तलाक हो गया था। कुल 250 केस इकट्ठे किए गए।

इनके परिवारों से तीन सवाल पूछे गए

  1. शादी से पहले कुंडली मिलाई गई? कितने गुण मिले? कोई ग्रह दोष तो नहीं था?
  2. अगर दोष मिला, तो शादी क्यों की?
  3. शादी के दौरान सनातन रीति-रिवाज पूरी तरह फॉलो किए गए?

ये सवाल सरल थे, लेकिन जवाबों ने सच्चाई उजागर कर दी। प्रो. विनय कहते हैं, “डेटा एनालिसिस में पाया कि 37 प्रतिशत केसों में शादी के एक-दो साल में ही टूटाव आ गया। कारण? कुंडली ठीक से नहीं मिलाई गई। लोग जल्दबाजी में रिश्ता पक्का कर लेते हैं।” बाकी 63 प्रतिशत मामलों में सनातन रीति-रिवाजों की अनदेखी हुई। मुहूर्त होटल बुकिंग के हिसाब से तय किया गया। मंत्रोच्चारण अधूरा रहा। उन्होंने कहा, “शादी एक धार्मिक संस्कार है, लेकिन लोग इसे पार्टी बना देते हैं।”

ज्योतिष आधारित इस रिसर्च का दायरा बड़ा है। यूपी के जिलों के अलावा ओपीडी से राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार जैसे राज्यों के केस शामिल हुए। कुल मिलाकर 250 परिवारों से बातचीत हुई, जो एक मजबूत सैंपल साइज है। अभी शोध को प्रकाशित करने में काफी समय है। डाटा भी और जोड़ा जा रहा है। केसों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है।

शोधार्थी रोदना घिनरे ने नेपाल के परिप्रेक्ष्य से योगदान दिया। उन्होंने बताया कि वहाँ भी कुंडली मिलान की अनदेखी से रिश्ते टूट रहे हैं। हालाँकि प्रो. विनय पाण्डेय कहते हैं कि आँकड़े लगभग इसी राह पर चलने वाले हैं।

इस दौरान प्रो. विनय पाण्डेय से जब सवाल पूछा गया कि जिन लोगों की कुंडलियाँ विवाह के समय नहीं मिलाई जाती, वो भी तो सफल या फिर असफल-दो ही श्रेणियों में आती हैं। ऐसे में सफल और असफल होने के पीछे भी ज्योतिष की गणनाओं को माना जाए? प्रो. विनय पाण्डेय ने कहा, ‘सफल या असफल शादियों, चाहे वो किसी भी धर्म-देश की हों, उनकी भी ज्योतिषीय गणना निकाली जा सकती है। कुंडली न मिलाने का मतलब ये नहीं हुआ कि उनकी कुंडली मिल नहीं रही। पीछे से सबकुछ सही होने पर ही शादियाँ चलती हैं।’

प्रो. विनय पाण्डेय ने कहा कि ज्योतिष को गणितीय नजर से देखेंगे, तो फर्क समझ में आएगा। उन्होंने कहा कि प्रेम-विवाह करने वाली शादियाँ भी टूट रही हैं और वो चल भी रही हैं। अगर उनकी कुंडलियों का मिलान किया जाए, तो सबकुछ सामने आ जाएगा। प्रो. विनय पाण्डेय का कहना है कि गणित हर जगह मौजूद है, चाहे उसकी जानकारी किसी को हो या न हो।

रिसर्च के नतीजों में क्या-क्या सामने आया?

रिसर्च के मुख्य निष्कर्ष यही हैं कि कुंडली मिलान सिर्फ गुणों की गिनती नहीं, बल्कि ग्रहों का गहरा विश्लेषण है। प्रो. विनय ने स्पष्ट किया, “कुंडली मिलान दो तरह का होता है – अष्टकूट (गुण मिलान) और ग्रह मिलान। ज्यादातर ज्योतिषी गुण तो मिला देते हैं, लेकिन ग्रहों की गहराई नहीं देखते। 36 में से 32 गुण मिलने पर भी अगर ग्रह दोष है, तो रिश्ता नहीं चलता।”

हिंदू विवाह
हिंदू विवाह की प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो साभार: AI ChatGPT)

मुख्य दोष जो सामने आए

मांगलिक दोष: कुंडली में मंगल पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में हो तो मांगलिक दोष। ऐसे में मांगलिक से ही शादी करनी चाहिए। उपाय तो हैं, लेकिन रिसर्च में पाया कि उपाय के बावजूद 40 प्रतिशत मामलों में समस्या बनी रहती है।

नाड़ी दोष और गण दोष: ये स्वास्थ्य और स्वभाव की असंगति पैदा करते हैं।

चंद्र बल विचार: चंद्रमा वर-वधु की राशि से तीसरा, छठा, सातवाँ, दसवाँ या ग्यारहवाँ भाव शुभ। लेकिन चौथा, आठवाँ या बारहवाँ अशुभ। दान से सुधार संभव, लेकिन अनदेखा करने से वैवाहिक कलह।

शुभ लग्न: तुला, मिथुन, कन्या, वृषभ या धनु लग्न शुभ। लग्न शुद्धि में शनि बारहवें, मंगल दसवें या शुक्र तीसरे भाव में न हो।

मुहूर्त की अनदेखी: पंचांग के आधार पर मुहूर्त चुनना जरूरी। पंचेश्ट अभाव से संतान या रिश्ते की समस्या।

63 प्रतिशत केसों में मुहूर्त होटल बुकिंग पर निर्भर था। प्रो. शत्रुघ्न त्रिपाठी कहते हैं, “36 गुणों में कम से कम 18 का मिलान जरूरी है, लेकिन लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। हिंदू धर्म में तलाक का कोई स्पष्ट वर्णन नहीं है। विवाह मेलापक से पक्का होता है।”

रिसर्च में पाया कि जहाँ कुंडली सही मिलाई गई, वहाँ तलाक की दर शून्य रही। लेकिन लापरवाही से न सिर्फ तलाक, बल्कि घरेलू हिंसा और हत्याएँ बढ़ीं। एक केस में पत्नी ने लव अफेयर के चक्कर में पति का मर्डर करवा दिया। वजह? ग्रह दोष को अनदेखा किया गया।

देशभर में तलाक की दर, जानें – राज्यवार आँकड़े

रिसर्च ने राज्यवार तलाक दरों पर भी रोशनी डाली। भारत में कुल तलाक दर करीब 1 प्रतिशत है, लेकिन शहरी इलाकों में 30 प्रतिशत तक। ग्रामीण क्षेत्रों में कम, लेकिन बढ़ रही है। रिसर्च टीम ने सरकारी आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि ज्योतिषीय लापरवाही ही मुख्य कारण है।

यहाँ राज्यवार प्रमुख आँकड़े दिए जा रहे हैं (प्रतिशत में नवीनतम 2025 डेटा के आधार पर)-

तलाक दर के आँकड़े

ये आँकड़े राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय और विभिन्न सर्वे से लिए गए। उत्तर प्रदेश में 11.6 प्रतिशत दर के साथ रिसर्च के निष्कर्ष मेल खाते हैं – यहाँ कुंडली मिलान की लापरवाही से ही मामले बढ़े। महाराष्ट्र में 18.7 प्रतिशत तक शहरी तलाक, जहाँ फोटोशूट और मॉडर्निटी हावी है। कुल मिलाकर शहरी बनाम ग्रामीण में 30 गुना फर्क है। खास बात ये है कि जॉइंट फैमिली में तलाक दर बेहद कम है, जबकि न्यूक्लियर फैमिली में ये दर ज्यादा है।

सुझाव: परंपराओं को न छोड़ें

रिसर्च टीम ने सुझाव दिए कि शादी से पहले पंडित की सलाह लें। मुहूर्त पंचांग से चुनें, न कि होटल बुकिंग से। ग्रह दोष पर उपाय करवाएँ, लेकिन अनदेखा न करें। प्रो. आशुतोष त्रिपाठी कहते हैं, “लव अफेयर ठीक है, लेकिन शादी के लिए ज्योतिष जरूरी है। ये गणित है, विश्वास नहीं।” सेमिनार में विशेषज्ञों ने कहा कि मॉडर्निटी में परंपरा को अपनाना भी जरूरी है। ऐसे में फोटोशूट तो कराते रहिए, लेकिन मंत्रोच्चार और ज्योतिष की भी भूमिका को स्वीकार करें।

यह रिसर्च न सिर्फ भारत, बल्कि नेपाल-सिंगापुर जैसे देशों के लिए मार्गदर्शक बनेगी। प्रो. अमित कुमार मिश्रा ने कहा, “हमारी कोशिश है कि तलाक की दर 50 प्रतिशत कम हो। बस कुंडली को गंभीरता से लें।”

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श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
I am Shravan Kumar Shukla, known as ePatrakaar, a multimedia journalist deeply passionate about digital media. I’ve been actively engaged in journalism, working across diverse platforms including agencies, news channels, and print publications. My understanding of social media strengthens my ability to thrive in the digital space. Above all, ground reporting is closest to my heart and remains my preferred way of working. explore ground reporting digital journalism trends more personal tone.

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