गुजरात के गिर सोमनाथ में स्थित प्रभास पाटण में प्रशासन द्वारा चलाई जा रही मेगा डिमोलिशन ड्राइव के दौरान तनावपूर्ण स्थिति बन गई। सरकारी जमीन पर बने निर्माणों को हटाने का काम चल रहा था। इसी दौरान एक दरगाह को हटाने को लेकर मुस्लिम टोला इकट्ठा हो गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएँ और बच्चे थे। इस टोले ने पुलिस पर पथराव किया, जिससे दो पुलिसकर्मी घायल हो गए। अब इस घटना के मामले में 100 के टोले खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, सोमनाथ में काफी समय से प्रशासन द्वारा गैरकानूनी निर्माणों के खिलाफ मेगा डिमोलिशन ड्राइव चलाई जा रही है। इस ड्राइव में कई रिहायशी और कमर्शियल गैरकानूनी निर्माण ध्वस्त किए जा रहे हैं। इसी कड़ी के तहत 10 नवंबर को प्रभास पाटण पुलिस स्टेशन इलाके के शंख सर्कल के पास सोमनाथ मंदिर के नजदीक दुकानें, मकान और मजहबी स्थल वाली 11 संपत्तियों को हटाने की तैयारी की गई थी।
ज्यादातर कब्जे हटाने के बाद पुलिस सहित टीम शाम के समय गैरकानूनी हजरत रंगीलाशाह दरगाह हटाने पहुँची तो बुर्काधारी महिलाओं और बच्चों के साथ एक ग्रुप वहाँ घुस आया और पुलिस से विवाद शुरू कर दिया। पुलिस ने इस भीड़ को समझाने की काफी कोशिश की, लेकिन भीड़ में मौजूद लोगों ने चिल्लाकर पुलिस पर सीधा हमला कर दिया और पत्थर बरसाने शुरू कर दिए।

इस दौरान पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज किया और तीन टीयरगैस के गोले छोड़े। इसके बाद टोला तितर-बितर हो गया और स्थिति काबू में आ गई। इस पथराव की घटना में प्रभास पाटण के पीआई एमवी पटेल तथा सर्विलांस स्क्वॉड के हेड कांस्टेबल कुलदीपसिंह परमार घायल हो गए। पुलिस के मुताबिक, 80 से 100 लोगों के टोले ने पुलिस पर पथराव किया था।
स्थिति काबू में आने के बाद पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने के लिए ऑपरेशन शुरू किया। पुलिस के मुताबिक अभी स्थिति पूरी तरह काबू में है और हमलावरों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया है। टोले में मौजूद महिलाओं के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है।
17 नामजद और 100 की भीड़ के खिलाफ मुकदमा
पथराव की इस घटना को लेकर पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है। इस मामले में 17 नामजद लोगों सहित 100 के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। हमले की घटना के बाद पुलिस ने वीडियो फुटेज के आधार पर कार्रवाई की।
डिप्टी मामलतदार रणजीतसिंह खेर की शिकायत के आधार पर पुलिस ने 17 नामजद लोगों सहित करीब 100 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी उपलब्ध है।
प्रभास पाटण पुलिस स्टेशन में BNS की धारा 189(2), 189(3), 189(5), 190, 191(2), 195(1), 125, 121(1) और गुजरात पुलिस एक्ट की धारा 135 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। मुकदमा दर्ज मुख्य आरोपितों में रफीक गढ़िया, शबाना हारुन मोठिया, रजिया हुसैन कालवात, साकील उर्फ भूरो, गुलाम साबिर डॉक्टर, राजुशा हिनफशा बानवा, शकील उर्फ गली कालवात, ओबामा, नदीम कालवाणिया, अयूब बदाम, रफीक उर्फ बोदु, सब्बीर मौलाना, सुफियान कालवाणिया, मयुद्दीन हनीफ आमद महमद महिडा, सब्बीर इकबाल और सब्बीर हारुन शामिल हैं।
ऑपइंडिया से बात करते हुए शिकायतकर्ता डिप्टी मामलतदार (सर्कल ऑफिसर) रणजीतसिंह खेर ने बताया कि सरकारी काम के तहत उनकी टीम पुलिस सुरक्षा के साथ हजरत रंगीला दरगाह ध्वस्त करने पहुँची थी। यह दरगाह सरकारी जमीन पर बनी है। जैसे ही टीम वहाँ पहुँची कि स्थानीय महिलाएँ, बच्चे और पुरुषों का ग्रुप चिल्लाने लगा और पुलिस के समझाने के बावजूद सरकारी काम में दखल देने लगा। पुलिस ने और समझाने की कोशिश की तो महिलाओं समेत पूरे ग्रुप ने पथराव शुरू कर दिया।
खेर ने आगे बताया कि पथराव तेज होने के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू किया और टीयर गैस के गोले छोड़कर स्थिति काबू में ली। उन्होंने यह भी कहा है कि स्थिति काबू में लेने के बाद उनकी टीम ने पुलिस के साथ मिलकर गैरकानूनी दरगाह ध्वस्त कर दी। उन्होंने बताया है कि पुलिस इस मामले में कार्रवाई कर रही है, लेकिन डिमोलिशन ड्राइव अभी भी जारी रहेगी।

हमले के बाद आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने तुरंत कॉम्बिंग ऑपरेशन शुरू किया है। हालाँकि ज्यादातर आरोपित घटना के बाद फरार हो चुके हैं, जिनकी तलाश पुलिस कर रही है। प्रशासन ने साफ कहा है कि सरकारी जमीन से गैरकानूनी कब्जे हटाने का काम जारी रहेगा और कानून हाथ में लेने वाले तथा सरकारी कर्मचारियों पर हमला करने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएँगे।
और जानकारी के लिए प्रभासपाटण पुलिस से भी संपर्क किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। जवाब मिलने की स्थिति में रिपोर्ट अपडेट की जाएगी।
(मूल रूप से ये खबर गुजराती में लिखी गई है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)


