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एक के बाद एक वैज्ञानिकों की मौत और गुमशुदगी से हिला अमेरिका, निशाने पर न्यूक्लियर साइंटिस्ट से लेकर NASA इंजीनियर तक: पढ़ें- ऐसे 10 मामले

24 साल तक FBI में काम कर चुके स्वेकर का कहना है कि अन्य देश अमेरिका के उन लोगों को निशाना बना सकते हैं जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी अहम जानकारी होती है।

क्या अमेरिका में कुछ ऐसा हो रहा है जो आम लोगों से छिपाया जा रहा है? एक के बाद एक NASA के कर्मियों, न्यूक्लियर साइंटिस्ट और सैन्य अधिकारियों की मौत और गुमशुदगी ने अब एक खौफनाक पैटर्न का रूप ले लिया है। जिन लोगों पर देश की सुरक्षा और विज्ञान की खोज की जिम्मेदारी थी, वही अब रहस्यमयी हालात में या तो मर रहे हैं या अचानक लापता हो रहे हैं और सबसे बड़ी बात कई मामलों में किसी भी एजेंसी के पास इसका कोई साफ जवाब नहीं है।

मीडिया में इन मामलों की हालिया चर्चा डेली मेल की एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुई। 22 मार्च 2026 की इस रिपोर्ट में रिटायर्ड जनरल विलियम नील मैककासलैंड और नासा की एयरोस्पेस इंजीनियर मोनिका जैसिंटो रेजा के सिर्फ आठ महीनों के भीतर 2 अलग-अलग घटनाओं में ट्रैकिंग के दौरान रहस्यमयी तरीके से गायब होने की बात कही गई। 22 मार्च 2026 की डेली मेल की इस रिपोर्ट में ऐसे रहस्यमयी मामलों की संख्या 5 बताई गई थी जो 11 अप्रैल 2026 की एक ताजा रिपोर्ट में बढ़कर 10 बताई गई है।

कौन थे मैककासलैंड व रेजा और कैसे हुए गायब?

68 साल के रिटायर्ड जनरल मैककासलैंड और 60 वर्षीय रेजा दोनों एयर फोर्स रिसर्च लेबोरेटरी से जुड़े बड़े नाम थे। मैककासलैंड का नाम ओहायो के राइट-पैटरसन एयर फोर्स बेस में कथित गुप्त UFO प्रोग्राम से जोड़ा जाता रहा है। वहीं, रेजा एडवांस स्पेस टेक्नोलॉजी पर काम कर रही थीं। इसी वजह से कुछ लोग यह दावा कर रहे हैं कि दोनों को उनके काम की वजह से निशाना बनाया गया हो सकता है या वे खुद छिप गए हों।

मैककासलैंड 27 फरवरी 2026 को अचानक अपने घर से बिना फोन के निकल गए थे और आखिरी बार न्यू मैक्सिको के अल्बुकर्क में एक जगह के पास देखे गए। उनके पास न फोन था, न कोई ट्रैकिंग डिवाइस और न ही चश्मा। उनकी पत्नी सुसान ने कहा कि उन्हें किसी साजिश का शक नहीं है लेकिन यह जरूर बताया कि मैककासलैंड सिर्फ जूते और अपनी .38 कैलिबर रिवॉल्वर लेकर घर से निकले थे। टेनेसी के सांसद टिम बर्चेट का कहना है कि मैककासलैंड के पास अमेरिका के परमाणु रहस्य थे।

जनरल मैककासलैंड

वहीं, मोनिका रेजा 22 जून 2025 से लापता हैं। वह जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी में काम कर रही थीं और ‘मोंडालॉय’ नाम की एक खास धातु की सह-खोजकर्ता थीं। उनके गायब होने के चार दिन बाद इंटरनेट पर उनका एक मेमोरियल पेज भी बना जिसमें उन्हें मृत बताया गया था लेकिन बाद में वह पेज हटा दिया गया। अधिकारियों ने अभी तक उनके शव मिलने की पुष्टि नहीं की है और मामला अब भी अनसुलझा है।

मोनिका रेजा

3 अन्य वैज्ञानिकों की रहस्यमयी मौत की कहानी

इस रिपोर्ट में 3 अन्य वैज्ञानिकों की हत्या का भी जिक्र किया गया है जिसमें 47 साल के नूनो लुरेरो भी शामिल हैं। लुरेरो की 15 दिसंबर 2025 को बोस्टन के पास उनके घर में हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार, हमलावर उनका पुराना सहपाठी था। लुरेरो एक जाने-माने वैज्ञानिक थे और हाल ही में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के फ्यूजन सेंटर के प्रमुख बने थे। उनका काम ऐसी ऊर्जा पर था जो भविष्य में क्लीन और लगभग असीमित ऊर्जा दे सकती है।

नूनो लुरेरो

उनका शोध बहुत गर्म गैसों (प्लाज्मा) और फ्यूजन ऊर्जा पर आधारित था। हालाँकि, जाँचकर्ता डैनियल लिस्जट का कहना है कि इस तरह का काम गुप्त UFO तकनीक से भी जोड़ा जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि लुरेरो का काम न्यूट्रॉन स्टार जैसी अंतरिक्ष घटनाओं से जुड़ा था जिसे असीमित ऊर्जा का स्रोत माना जाता है।

67 साल के खगोल वैज्ञानिक कार्ल ग्रिलमायरकी 16 फरवरी 2026 को उनके घर पर हत्या कर दी गई। सुबह करीब 6 बजे उन्हें उनके घर के बाहर गोली मार दी गई। ग्रिलमायर ने एक दूर के ग्रह पर पानी की खोज में अहम योगदान दिया था। उनके साथियों ने कहा था कि इससे धरती से करीब 160 प्रकाश वर्ष दूर जीवन के संकेत मिल सकते हैं। इस मामले में पुलिस ने 29 साल के फ्रेडी स्नाइडर को संदिग्ध मानकर बाद में उस पर हत्या, कार चोरी और चोरी के आरोप लगाए। हालाँकि पुलिस ने अभी तक हत्या का कारण नहीं बताया है।

वहीं, 45 साल के जेसन थॉमस का शव 17 मार्च 2026 को मैसाचुसेट्स के वेकफील्ड में लेक क्वानापोविट से मिला। वह 12 दिसंबर 2025 से लापता थे। थॉमस नोवार्टिस कंपनी में केमिकल बायोलॉजी के असिस्टेंट डायरेक्टर थे और उनका काम नई दवाएँ बनाने, खासकर कैंसर के इलाज से जुड़ा था। नोवार्टिस के अमेरिकी रक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग के साथ भी काम करने की जानकारी है। इस मामले में पुलिस का कहना है कि मौत का कारण अभी नहीं पता है लेकिन फिलहाल किसी साजिश के सबूत नहीं मिले हैं।

परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़ी कैसियस लापता

अपनी इस रिपोर्ट के 4 दिन बाद 26 मार्च 2026 को डेली मेल ने एक और रिपोर्ट छापी जिसमें वैज्ञानिक मेलिसा कैसियस (Melissa Casias) के गायब होने का दावा किया गया। बताया गया कि 54 साल की कैसियस 26 जून 2025 से लापता हैं। कैसियस लॉस अलामोस नेशनल लैब (LANL) में एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट थीं। यह वही लैब है जिसकी स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मैनहट्टन परियोजना के तहत हुई थी और तब से यह अमेरिका के परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़ी रही है।

रिपोर्ट में कैसियस के परिवार के हवाले से बताया गया है कि उस दिन कैसियस ने घर से काम करने का फैसला किया था जो उनके स्वभाव के बिल्कुल विपरीत था। बाद में उन्हें उनके घर से कई किलोमीटर दूर अकेले चलते हुए देखा गया और हैरानी की बात यह थी कि उनके पास न फोन था, न पर्स और न ही चाबियाँ।

हालाँकि, कैसियस के परिवार का मानना था कि वह निजी और आर्थिक परेशानियों के चलते खुद कहीं चली गई होंगी। मामला इतना भी सीधा नहीं है। 24 साल तक एफबीआई में रह चुके क्रिस स्वेकर इस मामले को कहीं ज्यादा गंभीर मानते हैं। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक गुमशुदगी नहीं बल्कि एक बड़े पैटर्न का हिस्सा हो सकता है।

कैसियस के गायब होने वाले दिन की घटनाएँ भी बेहद अजीब थीं। उसी लैब में काम करने वाले उनके पति मार्क कैसियस ने बताया कि वह उन्हें सुबह ऑफिस छोड़ने गई थीं और उनके पास लैब में एंट्री के लिए सिक्योरिटी बैज भी था। वहीं, उनकी बेटी सिएरा के अनुसार, कैसियस बाद में उसके पास आईं, एक सैंडविच दिया और कहा कि वह घर लौट रही हैं क्योंकि वह बैज भूल गई हैं। शाम होते-होते मामला और रहस्यमयी हो गया।

लैब से सूचना मिली कि कैसियस ने न तो ऑफिस जॉइन किया और न ही घर से काम किया। घर लौटने पर परिवार को पता चला कि उनके दोनों फोन घर पर ही थे और उन्हें पूरी तरह से फैक्ट्री रीसेट किया गया था यानी सारा डेटा मिटा दिया गया था। CCTV फुटेज में उन्हें आखिरी बार न्यू मैक्सिको के स्टेट रोड 518 पर अकेले चलते हुए देखा गया। इसके बाद उनका कोई पता नहीं चला न कोई शव मिला, न ही कोई ठोस सबूत।

आखिरी बार न्यू मैक्सिको में दिखीं कैसियस (फोटो साभार:डेली मेल)

NASA के वैज्ञानिक की मौत और LANL का पूर्व कर्मी लापता

वैज्ञानिकों और महत्वपूर्ण पदों पर रहे लोगों के गायब होने या रहस्यमयी मौतों की रिपोर्ट्स की कड़ी में डेली मेल ने 1 अप्रैल 2026 को एक और रिपोर्ट जारी की जिसमें दो अन्य लोगों का जिक्र था। रिपोर्ट में बताया गया कि NASA के वैज्ञानिक फ्रैंक माइवॉल्ड की 4 जुलाई 2024 को लॉस एंजेलिस में 61 साल की उम्र में मौत हो गई थी लेकिन उनकी मौत का कारण आज तक सार्वजनिक नहीं किया गया। उनका पोस्टमार्टम नहीं किया गया था।

माइवॉल्ड 1999 से जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी में काम कर रहे थे और एडवांस सैटेलाइट तकनीक पर कई अहम प्रोजेक्ट्स से जुड़े थे जिनकी मदद से धरती और दूसरे ग्रहों की स्कैनिंग की जा सकती है। अपनी मौत से करीब 13 महीने पहले माइवॉल्ड एक ऐसे बड़े रिसर्च प्रोजेक्ट के प्रमुख थे जिससे भविष्य में अंतरिक्ष मिशनों को दूसरे ग्रहों पर जीवन के साफ संकेत खोजने में मदद मिल सकती है। उन्हें ‘प्रिंसिपल’ सम्मान मिला था लेकिन इसके बावजूद नासा ने उनकी मौत पर कभी खुलकर कोई जानकारी नहीं दी।

वैज्ञानिक फ्रैंक माइवॉल्ड

वहीं, दूसरा मामला लॉस एलामोस नेशनल लैब (NANL) से जुड़ा है। यह अमेरिका की प्रमुख परमाणु शोध संस्थाओं में से एक है। यहाँ के पूर्व कर्मचारी एंथनी चावेज (79 साल) 4 मई 2025 को अचानक लापता हो गए लगभग एक साल बाद भी उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है। पुलिस के अनुसार, उनकी तलाश अभी भी जारी है। चावेज को आखिरी बार अपने घर से पैदल निकलते हुए देखा गया था। उनका वाहन घर के बाहर ही खड़ा मिला और उनका पर्स, चाबियाँ और अन्य जरूरी सामान घर के अंदर ही मिले।

NASA के वैज्ञानिक माइकल डेविड हिक्स की रहस्यमयी मौत

डेली मेल ने 7 अप्रैल 2026 को एक अन्य रिपोर्ट में अमेरिका के स्पेस प्रोग्राम से जुड़े वैज्ञानिक माइकल डेविड हिक्स का नाम भी उस सूची में शामिल किया जिसके बाद ऐसे मामलों की संख्या बढ़कर 9 हो गई। माइकल डेविड हिक्स नासा की जेट प्रोपल्शन लैब (JPL) में काम करते थे। उनकी 30 जुलाई 2023 को 59 साल की उम्र में मौत हो गई लेकिन उनकी मौत की वजह आज तक नहीं बताई गई। यहाँ तक कि यह भी साफ नहीं है कि उनका पोस्टमॉर्टम हुआ था या नहीं।

हिक्स ने 1998 से 2022 तक JPL में काम किया और 80 से ज्यादा रिसर्च पेपर लिखे। उन्होंने धूमकेतु (comets) और एस्टेरॉयड (asteroids) को समझने में नासा की मदद की। खास तौर पर हिक्स DART प्रोजेक्ट से जुड़े थे जो नासा का एक टेस्ट था यह देखने के लिए कि क्या इंसान खतरनाक एस्टेरॉयड को पृथ्वी से दूर मोड़ सकते हैं। उन्होंने डीप स्पेस 1 मिशन पर भी काम किया जिसमें नई स्पेस टेक्नोलॉजी का परीक्षण किया गया था और जिसने 2001 में एक धूमकेतु के पास से उड़ान भरी थी।

अजीब बात यह है कि हिक्स के लिए लिखे गए कई ऑनलाइन श्रद्धांजलि संदेशों में उनकी मौत से पहले किसी बीमारी का जिक्र नहीं था। उनकी मौत अचानक हुई और यह लगभग एक साल बाद हुई जब उन्होंने नासा JPL छोड़ दिया था।

माइकल डेविड हिक्स

न्यूक्लियर रहस्यों से जुड़े स्टीवन भी लापता

डेली मेल ने रविवार (11 अप्रैल 2026) को अपनी रिपोर्ट में न्यूक्लियर रहस्यों से जुड़े एक और शख्स के गायब होने का दावा किया। रिपोर्ट में बताया गया कि 48 साल के स्टीवन गार्सिया 28 अगस्त 2025 को बिना किसी सुराग के गायब हो गए। उन्हें आखिरी बार न्यू मैक्सिको के अल्बुकर्क स्थित अपने घर से पैदल निकलते हुए देखा गया था और उनके पास सिर्फ एक हैंडगन थी। गार्सिया एक सरकारी ठेकेदार थे जो कंसास सिटी नेशनल सिक्योरिटी कैंपस (KCNSC) के लिए काम करते थे।

KCNSC ऐसी जगह है जहाँ सेना के परमाणु हथियारों में लगने वाले ज्यादातर (80% से ज्यादा) गैर-परमाणु हिस्से बनाए जाते हैं। बताया गया है कि गार्सिया वहाँ सामान और उपकरणों की देखभाल करने का काम करते थे। इस वजह से उनके पास ऊँची सुरक्षा अनुमति थी और उन्हें वहाँ की कई अहम और गोपनीय जानकारियों तक पहुँच थी। रिपोर्ट के मुताबिक, उनका काम बहुत जिम्मेदारी वाला था और वे वहाँ मौजूद सभी मशीनों और सामान की निगरानी करते थे जिनकी कीमत करोड़ों डॉलर तक हो सकती है। इस तरह स्टीवन ऐसे मामलों से जुड़े 10वें शख्स बन गए हैं।

स्टीवन गार्सिया हुए गायब

अल्बुकर्क पुलिस के अनुसार, गार्सिया को आखिरी बार सुबह करीब 9 बजे अपने घर (कैटटेल कोर्ट SW) से बाहर निकलते हुए देखा गया था। उन्होंने हरे रंग की कैमोफ्लाज टी-शर्ट और शॉर्ट्स पहने हुए थे। उन्हें एक हैंडगन लिए हुए भी देखा गया था। हालाँकि, रिपोर्ट में इस बात से इनकार किया गया कि गार्सिया आत्महत्या करने वाले थे या किसी मानसिक परेशानी से जूझ रहे थे। संदेह जताया गया है कि उन्हें विदेशी जासूसों द्वारा निशाना बनाया गया हो।

क्या है अमेरिका के खुफिया अधिकारियों को संदेह?

अमेरिका में वैज्ञानिकों के अचानक गायब होने और रहस्यमयी मौतों की घटनाओं के लगातार बढ़ने पर एक पूर्व खुफिया अधिकारी क्रिस स्वेकर ने बड़ा शक जताया है। 24 साल तक FBI में काम कर चुके स्वेकर का कहना है कि अन्य देश अमेरिका के उन लोगों को निशाना बना सकते हैं जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी अहम जानकारी होती है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी वैज्ञानिकों खासकर रॉकेट और मिसाइल तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों को लंबे समय से निशाना बनाया जाता रहा है।

स्वेकर ने चेतावनी दी कि अगर ये घटनाएँ आपस में जुड़ी हैं तो कई विदेशी ताकतें इसमें शामिल हो सकती हैं। ये लोग वैज्ञानिकों का अपहरण कर सकते हैं, उन्हें ब्लैकमेल कर सकते हैं, उनसे जानकारी निकलवा सकते हैं या यहाँ तक कि उन्हें मार भी सकते हैं। उन्होंने कहा कि चीन, रूस, पाकिस्तान, भारत, ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देश इस तरह की तकनीक हासिल करने की कोशिश करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि शीत युद्ध के समय से ही ऐसे प्रयास होते रहे हैं।

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शिव
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7 वर्षों से खबरों की तलाश में भटकता पत्रकार...

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