चंद्रनाथ रथ की हत्या कोई पहली घटना नहीं, TMC के दौर में बंगाल में राजनीतिक हिंसा का रहा बोलबाला: याद करें, जब अभिषेक बनर्जी को थप्पड़ मारने वाले आचार्य की हो गई थी रहस्यमयी मौत

बंगाल में BJP नेता शुभेंदु अधिकारी के PA चंद्रनाथ रथ की हत्या कर दी गई। उनकी हत्या ने एक बार फिर बंगाल में राजनीतिक हिंसा के लंबे और विवादित इतिहास को चर्चा में ला दिया है। जहाँ 2026 में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की हार के बाद बंगाल में आए दिन हिंसा की घटनाएँ सामने आ रही हैं, ऐसे में ममता बनर्जी की सरकार के दौरान हुई हिंसा की घटनाओं पर फिर सवाल उठने लगे हैं।

इन्हीं में से एक घटना 2021 की है, जब देवाशीष आचार्य की रहस्यमयी मौत हो गई थी। देवाशीष वही व्यक्ति थे, जिन्होंने 2015 में TMC सांसद और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को थप्पड़ मारा था। इसके तुरंत बाद TMC कार्यकर्ताओं ने उनकी जमकर पिटाई की। बाद में पुलिस ने उन्हें हत्या की कोशिश समेत कई गंभीर धाराओं में गिरफ्तार कर लिया था।

हालाँकि, बाद में अभिषेक बनर्जी ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि उन्होंने आचार्य को ‘माफ’ कर दिया है और उनके खिलाफ नरमी बरतने की अपील की थी। लेकिन उस समय TMC के कई नेताओं के बयान विवादों में आ गए थे। वरिष्ठ TMC नेता सुब्रता मुखर्जी ने भीड़ द्वारा की गई पिटाई को ‘प्रतिक्रिया’ बताते हुए उसका बचाव किया था। उन्होंने इसकी तुलना पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद हुई घटनाओं से भी की थी, जिस पर काफी विवाद भी हुआ था।

इसके करीब 6 साल बाद जून 2021 में देवाशीष आचार्य रहस्यमय परिस्थितियों में गंभीर रूप से घायल पाए गए। तब तक वह 2020 में शामिल हो चुके थे। उन्हें पूर्वी मिदनापुर में घायल हालत में पाया गया था। अस्पताल रिकॉर्ड के अनुसार, कुछ अज्ञात लोग उन्हें देर रात तमलुक जिला अस्पताल में छोड़कर चले गए थे। बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

पुलिस जाँच में सामने आया था कि गायब होने से पहले आचार्य एक चाय की दुकान पर थे और वहाँ उन्हें एक फोन कॉल आया था। कॉल आने के बाद वह वहाँ से निकल गए और फिर लापता हो गए। उनके परिवार ने इसे हत्या बताया था, जबकि BJP नेताओं ने मामले की स्वतंत्र जाँच की माँग की थी।

इस राजनीतिक हिंसा की घटना को एक बार फिर याद किया जा रहा है, जब हाल ही में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद चंद्रनाथ रथ की हत्या कर दी जाती है। BJP नेताओं का कहना है कि बंगाल में ये घटनाएँ लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक डराने-धमकाने और बदले की हिंसा वाले पैटर्न को दिखाती हैं।