समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने वामपंथियों के एक कार्यक्रम में ब्राह्मणों को वेश्याओं से भी बदतर बताया, खूब ठहाके लगे और वो खुद भी खिलखिलाकर हँसते दिखे। वीडियो वायरल हुआ तो चिंता वोट की हुई और फिर मासूम बनने का दिखावा करते हुए उन्होंने माफी माँग ली। अब उन्हें ब्राह्मणों की कितनी चिंता है, कितना सम्मान है, ये तो उस वीडियो और उसके रिएक्शन से साफ हो गया।
हाँ, इतना जरुर है कि सपा को और अखिलेश यादव को ब्राह्मण वोटों की तो चिंता है। फिर इसी चिंता में, या कहें तो डर में उन्हें माफी माँगने वाली वीडियो बनानी पड़ी। हालाँकि, यह माफी का वीडियो कितनी किस हद तक प्रोपेगेंडा है इसे आप हमारी इस रिपोर्ट में पढ़ सकते हैं। भाटी की इस वीडियो को अगर गहराई से समझें तो इसने सपा के उस एजेंडा को ध्वस्त कर दिया है जो पार्टी ब्राह्मण हितैषी बनने का ढोंग कर वर्षों से चला रही थी।
सपा और अखिलेश यादव लंबे समय से उत्तर प्रदेश में यह नैरेटिव गढ़ने का प्रयास कर रहे हैं कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली राज्य की सरकार ब्राह्मण विरोधी है और सपा ही ब्राह्मणों की हितैषी है। इसी नैरेटिव को आगे बढ़ाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में सपा ने कई बार परशुराम जयंती से लेकर भगवान परशुराम की प्रतिमा और प्रबुद्ध या ब्राह्मण सम्मेलनों जैसे कार्यक्रमों का सहारा लिया। पार्टी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह ब्राह्मण समाज की झंडाबरदार है। लेकिन राजकुमार भाटी के बयान ने इस पूरे दिखावे की परतें खोलकर रख दी हैं।
खुद सपा के ब्राह्मण नेता भी भाटी के इस बयान से नाराज हैं। सपा के एक और प्रवक्ता व पूर्व मंत्री पवन पांडे ने भाटी की इस टिप्पणी पर नाराजगी जताते हुए इसे ‘ दुर्भाग्यपूर्ण और अक्षम्य’ बताया है। पवन पांडे ने लिखा, “इस प्रकार की अमर्यादित बयानबाजी न केवल राजनीतिक मर्यादाओं का उल्लंघन है बल्कि समाज में वैमनस्य फैलाने का कार्य भी करती है।” उन्होंने लिखा, “मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूँ कि ब्राह्मण समाज ने सदैव राष्ट्र, संस्कृति और समाज को दिशा देने का कार्य किया है, ऐसे समाज के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किए जा सकते।”
श्री राजकुमार भाटी जी द्वारा ब्राह्मण समाज पर की गई टिप्पणी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, निंदनीय अक्षम्य है। ब्राह्मण समाज पर उनकी इस दुर्भाग्यपूर्ण टिप्पणी की मैं कड़ी निंदा करता हूँ। किसी भी जाति, धर्म, संप्रदाय या मजहब के विरुद्ध इस प्रकार की अमर्यादित बयानबाज़ी न केवल राजनीतिक…
— Pawan Pandey (@pawanpandeysp) May 12, 2026
सपा के एक विधायक अमिताभ बाजपेई ने भी भाटी को खरी-खोटी सुनाई है। विधायक ने कहा, “भाटी बड़बोलापन कर गए, ऐसे कई नेता आते और जाते हैं!” पवन पांडे या विधायक अमिताभ की नाराजगी कोई इकलौती नहीं है, भाटी की इस टिप्पणी के खिलाफ देशभर में ब्राह्मण समाज गुस्से में है और उनके खिलाफ FIR तक कराई गई हैं। कल तक जो अलंकार अग्निहोत्री सपा और अखिलेश यादव के ‘ब्लू आइड बॉय’ थे वो आज भाटी के खिलाफ धरने पर बैठे हैं। अलंकार अग्निहोत्री अपने समर्थकों के साथ लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे और खूब हंगामा किया।
सपा के ये ब्राह्मण विरोधी चरित्र भी कोई आज का या नया नहीं है। ब्राह्मण नेता और ऊँचाहार से विधायक मनोज पांडे को योगी कैबिनेट में जगह मिली है। वो भी अखिलेश यादव के करीबी थे, उनके एक बड़े ब्राह्मण नेता के तौर पर देखा जाता था लेकिन वो अखिलेश यादव से सनातन का विरोध करने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य पर भिड़ गए। अखिलेश ने अंत साथ दिया सनातन विरोधी स्वामी प्रसाद का और मनोज पांडे को सपा छोड़नी पड़ी। एक ब्राह्मण नेता को करीब 2 साल पहले अखिलेश का यही रुख था और पार्टी की यही पॉलिसी थी जो आज तक भी जारी है।
अखिलेश यादव के कथित ब्राह्मण प्रेम के इतिहास का एक खूनी सिरा कन्नौज के नीरज मिश्रा से भी जुड़ता है। नीरज ने कभी अखिलेश यादव से टक्कर ली और 24 घंटों के भीतर उनकी सिर कटी लाश मिली थी। नीरज के भाई मुनीष मिश्रा ने इसका आरोप अखिलेश यादव पर ही लगाया था। मुनीष ने बताया था कि उनके भाई का सिर काटकर ब्रीफकेस में रख के अखिलेश यादव के पास लखनऊ भेजा गया था।
अब जाहिर है कि राजकुमार भाटी के बयान ने एक बार फिर सपा का असली चेहरा तो दिखाया ही है और उसके साथ-साथ सपा में भी आपसी फूट शुरू हो गई है। सपा के पूर्व मंत्री-प्रवक्ता से लेकर विधायक तक उनके विरोध में आ गए हैं। अब हालत यह हो गई है कि सपा को सिर्फ जनता के गुस्से का ही नहीं बल्कि अपने ही नेताओं की नाराजगी का सामना भी करना पड़ रहा है।


