बीते दिनों 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे आए, जिसमें भाजपा को शानदार सफलता हासिल हुई। BJP/NDA ने 5 में से 3 राज्य पश्चिम बंगाल, असम, पांडिचेरी में अपनी सरकार बनाई। इसमें बंगाल में पार्टी का प्रदर्शन उल्लेखनीय है। बंगाल विधानसभा चुनाव में जीत भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती थी। ममता बनर्जी के वर्चस्व वाले राज्य में जीत हासिल करना, एक बड़ा मुकाम है। 2021 के चुनाव में भाजपा को पुरजोर आजमाइश के बाद भी हार मिली थी और बंगाल पिछले 15 वर्षों से ममता बनर्जी का अभेद्य किला बना हुआ था, इस परिस्थिति में जीत हासिल करना बिल्कुल भी आसान नहीं था।
भाजपा की इस प्रचंड जीत का अपना ही राजनीतिक महत्व है। बंगाल जीतना भाजपा के लिए सिर्फ एक राज्य का चुनाव जीतने मूल्य जैसा नहीं था बल्कि यह एक राजनीतिक जीत के साथ-साथ एक प्रतीकात्मक जीत भी है। पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें तो सीटों के लिहाज से भाजपा ने पूरी स्थिति को ही पलट दिया है, जितनी सीटें तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) को 2021 के विधानसभा चुनाव में प्राप्त हुई थी, कमोवेश उतनी ही सीटें भाजपा को 2026 के विधानसभा चुनाव में प्राप्त हुई है। बंगाल की यह जीत सिर्फ एक चुनावी राज्य की जीत मात्र नहीं है बल्कि यह उनके कार्यकर्ताओं के लिए एक बूस्टर डोज है।
गौरतलब है कि 2014 से लगातार 2 लोकसभा चुनाव में अकेले अपने दम पर केंद्र में अपनी सरकार स्थापित करने बनाने वाली भाजपा 2024 के लोकसभा चुनाव में 32 सीटों से अकेले दम पर बहुमत प्राप्त करने से चूक गई। हालाँकि, NDA के समर्थन से मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने में सफल हुए। इस प्रतीकात्मक हार से भाजपा कार्यकर्ताओं में भी आत्मविश्वास का अभाव उत्पन्न हुआ और विपक्षी दलों में भी यह भावना ओत-प्रोत हो रही थी कि अब मोदी को हराया जा सकता है केंद्र से उनकी सरकार को बेदखल किया जा सकता है। उसे अब यह उम्मीद है जागृत हो रही थी कि देर सबेर इंडी गठबंधन की सरकार केंद्र में बन सकती है।
परंतु, ममता दीदी द्वारा शासित बंगाल जैसे राज्य की कठिन परीक्षा को उत्तीर्ण करके भाजपा ने अपने कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा का संचार किया है और उनके दिमाग में आई नकारात्मकता को समाप्त किया है। भाजपा कोई भी असंभव राजनीतिक उद्देश्य पूरा कर सकती है इसका विश्वास बंगाल जीत कर उसने अपने कार्यकर्ताओं में पुनः भरा है और उसे प्रमाणित किया है। यह आत्मविश्वास उसके भविष्य की दिशा के लिए अत्यंत आवश्यक था।
अगले साल 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव है, जिसमें से उत्तर प्रदेश जीतना भाजपा के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता में है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि दिल्ली का रास्ता लखनऊ से होकर जाता है। अतः ये स्पष्ट है कि भाजपा 2029 का रास्ता यूपी विधानसभा जीत कर सुनिश्चित करना चाहेगी।
योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में माफियाराज का खात्मा उनकी श्रेष्ठ उपलब्धियों में से रहा है जिसके कारण से प्रदेश में कानूनी स्थिरता मजबूत हुई है, शासन प्रशासन में काफी हद तक सुधार हुआ है। बीते सालों में योगी आदित्यनाथ की छवि भी एक सख्त प्रशासक के तौर पर उभरी है, जो आम जनमानस के बीच में काफी लोकप्रिय है। इसके अतिरिक्त उन्हे एक निर्णायक नेतृत्वकर्ता, हिंदुत्व के प्रतीक और जनप्रिय नेता के तौर पर देखा जाता है। प्रदेश में योगी ब्रांड ना सिर्फ एक लोकप्रिय छवि है अपितु इससे उन्हें ना सिर्फ प्रदेश में बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त है। बंगाल की विजय उत्तर प्रदेश में भी बूस्टर का काम करेगी।
उत्तर प्रदेश के साथ साथ भाजपा के लिए पंजाब जैसे राज्य में अपनी पैठ बड़ी करना और उत्तरखंड में सरकार का दोहराव पार्टी के लिए बड़ा असाइनमेंट होगा। हालाँकि, पंजाब से राघव चड्डा समेत 7 राज्यसभा सासंद के आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़ने के बाद भाजपा अपने लिए राज्य विधानसभा चुनाव में अवसर तलाश रही है। उसे अभी भी राज्य में एक सुदृढ़ चेहरे की आवश्यकता है जो उसे नेतृत्व दे पाए और संगठनिक स्थिरता दे पाए। इन सभी राज्यों के चुनाव एक प्रकार से जनता का रुझान उसके बाद आने वाले लोकसभा चुनाव के लिए तय करेंगे। वर्तमान में भाजपा के लिए बंगाल जैसा कठिन राज्य जीतना उसके भविष्य की दिशा और संगठन में ऊर्जा संचार हेतु अति आवश्यक था।


