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चालीस बरस का पहरेदार: एक आदमी की जिद के आगे लाल तूफान बेअसर, वोज़िन्हा के चमत्कार से काबो वर्दे ने स्पेन को ड्रॉ पर रोका

विश्व कप के अपने पहले मैच में काबो वर्दे ने फुटबॉल जगत को चौंका दिया। 40 वर्षीय गोलकीपर वोज़िन्हा दीवार बनकर खड़े रहे और स्पेन की स्टार-स्टडेड टीम 0-0 की बराबरी से आगे नहीं बढ़ सकी।

एक चालीस वर्षीय खिलाड़ी सोमवार (15 जून 2026) की रात अपने वतन का नायक बन गया। गुजरी रात वैश्विक फुटबॉल की सबसे बड़ी टीमों में गिने जाने वाली स्पेन को विश्व कप में अपने अभियान की शुरुआत करनी थी। मुकाबला था विश्व कप में पहली दफा उतरने जा रही काबो वर्दे से। काबो वर्दे, जो कि फीफा की वैश्विक रैंकिंग में 67वें स्थान पर है।

कुराकाओ को जिस अंदाज में जर्मनी ने रौंदा था, उससे सभी को यही उम्मीद थी कि कुछ ही ऐसा अटलांटा में होने जा रहे स्पेन बनाम काबो-वर्दे के ग्रुप एच के मुकाबले में भी दर्शकों को देखने को मिलेगा। परन्तु सोमवार रात जिस जुझारू अंदाज में स्पेन के विरुद्ध नब्बे मिनटों तक काबो-वर्दे के खिलाड़ियों ने खेला, यह निश्चित रूप से ही फीफा विश्व कप के इतिहास में इक लोककथा सा अंकित हो गया।

बीती रात अटलांटा के मर्सिडीज-बेंज स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में अपनी पारंपरिक लाल जर्सी पहने ‘ला रोज़ा’ की टीम एक ही मकसद के संग मैदान में उतरी; कैसे भी यह मुकाबला जीतकर एक जीत से टूर्नामेंट में शुरुआत करनी चाहिए। मगर अपनी सफेद जर्सियाँ पहने मैदान पर मौजूद काबो-वर्दे के खिलाड़ियों ने कल एक इतनी बड़ी टीम के खिलाफ न सिर्फ शानदार प्रदर्शन किया बल्कि आने वाले मैचों के लिए स्पेन के तमाम विरोधियों को उनकी कमियाँ भी बता दी।

कोच लुई डे ला फुएन्ते ने 4-1-2-3 की फॉर्मेशन में अपनी टीम को मैदान पर उतारा। मिडफील्ड में रोड्री के संग पेड्री और फैबियान रुईज़ मौजूद थे। मगर कोच ने शायद अपनी अटैकिंग लाइन में खिलाड़ियों का ग़लत चुनाव किया। सेंट्रल फॉरवर्ड ओयारजाबाल का साथ देने के लिए विंगर्स के रूप में फेराँ तोरे और गावी को मैदान पर उतारा गया, जबकि नीको, यमाल, विक्टर मुनोज़ जैसे खिलाड़ी बेंच पर मौजूद थे। शायद कोच ने एहतीयातन भी ऐसा कदम उठाया क्योंकि यमाल भीषण रूप से चोटिल होने के चलते कुछ माह से खेल से दूर थे। क्योंकि वह वापसी कर रहे हैं, सीधे उनको मैदान पर उतारना एक बड़ी ग़लती हो सकती थी।

खैर, दोनों राष्ट्रों के राष्ट्रीय-गान के पश्चात रेफरी ने व्हिस्ल बजाई। मैच शुरू हुआ। मैच के शुरुआती क्षणों से ही नन्हें अफ्रीकी देश काबो-वर्दे के खिलाड़ी एक सुगठित यूनिट के तौर पर डिफेंड कर रहे थे। उनका मकसद बस कैसे भी स्पेन को गोल स्कोर करने से रोकना था। और, वो इसमें सफल भी रहे। काबो-वर्दे ने क्या कमाल का डिफेंसिव फुटबॉल खेला। आपको जानकर अचरज होगा कि स्पेन ने पूरे मैच में गोल पर कुल तेईस हमले किए जिसमें से मात्र आठ निशाने पर रहे। उन आठ के आठ हमलों को गोलकीपर वोज़िन्हा ने गोल में बदलने से रोक दिया। चालीस वर्षीय वोज़िन्हा स्पेन और जीत के मध्य के दीवार की भांति खड़े हो गए थे।

स्पेनिश जहाज़ी बेड़ा लगातार आक्रमण करता रहा मगर अंत में स्कोर 0-0 ही रहा। वह वोज़िन्हा के गोलपोस्ट को भेदने में नाकाम रहे। हालाँकि इसमें बड़ी भूमिका ओयारजाबाल, फेराँ तोरे और फाबिएन रुईज की खराब फिनिशिंग की भी रही, जिन्होंने गोल करने के कई आसान मौके गँवाए। यही एक औसत और बेहतरीन खिलाड़ी के मध्य अंतर पैदा करता है। एक बड़ा खिलाड़ी कठिन से कठिन मौकों को भी भुनाने में माहिर होते हैं। याद कीजिए पिछले संस्करण के फाइनल में कीलिएन एमबाप्पे का प्रदर्शन। स्पेनिश टीम आज वोज़िन्हा के शानदार प्रदर्शन के साथ साथ अपनी खराब फिनिशिंग के चलते मैच जीतने से वंचित रह गई।

वोज़िन्हा, जिन्होंने कल रात चालीस की उम्र में विश्व कप में पर्दापण किया, अपने खेल के बूते संपूर्ण फुटबॉल जगत की आँखों के तारे बन गए। मैच पश्चात उन्होंने कहा,”मैं मैच के बाद इसलिए रो पड़ा क्योंकि मैंने ज्यादातर जीवन अपने दादा-दादी के संग बिताया और आज वो ही यहाँ नहीं हैं। कुछ वर्ष पहले मैंने उन्हें खो दिया। मेरी माँ वीजा की अड़चनों और उसमें लगने वाले पैसों के चलते मुझे खेलता देखने नहीं आ सकी। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं जीवन में कुछ ऐसा भी कर सकूँगा।”

वहीं ओमार मारमूश व मोहम्मद सालाह की इजिप्ट ने ग्रुप ज़ी के मैच में केविन डि ब्रुएना की बेल्जियम को 1-1 से रोक कर अंक बाँटने के लिए मजबूर कर दिया। यह एक बराबरी का मुकाबला रहा।

इसके बाद लॉस एंजिलिस में खेले गए ग्रुप ज़ी के अगले मैच में ईरान और न्यूज़ीलैंड ने 2-2 का ड्रॉ खेलकर अंक बाँटे। देखने वाली बात यह रही कि ईरान की टीम ने, जिसके खिलाड़ियों ने अमेरिकी हमलों के चलते गुजरे फरवरी से कोई क्लब फुटबॉल नहीं खेली थी, दो दफा मैच में पिछड़ कर भी वापसी की। शुरुआत में जरूर स्टेडियम के भीतर और बाहर सरकार विरोधी नारे लगे परन्तु ईरानी समर्थकों ने मैच शुरू होते ही खेल और राजनीति को अलग रखा। जब जब ईरान के खिलाड़ियों ने गोल स्कोर किए, स्टेडियम ‘ईरान-ईरान’ के नारों से गुंजायमान हो उठा।

गौरतलब है कि अमेरिकी नागरिकों ने भी मैच की पूर्व संध्या पर खुलकर ईरानी समर्थकों का स्वागत करा था व कहा था कि उन्हें हम अपने देश में कोई समस्या नहीं होने देंगे। खेल इस सब से बहुत बड़ा है। इस मैच के ड्रॉ रहने के चलते अब ग्रुप ज़ी में हर टीम ने एक-एक अंक जुटा लिया है।

वहीं पिछली दफा अर्जेंटीना को टूर्नामेंट में अपने शुरुआती मैच में 2-1 से हरा कर सनसनी फैलाने वाली सऊदी अरब की टीम ने फिर इस दफा एक उलटफेर कर दिया है। सऊदी अरब ने मियामी में खेले गए ग्रुप एच के मुकाबले में मार्सेलो बिएल्सा की उरुग्वे को 1-1 की बराबरी पर रोक अपने ग्रुप में एक जरूरी अंक जुटा लिया।

अब आगे मंगलवार (16 जून 2026) के दिन कुल पाँच मैच खेले जाने हैं। भारतीय समयानुसार आज रात साढ़े बारह बजे सितारों से सजी फ्रांस की टीम सेनेगल के विरुद्ध मैदान में उतरेगी। ज्ञात रहे कि दोनों ही राष्ट्रों के मध्य मैदान में एक इतिहास जुड़ा हुआ है। सन् 1998 की विश्व कप विजेता फ्रांस को सन् 2002 में सेनेगल ने ग्रुप स्टेज में हरा कर घर का टिकट कटाने पर मजबूर कर दिया था। हालाँकि इस मुकाबले में भी सेनेगल को कमजोर नहीं आँका जा सकता परन्तु फ्रेंच लड़ाके जरूर हिसाब चुकता करने की भावना से प्रेरित होकर मैदान में उतरेंगे।

इराक अपने से मजबूत नॉर्वे के विरुद्ध मैदान में उतरेगी तो वहीं ऑस्ट्रिया का सामना होगा जॉर्डन से।

फिर होंगे दो बहुप्रतीक्षित मुकाबले। अपना अंतिम विश्व कप खेलने जा रहे हमारी पीढ़ी के दो सितारे क्रिश्चियानो रोनाल्डो और लिओनेल मेस्सी आज टूर्नामेंट में अपना पहला मैच खेलेंगे। रोनाल्डो की पुर्तगाल एक फेवरेट के तौर पर कॉन्गो के विरुद्ध मैदान में उतरेगी। वहीं कोच स्कालोनी की अर्जेंटीनी टीम कन्सास सिटी स्टेडियम में अल्जीरिया का सामना करेगी।

राजा मेहदी अली खान ने 1964 में आई फिल्म ‘वो कौन थी’ के लिए एक गीत लिखा था, जिसे संगीत दिया था मदन-मोहन ने। भारत रत्न लता मंगेशकर जी की जादुई आवाज की चाशनी में डूबे, दिल को चीर कर रख देने वाले, उस गीत में चंद पंक्तियां इस प्रकार हैं, ‘लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो, शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो। हमको मिली हैं आज ये घड़ियाँ नसीब से, जी भर के देख लीजिये हमको क़रीब से। फिर आपके नसीब में ये बात हो न हो, फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो।’

मेस्सी और रोनाल्डो वह खिलाड़ी हैं जिन्हें देखते हुए ब्राजील की तंग सड़कों से लेकर देहरादून के नेहरू ग्राम तक नन्हें बच्चों ने खेल को अपनाने का ख्वाब देखा। क्या यूरोप, क्या दक्षिण अमेरिका, क्या एशियाई महाद्वीप; बेहद छोटे कस्बों से निकले इन दोनों ही खिलाड़ियों ने पिछले दो दशकों में संपूर्ण विश्व पर राज़ किया और अपने खेल से करोड़ों लोगों के दिल जीते।

एक खूबसूरत परीकथा समाप्त होने जा रही है। एक हसीं ख्वाब टूटने जा रहा है। इस विश्व कप के बाद मेस्सी-रोनाल्डो की प्रतिद्वंद्विता सदैव के लिए थम जाएगी। उससे पहले हमें जरूर इन दोनों ही जादूगरों को एक अंतिम दफा खेलते हुए देख लेना चाहिए। कौन जाने, इस जन्म में फिर मुलाकात हो न हो।

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गौरव बडोला
गौरव बडोला
दिन में दिहाड़ी करता हूं, रात को कोरे कागज़ पर अपने ख्वाबों की दुनिया बुनता हूं। फुटबॉल और साहित्य को जीता हूं।

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