25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने देश पर आपातकाल (Emergency) थोपा था। प्रेस की आजादी पर ताले जड़ दिए गए थे, अखबारों की सुर्खियाँ सत्ता की मंजूरी से तय होती थीं और सरकार से सवाल पूछना अपराध माना जाने लगा था।
आज इमरजेंसी के 51 साल बाद हिमाचल प्रदेश में उठ रहे घटनाक्रम एक बार फिर उसी काले दौर की याद दिला रहे हैं। राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार की नीतियों, बढ़ते कर्ज, घोटालों और प्रशासनिक फैसलों पर सवाल उठाने वाले डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म News4Himalayan की 20 से अधिक वीडियो पूरे भारत में ब्लॉक करा दी गईं, इसके बाद उसका फेसबुक पेज और इंस्टाग्राम अकाउंट भी प्रतिबंधित कर दिया गया।
ऐसा भी नहीं है कि चैनल ने कोई छिपी हुई बात बता दी थी, जिन मुद्दों को लेकर आवाज दबाने की कोशिश की गई उनमें से कई मुद्दे तो ऐसे हैं जिन्हें कॉन्ग्रेस पार्टी के अपने नेता पार्टी के भीतर और सार्वजनिक रूप से उठा चुके हैं।
ऐसे में यही सवाल उठता है कि क्या सरकार आरोपों का जवाब देने के बजाय सच दिखाने वालों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है? प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की दुहाई देने वाली कॉन्ग्रेस पर अब आरोप लग रहे हैं कि सत्ता में आते ही वह वही रास्ता अपना रही है, जिसने 1975 के आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सबसे काले अध्यायों में शामिल कर दिया था।
News4Himalayan के शांतनु शुक्ल ने ऑपइंडिया से बातचीत में कहा है कि यह केवल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की कार्रवाई नहीं बल्कि सरकार की आलोचना को रोकने और असहज सवालों को दबाने का सुनियोजित प्रयास है। उन्होंने कहा कि इस रोक को हटवाने के लिए वे हाई कोर्ट का रुख करेंगे।
24 घंटे में 20 से ज्यादा वीडियो हुए ब्लॉक
News4Himalayan के अनुसार, 17 जून 2026 को उसके फेसबुक पेज पर प्रकाशित 20 से अधिक वीडियो भारत में दर्शकों के लिए उपलब्ध नहीं रहे। इन वीडियो में सरकार की नीतियों, प्रशासनिक फैसलों, वित्तीय मामलों, जनहित के मुद्दों और भ्रष्टाचार से जुड़े विषय शामिल थे।

प्लेटफॉर्म का कहना है कि प्रभावित वीडियो में शराब फैक्ट्री से जुड़े घोटाले, हिमाचल पर बढ़ते कर्ज, सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार के बजट, स्मार्ट मीटर विवाद, हाई कोर्ट के फैसलों और कॉन्ग्रेस नेताओं से जुड़े खुलासों पर आधारित रिपोर्टें शामिल थीं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगातार कार्रवाई
News4Himalayan का दावा है कि 17 जून 2026 को उसकी 20 से अधिक वीडियो भारत में ब्लॉक किए जाने के बाद कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ता गया। 18 जून को उसका फेसबुक पेज भी भारत में काफी हद तक प्रतिबंधित या अनुपलब्ध हो गया, जिसके कारण भारतीय उपयोगकर्ता पेज और उस पर मौजूद सामग्री तक स्वतंत्र रूप से नहीं पहुँच पा रहे थे।
इसके कुछ ही दिनों बाद, 21 जून को प्लेटफॉर्म का आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट भी प्रतिबंधित कर दिया गया और उसकी पहुँच सीमित कर दी गई। संस्था का कहना है कि फेसबुक और इंस्टाग्राम पर हुई इन कार्रवाइयों से जुड़े स्क्रीनशॉट, प्लेटफॉर्म नोटिस और अन्य रिकॉर्ड उसके पास सुरक्षित मौजूद हैं।
News4Himalayan का आरोप है कि वीडियो ब्लॉक होने से शुरू हुई कार्रवाई बाद में उसके प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स तक पहुँच गई, जिससे उसकी खबरों और जनहित से जुड़े मुद्दों को लोगों तक पहुँचाने की क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हुई।
कार्रवाई पर उठे सवाल
News4Himalayan का आरोप है कि उसकी वीडियो और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर हुई कार्रवाई को लेकर उसे आज तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। संस्था का कहना है कि न तो उसे यह बताया गया कि किस कानून के तहत यह कार्रवाई की गई, न यह स्पष्ट किया गया कि किस कंटेंट को आपत्तिजनक माना गया और न ही यह जानकारी दी गई कि रोक लगाने के पीछे किस प्राधिकरण की भूमिका थी।
प्लेटफॉर्म का दावा है कि कार्रवाई से पहले उसे अपना पक्ष रखने या जवाब देने का कोई प्रभावी अवसर भी नहीं दिया गया।
वहीं, News4Himalayan खुद को जनहित के मुद्दों को उठाने वाला स्वतंत्र मीडिया मंच बताता है। उसका कहना है कि वह वर्षों से हिमाचल प्रदेश में बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं, आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्याओं, बढ़ते सरकारी कर्ज, बजट के विश्लेषण, नीतिगत फैसलों और अन्य जनसरोकार के विषयों पर रिपोर्टिंग करता रहा है।
संस्था का दावा है कि उसकी पत्रकारिता किसी एक राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष तक सीमित नहीं रही बल्कि उसने समय-समय पर कॉन्ग्रेस सरकार के साथ-साथ भाजपा नेताओं और विपक्षी दलों से भी सवाल पूछे हैं।
ऐसे में प्लेटफॉर्म का आरोप है कि सरकार से जुड़े मुद्दों पर की गई आलोचनात्मक रिपोर्टिंग के बाद उसके खिलाफ हुई यह कार्रवाई कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
News4Himalayan ने कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी को भी निशाने पर लेते हुए सवाल उठाया है कि जो नेता देश और विदेश में प्रेस की स्वतंत्रता की बात करते हैं, क्या वे हिमाचल में मीडिया प्लेटफॉर्म पर हुई इस कार्रवाई पर भी प्रतिक्रिया देंगे। प्लेटफॉर्म ने पूछा कि क्या प्रेस की आजादी का सिद्धांत केवल विपक्ष में रहते हुए ही याद आता है।
पहले भी दर्ज हुईं FIR और शिकायतें
संस्था का दावा है कि यह उसके खिलाफ पहली कार्रवाई नहीं है। उसके अनुसार पहले भी अलग-अलग पुलिस थानों में उसके खिलाफ FIR और शिकायतें दर्ज कराई गईं। इतना ही नहीं, हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष की ओर से उसे विशेषाधिकार हनन (Privilege Motion) का नोटिस भी भेजा गया था।
News4Himalayan का आरोप है कि सरकार और उससे जुड़े लोग आलोचनात्मक पत्रकारिता से असहज हैं और इसी कारण लगातार दबाव बनाया जा रहा है।
प्रेस की आजादी को लेकर सवाल उठाने वाली कॉन्ग्रेस पर खुद गंभीर आरोप
हिमाचल प्रदेश में सामने आए इस पूरे विवाद ने कॉन्ग्रेस को कठघरे में खड़ा कर दिया है। देशभर में प्रेस की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतांत्रिक मूल्यों की बात करने वाली पार्टी पर अब उसी मीडिया की आवाज दबाने के आरोप लग रहे हैं, जो सरकार से सवाल पूछ रहा था।
News4Himalayan का दावा है कि उसकी जिन रिपोर्टों और वीडियो पर कार्रवाई हुई, उनमें सरकार के कर्ज, नीतिगत फैसलों, घोटालों और प्रशासनिक कामकाज से जुड़े ऐसे मुद्दे उठाए गए थे जिन पर सार्वजनिक बहस होना लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है।
यह करवाई वहीं कॉन्ग्रेस कर रही है, जिसने सत्ता में आने के बाद से ही प्रेस को अपने नियंत्रण में रखने की कोशिश की है। अपनी खामियों को छुपाने के लिए यह पार्टी या तो मीडिया को ‘गोदी मीडिया’ कहकर संबोधित करने लगती है या उसकी आम जनता तक पहुँची ही बंद कर देती है और उसके बाद प्रेस की आजादी को लेकर बड़े-बड़े भाषण देती है।


