अमेरिका में इस साल नवंबर में होने वाले जनरल इलेक्शन में अपना उम्मीदवार खड़ा करने के लिए हर पार्टी अपने आंतरिक चुनाव कराती है, जिसे देश में प्राइमरी चुनाव (Primary Election) कहा जाता है। डेमोक्रेटिक पार्टी (DSA) के भीतर भी प्राइमरी चुनाव हुआ और 23 जून 2026 को नतीजे सामने आए। इन नतीजों में चर्चा न्यूयॉर्क से चुने मुस्लिम प्रतिनिधि अबर कवास (Aber Kawas) और दारियालिजा एविला शेवेलियर (Darializa Avila Chevalier) की हो रही है। इन ‘हिजाबन’ को न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी का समर्थन मिला है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी जोहरान ममदानी के समर्थन से जीते नेताओं पर प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने इस पर मीडिया को घेरते हुए कहा, “मेयर ममदानी ने 3 पक्के वामपंथियों को चुनाव जितवा दिया और इसके लिए बिकाऊ मीडिया (Fake News Media) उनकी जमकर तारीफ कर रहा है। मेयर साहब को बधाई! कल रात मैंने 16-0 का रिकॉर्ड बनाया (यानी जिन 16 लोगों का मैंने समर्थन किया, वे सब जीत गए) और शानदार अमेरिकी देशभक्तों को चुनाव जिताने में मदद की, लेकिन मीडिया ने इस पर एक शब्द भी नहीं बोला।”
Mayor Mamdani pulled through 3 solid Communists, and has received loud and universal applause from the Fake News Media. Congratulations Mr. Mayor! I went 16-0 last night, helping to elect wonderful American Patriots, and the Media doesn’t say a word. Over the last two years, my… pic.twitter.com/0DNiHyt1JA
— Commentary Donald J. Trump Truth Social Posts On X (@TrumpTruthOnX) June 24, 2026
उन्होंने अपनी तारीफ में आगे लिखा, “पिछले दो सालों में, मेरे समर्थन से लोगों को प्राइमरी चुनाव में 259 जीत मिली हैं, और लगभग कोई हार नहीं हुई, फिर भी मीडिया इस पर बिल्कुल ध्यान नहीं देता!!! बिकाऊ मीडिया।”
डोनाल्ड ट्रंप जो कह रहे हैं, वह सच है। चर्चा तो हो रही है जोहरान ममदानी का समर्थन मिलने वाले जीते हुए नेताओं की। खासकर अबर कवास और दारियालिजा एविला शेवेलियर की। जहाँ पश्चिमी मीडिया इन नेताओं की जीत पर बड़े-बड़े लेख लिख रही है, वहीं सोशल मीडिया पर इनके पुराने बयान और इनकी पहचान काफी चर्चा में चल रहे हैं। सोशल मीडिया पर अमेरिकी इन दोनों मुस्लिम नेताओं के मुस्लिम-प्रोपेगेंडा, हमास का समर्थन और अमेरिकियों के लिए घृणा वाली सोच को सामने ला रहे हैं।
कौन हैं अबर कवास?
अबर कवास खुद को फिलिस्तीन का निवासी बताती हैं। उनका दावा है कि उनके अम्मी-अब्बा फिलिस्तीन से माइग्रेट होकर अमेरिका आए थे। कवास के अनुसार, उनका जन्म भी न्यूयॉर्क के ब्रूकलिन में ही हुआ है। कवास ने सिटी कॉलेज ऑफ न्यूयॉर्क से ‘इंटरनेशनल स्टडीज’ की पढ़ाई की है। इससे अलग कवास ने अपनी पहचान अमेरिका में सख्त प्रवासन नीतियों और देश में मुस्लिम-विरोधी रवैये के पीड़ित के रूप में बनाई है।
वो दावा करती है कि जब वह किशोरावस्था में थीं, तब उनके पिता को अमेरिका की इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) ने हिरासत में ले लिया और देश से डिपोर्ट कर दिया था। अपनी चुनावी अभियान की वेबसाइट में भी उन्होंने यह जानकारी लिखी है।
इसी पहचान के साथ कवास न्यूयॉर्क के डिस्ट्रिक्ट 12 क्विन्य सीट से डेमोक्रेटिक पार्टी के प्राइमरी चुनाव में 58.3 प्रतिशत वोट हासिल कर जीत दर्ज की। कवास ने असेंबली मेंबर स्टीवन रागा को 20 प्रतिशत वोटों के बड़े अंतर से हराया। इस जीत के साथ अब वे नवंबर में होने वाले आम चुनाव में उम्मीदवार बन सकती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि इस जीत के साथ अबर कवास ने इतिहास रचा है क्योंकि वे न्यूयॉर्क सीनेट के लिए चुनी जाने वाली पहली फिलिस्तीनी मुस्लिम महिला बन गई हैं।
फिलिस्तीन और मुस्लिम-पीड़ित का रोना रोने वाली अबर कवास का बैकग्राउंड निकला ‘आपराधिक’
कवास ने बेशक फिलिस्तीन और अमेरिका में मुस्लिम पीड़ित की रोना रोकर चुनाव लड़ा हो, लेकिन असलियत कुछ और है। मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर चल रही खबरों में सामने आया कि उनके द्वारा गढ़ी गई इमिग्रेशन के कारण परिवार को डिपोर्ट करने वाली कहानी झूठी है। कवास के परिवार को इसीलिए डिपोर्ट किया गया क्योंकि उनके अब्बा ‘अब्दुलकरीम कवास’ एक दोषी अपराधी थे।
अमेरिकी की एक कोर्ट में इसके सबूत भी हैं, जिसे न्यूयॉर्क पोस्ट ने कवर भी किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अबर कवास के अब्बा अब्दुलकरीम कवास जॉर्डन के नागरिक थे, जो 1989 में टूरिस्ट वीजा पर अमेरिका आए थे और कभी वापस नहीं गए। यहाँ अब्दुलकरीम का जघन्य अपराधों में नाम सामने आया। 1995 में उन्हें वर्जीनिया की रिचमंड सिटी सर्किट कोर्ट में झूठी गवाही का दोषी पाया गया और इसके 10 साल बाद न्यू जर्सी में प्रॉपर्टी चोरी के आरोप में दोषी पाने के बाद अगस्त 2006 में तीन साल की जेल तक हुई थी।
इसी बीच उनका इमिग्रेशन का मामला भी अदालतों में चलता रहा। एक फेडरल इमिग्रेशन जज ने शुरू में उन्हें 2004 की सुनवाई में उपस्थित न होने पर देश से निकालने का आदेश दिया था। इसके बाद देश में जॉर्ज बुश (George W. Bush) की सरकार के दौरान उन्हें जॉर्डन डिपोर्ट कर दिया गया था। लेकिन अबर कवास अपने चुनावी अभियान के दौरान लगातार ट्रंप प्रशासन की सख्त इमेग्रेशन नीतियों पर इसका ठीकरा फोड़ती रही हैं।
9/11 आतंकी हमलों पर अबर कवास का अमेरिकी-विरोधी बयान
यही नहीं, अबर कवास की सोच भी अमेरिकी-विरोधी है। यह तब और ज्यादा मुखर होकर सामने आया जब अबर कवास ने अमेरिकी के काले पन्नों में दर्ज 9/11 आतंकी हमले पर अपना पक्ष रखा। कवास ने इस आतंकी हमले का जिम्मेदार अमेरिकियों को ही ठहरा दिया और अलकायदा का बचाव किया। कवास के बयान की वीडियो क्लिप भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।
🚨Daughter of illegals Aber Kawas blames 9/11 on America’s capitalism, racism & Islamophobia. Endorsed by Zohran Mamdani for NY Assembly.
— Brigitte Gabriel (@ACTBrigitte) June 24, 2026
This is exactly why we must END birthright citizenship NOW. America is not Islam's conquest pic.twitter.com/QhvmnoqTgK
इस क्लिप में अबर कवास कहती हैं, “पूँजीवाद, नस्लवाद, गोरों को दूसरों से श्रेष्ठ समझना और इस्लामोफोबिया- इन सब चीजों का इस्तेमाल हमेशा से दूसरों की जमीनों पर कब्जा करने और उनके संसाधनों को छीनने के लिए किया गया है। यह बहुत लंबे समय से चला आ रहा है और 9/11 का हमला भी इसी पुरानी सोच और सिलसिले का ही एक हिस्सा था।
कवास आगे कहती हैं, “यह सोचना कि हमें (मुस्लिमों को) एक ऐसे आतंकवादी हमले के लिए माफी माँगनी चाहिए जो सिर्फ चंद लोगों ने किया था जबकि इतिहास में हुए बड़े-बड़े नरसंहारों और गुलामी की प्रथा के लिए कभी किसी ने माफी नहीं माँगी और न ही कोई मुआवजा दिया, यह बात मुझे बहुत गलत और घिनौनी लगती है।”
गौरतलब है कि जिस 9/11 आतंकी हमले की अबर कवास यहाँ बात कर रही हैं, वह आतंकी संगठन अलकायदा ने अंजाम दिया था। इस हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन था। उसके नेतृत्व में 11 सितंबर 2001 को अलकायदा के 19 आतंकियों ने अमेरिका के 4 विमानों को हाइजैक किया और उन्हें आत्मघाती बम की तरह इस्तेमाल किया था। इस पूरे हमले में 2,977 मासूम लोगों ने जानें गवाई थीं, जिनमें 90 प्रतिशत अमेरिकन थे।
कौन हैं डारियालिजा अवीला शेवेलियर?
डारियालिजा अवीला शेवेलियर ने भी अपनी पहचान प्रवासी नागरिक के तौर पर मजबूत की है। उनकी चुनावी अभियान की वेबसाइट के अनुसार, वह खुद को अप्रवासन की सख्त नीतियों का पीड़ित होने का दावा करती हैं। उनका डोमिनिकन परिवार है जो फ्लोरिडा से अमेरिका माइग्रेट हुआ था। शेवेलियर बताती हैं कि वह गरीब परिवार से ताल्लुक रखती हैं जहाँ उनके अब्बा ट्रक ड्राइवर और अम्मी एक केस वर्कर हैं, जिसने अपने बचपन का ज्यादा समय वेनेजुएला में अपनी दादा के साथ बिताया है।
कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मिडिल ईस्टर्न, साउथ एशियन और अफ्रीकन स्टडीज में ग्रेजुएशन पूरी की है और फिलहाल सिटी यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क (CUNY Graduate Center) से सोशियोलॉजी में पीएचडी की डिग्री पूरी कर रही हैं। कॉलेज के समय से ही शेवेलियर कट्टर वामपंथी आंदोलनों का हिस्सा रही हैं, इस दौरान वह हिजाब भी पहना करती थीं लेकिन प्राइमरी चुनाव में अभियान के दौरान उनका हिजाब गायब दिखा।
शेवेलियर ने फिलिस्तीन समर्थित, ब्लैक लाइव्स मैटर और खासकर अप्रवासन नीतियों के खिलाफ अभियानों का हिस्सा रहकर अपनी पहचान बनाई। इसी पहचान के साथ शेवेलियर ने प्राइमरी चुनाव में 13वें डिस्ट्रिक्ट सीट से जीत हासिल की है। उन्होंने 5 बार के मौजूदा और बेहद शक्तिशाली सांसद एड्रियानो एस्पेलियाट (Adriano Espaillat) को 2,326 वोटो के अंतर से चुनाव में मात दी है।
शेवेलियर के अमेरिकी-विरोधी और प्रो-हमास होने पर सोशल मीडिया पर आलोचना
शेवेलियर को चुनाव में जोहरान ममदानी का समर्थन मिला। इसके बावजूद भी सोशल मीडिया पर अमेरिकन शेवेलियर के खिलाफ बोल रहे हैं, लोग उनके इस्लामी हित और अमेरिकी-विरोधी बयानों और विवादित बैकग्राउंड पर बात कर रहे हैं। यह भी सामने आया है कि शेवेलियर ने अपना इस्लाम में धर्म परिवर्तन कर लिया है। इसके अलावा लोग उनके डोमिनिकन मूल से होने पर भी सवाल उठा रहे हैं, लोगों का कहना हैं कि वह हैतीयन (Haitian) मूल की हैं।
Please meet Darializa Avila Chevalier, the Mamdani-endorsed DSA candidate for Congress:
— Dr. Maalouf (@realMaalouf) June 23, 2026
A self-proclaimed communist born in Florida to Dominican (or Haitian, it’s not clear) immigrant parents, she converted to Islam claiming that Palestine is the most important issue in her… pic.twitter.com/MpDWXiejgZ
शेवेलियर की सोशल मीडिया हिस्ट्री खंगालकर अमेरिकी बता रहे हैं कि वह अमेरिकन झंडे का इस्तेमाल नैपकिन की तरह करती हैं। इसके अलावा 07 अक्टूबर 2025 को ठीक एक दिन बाद, उन्होंने इजरायली नागरिकों की हत्या का जश्न मनाने वाली एक रैली में भी हिस्सा लिया था। उनके अमेरिकी-विरोधी होने का भी राज खोलते हुए कहा कि वह गोरी महिलाओं को ‘बदसूरत उपनिवेशवादी’ बताती हैं।

इतना ही नहीं अमेरिकन ने बताया कि शेवेलियर कह चुकी हैं कि अपराधियों सहित किसी भी व्यक्ति का निर्वासन (देश से निकालना) उचित नहीं है। वह पुलिस से नफरत करती हैं और उन्हें ‘सूअर’ कहती हैं, अमेरिकी सैनिकों को युद्ध अपराधी बताती हैं और कहती हैं कि अमेरिका एक शर्मनाक देश है। वह सिर्फ़ न्यूयॉर्क से चुनाव लड़ रही हैं क्योंकि उन्हें पता है कि फ्लोरिडा में उनके जीतने की कोई संभावना नहीं है।”
Darializa Avila Chevalier, who just won the NY-13 Democrat primary, says “Inshallah” if she makes it to Congress, she wants to make sure to reflect her Muslim faith “in the halls of power”. pic.twitter.com/AWMYi40AcO
— Benny Johnson (@bennyjohnson) June 24, 2026
ऐसा ही उनका एक पुराना वीडियो भी सामने आया, जिसमें शेवेलियर कहती दिख रही हैं कि अगर वह कॉन्ग्रेस में पहुँचती हैं तो ‘इंशाल्लाह’ यह पक्का करना चाहेंगी कि ‘सत्ता के गलियारों’ में उनके मुस्लिम मजहब की झलक दिखे।
निष्कर्ष: न्यूयॉर्क में जोहरान ममदानी ने अपने जैसे दो को बनाया अगला प्रतिनिधि
शेवेलियर और कवास के बैकग्राउंड को देखते हुए लगता है कि यह भी जोहरान ममदानी की राह पर ही हैं। इन्होंने भी न्यूयॉर्क में मुस्लिम-पीड़ित पहचान, हमास को समर्थन और अमेरिकी नीतियों की आलोचना करके ही चुनाव जीता है। लगता है कि न्यूयॉर्क को कई जोहरान मिल गए हैं और इनका प्राइमरी चुनाव जीतने यही अंदेशा है कि ऐसे अमेरिकी विरोधी नेता आम चुनाव भी आसानी से जीत जाएँगे, क्योंकि न्यूयॉर्क पहले से ही सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी का गढ़ रहा है।
हालाँकि इससे यह सवाल जरूर खड़ा होता है कि क्या न्यूयॉर्क में सचमुच लोग ट्रंप प्रशासन की नीतियों से परेशान हैं या फिर शहर में मुस्लिमों की आबादी बढ़ रही है। वैसे भी आए दिन सोशल मीडिया पर वीडियोज सामने आते रहते हैं कि जिसमें न्यूयॉर्क की सड़कों पर मुहर्रम के शोक हो रहे हैं, टाइम्स स्क्वायर से अजान की आवाजें आती हैं और इसी न्यूयॉर्क में बैठकर जोहरान ममदानी और उसके जैसे नेता अमेरिका के विरोध में बयान देते हैं और आतंकियों के मरने पर शोक मनाते हैं। क्या ऐसे नेताओं को सत्ता में लाकर अमेरिका इस्लामीकरण की ओर है?


