सोशल मीडिया पर पैगंबर मोहम्मद और हजरत आयशा के खिलाफ कथित तौर पर की गई एक टिप्पणी को लेकर इस समय देश के कई राज्यों में भारी बवाल मचा हुआ है। मुंबई की रहने वाली नाजिया इलाही खान के एक पुराने बयान के बाद उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर और महाराष्ट्र के कई शहरों में अचानक मुस्लिम समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए हैं।
इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब AIMIM के नेता असदुद्दीन ओवैसी का एक Video सोशल मीडिया पर Viral हुआ। इसके बाद ओवैसी पर भीड़ को भड़काने और ‘सर तन से जुदा’ जैसे खतरनाक नारों के लिए उकसाने के आरोप लग रहे हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि FIR के बहाने इस्लामी कट्टरपंथी किस दंगे या हिंसा की साजिश को अंजाम देना चाहते हैं?
महाराष्ट्र में पहली FIR और रजा एकेडमी का एक्शन
इस पूरे विवाद की कानूनी शुरुआत महाराष्ट्र से हुई। मुंबई महानगर क्षेत्र के भिवंडी में स्थित शांति नगर थाने में स्थानीय निवासी रविश मोमिन और अदनान अंसारी की शिकायत पर नाजिया इलाही खान और पॉडकास्ट होस्ट दिव्या सिंह के खिलाफ देश की पहली FIR दर्ज की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि 19 जून को इंस्टाग्राम पर पोस्ट की गई एक पॉडकास्ट रील में नाजिया ने आपत्तिजनक बयान दिए जिससे मुस्लिम समुदाय की भावनाएँ आहत हुईं।
इसके साथ ही मुंबई के पाधोनी थाने में रजा एकेडमी के अध्यक्ष अलहाज मुहम्मद सईद नूरी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल पहुँचा और नाजिया की तुरंत गिरफ्तारी की माँग की। एडवोकेट इरफान शेख की शिकायत पर पुलिस ने जीरो FIR दर्ज की। डीसीपी रागसुधा के मुताबिक, इस मामले का मुख्य अधिकार क्षेत्र पश्चिम बंगाल में आता है, इसलिए केस को आगे की जाँच के लिए वहाँ ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
मालेगाँव और हैदराबाद में बढ़ा कानूनी शिकंजा
महाराष्ट्र के मालेगाँव में भी ऑल इंडिया सुन्नी जमीयतुल इस्लाम के पदाधिकारियों की शिकायत पर नाजिया के खिलाफ एक और FIR दर्ज की गई। संगठन के प्रतिनिधि सूफी नुरुल अयन साबरी ने बताया कि नाजिया लंबे समय से मुस्लिम समुदाय, उनकी मजहबी हस्तियों और त्यौहारों के खिलाफ विवादित बयान दे रही हैं। उन्होंने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की माँग की है।
दूसरी तरफ, हैदराबाद में भी विभिन्न इस्लामी संगठनों के प्रमुख उलेमाओं ने चारमीनार जोन के डीसीपी किरण खरे प्रभाकर से मुलाकात कर नाजिया के खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत में आरोप लगाया गया कि नाजिया ने हिंदुओं से सरकारी और निजी नौकरियों में मुसलमानों का आर्थिक बहिष्कार करने की अपील की थी। प्रतिनिधिमंडल ने इस बयान को सांप्रदायिक सौहार्द के लिए एक सीधा खतरा बताया।
उत्तर प्रदेश के कई शहरों में भारी विरोध प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश में भी इस बयान को लेकर अचानक गुस्सा भड़क उठा है। बलरामपुर के उतरौला कोतवाली में समाजसेवी फिरोज खान और डॉ सलमान जमशेद की तहरीर पर नाजिया के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। वहीं बागपत के बड़ौत कोतवाली में एडवोकेट आकिब चौधरी के नेतृत्व में मुस्लिम समाज ने देर रात थाने का घेराव किया। पुलिस ने बड़ौत में निष्पक्ष जाँच का भरोसा देते हुए लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।
इसके अलावा बरेली में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रदेश महासचिव नदीम कुरैशी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल कोतवाली पहुँचा और तहरीर सौंपी। रामपुर के मिलक में भी भैंसोड़ी शरीफ के सैकड़ों लोग रात के समय सीओ रजवीर सिंह परिहार के दफ्तर पहुँचे और शिकायती पत्र देकर सख्त कार्रवाई की माँग की। शामली के थानाभवन में भी युवा जन सेवा समिति के अध्यक्ष डॉ आसिफ की अगुवाई में थाना प्रभारी को ज्ञापन दिया गया।
अलीगंज में ज्ञापन और मध्य प्रदेश-कश्मीर तक फैली आग
उत्तर प्रदेश के अलीगंज और आंवला के लीलौर बुजुर्ग में सैकड़ों लोगों ने इकट्ठा होकर SDM विदुषी सिंह से मुलाकात की और नाजिया के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की माँग उठाई। इस प्रदर्शन में भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के कार्यकर्ता भी शामिल हुए, जिन्होंने कहा कि सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाली ऐसी हरकतें बर्दाश्त नहीं की जा सकतीं। इटावा में भी AIMIM के जिलाध्यक्ष शमशाद हुसैन वारसी ने डीएम और एसएसपी को ज्ञापन सौंपा।
मध्य प्रदेश के जबलपुर में भी गोहलपुर थाने का मुस्लिम समाज और युवाओं ने भारी घेराव किया और तुरंत FIR की माँग की। वहीं जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में BJP के को-मीडिया प्रभारी साजिद यूसुफ शाह ने नाजिया के बयान की कड़ी निंदा की और कहा कि BJP अल्पसंख्यक मोर्चा से उनका कोई संबंध नहीं है। जम्मू-कश्मीर बीजेपी ने घोषणा की है कि वे इस बयान के खिलाफ श्रीनगर पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराएँगे।
क्या यह देश का माहौल खराब करने की कोई बड़ी साजिश है?
इस पूरे मामले के घटनाक्रम को अगर ध्यान से देखा जाए, तो इसमें एक गहरी और सोची-समझी साज़िश की बू आती है। नाजिया इलाही खान का बयान कुछ दिन पुराना है, लेकिन कई दिनों तक शांत रहने के बाद अचानक एक ही दिन, एक साथ देश के कई राज्यों के शहरों में मुस्लिम समाज का सड़कों पर उतर आना सामान्य बात नहीं है। उत्तर प्रदेश के रामपुर, बरेली, मेरठ से लेकर महाराष्ट्र के मालेगाँव और मध्य प्रदेश के जबलपुर तक जिस तरह अचानक इस्लामी भीड़ जुटी, वह साफ इशारा करता है कि इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है जो बैकस्टेज से इस पूरी भीड़ को कोऑर्डिनेट कर रहा है।
सबसे बड़ा सवाल इसकी टाइमिंग को लेकर है। आमतौर पर देखा गया है कि देश में इस तरह के धार्मिक मुद्दों पर शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद अचानक भारी हिंसा भड़क उठती है। ऐसे में जुमे से ठीक एक दिन पहले पूरे देश में एक सोची-समझी रणनीति के तहत ‘डॉग व्हिसलिंग’ की गई। असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेताओं के Video Viral करना सिर्फ एक बहाना था, असली मकसद गुरुवार को सड़कों और थानों पर अपना भारी शक्ति प्रदर्शन दिखाना था, ताकि शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद बड़ी संख्या में इस्लामी कट्टरपंथियों को भड़काकर देश को दंगे की आग में झोंका जा सके। इस्लामी कट्टरपंथी अक्सर ऐसी पुरानी बातों का सहारा लेकर माहौल खराब करने का षड्यंत्र रचते हैं, जिससे देश की सुरक्षा और आपसी भाईचारे को गंभीर खतरा पैदा होता है।


