भारत और जापान अपने आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों को नई ऊँचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं। दोनों देश अब व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम कर सीधे भारतीय रुपए और जापानी येन में लेनदेन की व्यवस्था बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की भारत यात्रा के दौरान उनका स्वागत करते हुए उन्हें अपनी ‘छोटी बहन’ बताया। संयुक्त प्रेस वार्ता में मोदी ने कहा कि भारत और जापान दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएँ हैं और दोनों देशों की साझेदारी आने वाले वर्षों में और मजबूत होगी।
डॉलर के बिना व्यापार की तैयारी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत और जापान ऐसी व्यवस्था पर काम कर रहे हैं जिसके तहत दोनों देशों की कंपनियाँ सीधे रुपए और येन में भुगतान कर सकेंगी। इसके लिए जापान का वित्त मंत्रालय वित्त वर्ष 2026 के दौरान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ एक सहयोग समझौता (MoC) करने की तैयारी में है। यह व्यवस्था लागू होने के बाद अमेरिकी डॉलर या किसी तीसरे देश के बैंक के जरिए भुगतान करने की आवश्यकता काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।
Sharing my remarks during the joint press meet with PM Sanae Takaichi of Japan. @takaichi_sanae
— Narendra Modi (@narendramodi) July 2, 2026
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2025 में बनी थी सहमति, अब अमल की तैयारी
स्थानीय मुद्राओं में व्यापार का विचार नया नहीं है। अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की जापान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अगले 10 वर्षों के साझा विजन दस्तावेज में स्थानीय मुद्रा में व्यापार और भुगतान प्रणाली को बढ़ावा देने पर सहमति जताई थी।
अब उसी दिशा में औपचारिक कदम उठाए जा रहे हैं। भारत ने जुलाई 2022 में स्पेशल रुपी वोस्त्रो अकाउंट की व्यवस्था शुरू की थी, जिसके जरिए विदेशी देशों के साथ रुपए में व्यापार को बढ़ावा दिया जा रहा है।
भारत में लगातार बढ़ रहा जापानी निवेश
भारत और जापान के आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच 27.5 अरब डॉलर का व्यापार हुआ। अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच जापान ने भारत में 3.2 अरब डॉलर का निवेश किया, जबकि अगले 10 वर्षों में 61 अरब डॉलर से अधिक निवेश का लक्ष्य तय किया गया है। मार्च 2026 तक जापान का भारत में कुल निवेश करीब 4.58 लाख करोड़ रुपए पहुँच चुका है, जिससे वह भारत में निवेश करने वाला पाँचवाँ सबसे बड़ा देश बन गया है।
हाई-टेक और बुलेट ट्रेन परियोजनाओं पर फोकस
भारत में करीब 1400 जापानी कंपनियाँ काम कर रही हैं, जिनमें लगभग आधी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ी हैं। दोनों देशों ने 10 ट्रिलियन जापानी येन (करीब 5.84 लाख करोड़ रुपए) के निजी निवेश का लक्ष्य रखा है। यह निवेश सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी और हाई-टेक डिफेंस जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा। वहीं मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना जापानी शिनकानसेन तकनीक और जापानी वित्तीय सहायता के साथ दोनों देशों की साझेदारी का सबसे बड़ा प्रतीक बनी हुई है।
रणनीतिक सहयोग भी होगा मजबूत
भारत और जापान केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं हैं। चीन पर वैश्विक निर्भरता कम करने के उद्देश्य से दोनों देशों ने 2025 में सेमीकंडक्टर और लिथियम-कोबाल्ट जैसे क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन मजबूत करने के लिए विशेष रणनीतिक संवाद शुरू किया था।
दोनों नेताओं के बीच क्वाड, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। स्थानीय मुद्रा में व्यापार की नई व्यवस्था लागू होने पर दोनों देशों के बीच व्यापार आसान होगा, भुगतान की लागत घटेगी और विदेशी मुद्रा पर निर्भरता भी कम होगी।

