देशभर में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आजीविका की सुरक्षा को लेकर एक ऐतिहासिक बदलाव लागू हो गया है। दो दशक पुराने महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा MGNREGA, 2005) की जगह पर केंद्र सरकार का नया कानून ‘विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी अधिनियम’ यानी ‘वीबी-जी राम जी एक्ट’ (VB-G RAM G Act, 2025) 1 जुलाई 2026 से लागू हो चुका है।
इस कानून के लागू होने के साथ ही देश के ग्रामीण विकास के ढाँचे में आमूल-चूल परिवर्तन होने जा रहा है। सरकार जहाँ इसे ‘विकसित भारत @2047’ के विजन को पूरा करने और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने वाला एक क्रांतिकारी कदम बता रही है तो वहीं कॉन्ग्रेस ने इस बदलाव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कॉन्ग्रेस पुराना मनरेगा बंद किए जाने का रोना रो रही है।
कॉन्ग्रेस ने क्या कहा?
कॉन्ग्रेस के लोकसभा सांसद सप्तगिरि उलाका ने बुधवार (1 जुलाई 2014) को प्रेस कॉन्फ्रेस कर कहा कि आज एक बहुत दुखद दिन है, क्योंकि मोदी सरकार ने मनरेगा योजना को खत्म कर दिया है। कॉन्ग्रेस सांसद ने कहा, “मनरेगा को खत्म कर सरकार ने देश के तमाम गरीबों को एक झटका दिया है, क्योंकि ये ‘मांग आधारित’ रोजगार देने वाली योजना थी।”
उन्होंने कहा, “सप्लाई बेस मॉडल में केंद्र सरकार पहले एडवांस में फंड बजट आवंटित करती है और लेबर बजट मंजूर करती है। इसके तहत राज्य सरकार को पैसा और प्रशासनिक क्षमता को मैच करना पड़ेगा जिससे काम हो पाए। मनरेगा में कितने लोगों ने रोजगार माँगा है, उसके आधार पर पैसा आवंटित किया जाता था लेकिन अब VB GRAM G में एक बजट दिया जाएगा जिसमें काम खत्म करना होगा।”
सप्लाई बेस मॉडल में केंद्र सरकार पहले एडवांस में फंड बजट आवंटित करती है और लेबर बजट मंजूर करती है।
— Congress (@INCIndia) July 1, 2026
इसके तहत, राज्य सरकार को funds और administrative capacity को match करना पड़ेगा, ताकि काम हो पाए।
मनरेगा में कितने लोगों ने रोजगार मांगा है, उसके आधार पर पैसा आवंटित किया जाता था,… pic.twitter.com/EQenswpnKF
केंद्र सरकार ने क्या बताया?
इस अधिनियम के देश भर में लागू होने से पहले केंद्रीय ग्रामीण विकास और कृषि व किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे ऐतिहासिक दिन बताया है। उन्होंने कहा कि कोई भी पात्र ग्रामीण श्रमिक एक भी दिन काम से वंचित न रहे, यह सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ मिलकर अधिनियम के सुचारु क्रियान्वयन के लिए सभी प्रशासनिक, वित्तीय और तकनीकी तैयारियाँ पूरी कर ली हैं।
चौहान ने कहा, “पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध करा दिए गए हैं, पूरी व्यवस्था तैयार है और चल रहे सभी कार्य बिना किसी बाधा के जारी रहेंगे। रोजगार की गारंटी को 125 दिनों तक बढ़ाने से ग्रामीण परिवारों की आजीविका और मजबूत होगी, टिकाऊ सामुदायिक परिसंपत्तियों का निर्माण होगा तथा विकसित भारत के लक्ष्य को गति मिलेगी।”
इस एक्ट के ठीक से क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को ₹95,692.31 करोड़ की अंतरिम राशि पहले ही आवंटित कर दी है। इससे अधिनियम लागू होने के पहले दिन से ही रोजगार उपलब्ध कराने, समय पर मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करने और विकास कार्यों को बिना किसी बाधा के जारी रखने में मदद मिलेगी।
सरकार ने नए ढाँचे में सीमलेस ट्रांजिशन सुनिश्चित किया है। पहले से चल रहे सभी कार्य जारी रहेंगे और जिन श्रमिकों का ई-केवाईसी पूरा हो चुका है, उनके मौजूदा जॉब कार्ड ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी होने तक मान्य रहेंगे ताकि रोजगार और मजदूरी भुगतान में किसी प्रकार की रुकावट न आए।
मनरेगा VS वीबी जी राम जी: कौन जनता का हितैषी?
विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे बेरोजगारी के इस नैरेटिव की जब तथ्यों के साथ पड़ताल की जाती है, तो तस्वीर पूरी तरह बदली हुई नजर आती है। असल में ‘जी राम जी बिल’ के तहत ग्रामीण रोजगार की गारंटी को खत्म नहीं किया गया है बल्कि इसके दायरे और सामर्थ्य को काफी बढ़ा दिया गया है।
मनरेगा के तहत एक वित्तीय वर्ष में प्रति ग्रामीण परिवार को केवल 100 दिनों के कुशल/अकुशल रोजगार की कानूनी गारंटी मिलती थी लेकिन नए ‘वीबी-जी राम जी एक्ट’ ने इस वैधानिक गारंटी को बढ़ाकर 125 दिन कर दिया है। यानी ग्रामीण परिवारों को अब पहले की तुलना में 25 दिन अधिक सुनिश्चित रोजगार और आय की सुरक्षा मिलेगी।
एक और सबसे महत्वपूर्ण तथ्य जो विपक्ष के दावों को खारिज करता है, वह है दैनिक मजदूरी दरों में की गई ऐतिहासिक वृद्धि। इस नए कानून के लागू होने के साथ ही केंद्र सरकार ने संशोधित मजदूरी दरों को अधिसूचित कर दिया है, जिसके तहत देश का राष्ट्रीय औसत वेतन बढ़कर 327.4 रुपए प्रति दिन हो गया है। अलग-अलग राज्यों के लिए यह दर 300 रुपए से लेकर 409 रुपए प्रति दिन (सिक्किम के कुछ हिस्सों में 450 रुपए) के बीच तय की गई है।
अगर गाँव का कोई पात्र मजदूर काम के लिए आवेदन करता है और उसे काम नहीं मिलता, तो कानून के तहत उसे बेरोजगारी भत्ता देना जरूरी है। यही बात इस योजना को कानूनी मजबूती देती है।
क्यों मनरेगा की जगह जरूरी थी VB-G RAM G?
साल 2005 में जब मनरेगा बना था, तब ग्रामीण भारत की आर्थिक स्थिति अलग थी। समय बदला तो देश में एक ऐसी योजना की जरूरत थी जो केवल ‘गड्ढे खोदने और भरने’ तक सीमित न रहकर ग्रामीण संपत्तियों का आधुनिकीकरण कर सके।
‘जी राम जी बिल’ इसी सोच के साथ देश में 4 मुख्य प्राथमिक कार्यक्षेत्रों (प्रायोरिटी वर्टिकल्स) पर केंद्रित है। इसमें पहला है जल सुरक्षा, जिसके तहत तालाबों का जीर्णोद्धार और भूजल रीचार्जिंग पर काम होगा। दूसरा मुख्य ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर, तीसरा आजीविका से जुड़ी संपत्तियाँ और चौथा चरम मौसमी घटनाओं (क्लाइमेट चेंज) के प्रभावों को कम करने वाले विशेष कार्य हैं।
देशव्यापी स्तर पर इसके लागू होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक बड़ा संरचनात्मक सुधार देखने को मिलेगा। पहले मनरेगा में यह शिकायत आम थी कि बुवाई और कटाई के मुख्य सीजन में जब किसानों को खेतों के लिए मजदूरों की भारी जरूरत होती थी, तब सरकारी कामों के कारण खेतों में लेबर शॉर्टेज (मजदूरों की कमी) हो जाती थी और कृषि मजदूरी में बेवजह की महँगाई आ जाती थी।
इस समस्या का समाधान करते हुए नए कानून की धारा 6 में यह प्रावधान किया गया है कि राज्य सरकारें मुख्य कृषि सीजन के दौरान इस योजना को अधिकतम 60 दिनों के लिए निलंबित या पॉज कर सकती हैं। इससे किसानों को खेती के समय आसानी से श्रमिक उपलब्ध होंगे, जिससे देश के कृषि उत्पादन और किसानों की आय में सीधे तौर पर बढ़ोतरी होगी।
इसके अलावा, योजना में पारदर्शिता लाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है ताकि मनरेगा के दौर में होने वाले फर्जीवाड़े, घोस्ट बेनेफिशियरी (फर्जी श्रमिक) और करोड़ों रुपयों के फंड मिसएप्रोप्रिएशन (वित्तीय अनियमितताओं) को पूरी तरह से रोका जा सके। डिजिटल अटेंडेंस और सीधे बैंक खातों में आधार-लिंक्ड भुगतान प्रणाली से मजदूरी की चोरी रुकना देश के करोड़ों ईमानदार श्रमिकों के हित में है।
UP को VB-G RAM G से होंगे क्या फायदे?
VB-G RAM G कानून का उत्तर प्रदेश के लिए बड़ा फायदा इसलिए है, क्योंकि राज्य की बड़ी आबादी गाँवों में रहती है। 2011 की जनगणना के मुताबिक, यूपी की 77.73% आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है। ऐसे में ग्रामीण रोजगार से जुड़ा कोई भी कानून सीधे करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी और आजीविका के लिए फायदे वाला होता है।
मजदूरों की कमाई बढ़ेगी
इस कानून से उत्तर प्रदेश के ग्रामीण मजदूरों की दैनिक कमाई बढ़ेगी। नए प्रावधानों के तहत यूपी में मजदूरों को ₹300 प्रति दिन की न्यूनतम मजदूरी मिलेगी। साथ ही पुराने मनरेगा में जहाँ 100 दिन का रोजगार मिलता था, वहीं अब 125 दिन का सुनिश्चित रोजगार दिया जाएगा। इससे ग्रामीण परिवारों की सालाना आय बढ़ेगी और गाँवों में आर्थिक मजबूती आएगी।
बुंदेलखंड जैसे सूखे इलाकों को राहत
उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड जैसे पठारी और सूखे इलाकों में पानी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। VB-G RAM G कानून में जल सुरक्षा को पहली प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत गाँवों में तालाबों को गहरा करने, नए चेकडैम बनाने और वर्षा जल संचयन जैसे काम वैज्ञानिक तरीके से किए जाएँगे। इससे सूखे क्षेत्रों में भूजल स्तर सुधारने में मदद मिलेगी।
UP को सबसे ज्यादा आवंटन
इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश को सबसे बड़ा अंतरिम आवंटन मिला है। रिपोर्ट के अनुसार केंद्र ने VB-G RAM G के लिए ₹95,692.31 करोड़ की अंतरिम राशि रखी है जिसमें यूपी को सबसे ज्यादा ₹9,721.48 करोड़ मिले हैं। इससे राज्य में मजदूरी भुगतान, नए काम शुरू करने और पुराने ग्रामीण विकास कार्यों को बिना रुकावट आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
कुल मिलाकर VB-G RAM G कानून को ग्रामीण भारत और खासकर उत्तर प्रदेश के लिए एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा सकता है। इस कानून से गाँवों में रहने वाले गरीब और श्रमिक परिवारों को ज्यादा दिनों का रोजगार, बेहतर मजदूरी और समय पर भुगतान मिलने की उम्मीद है। साथ ही जल सुरक्षा, ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर और आजीविका से जुड़े कामों पर जोर देने से गाँवों में स्थायी विकास की राह मजबूत होगी।
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और ग्रामीण आबादी वाले राज्य के लिए यह कानून सिर्फ रोजगार देने वाली योजना नहीं बल्कि गाँवों को आत्मनिर्भर बनाने का अवसर भी साबित हो सकता है। बुंदेलखंड जैसे सूखे इलाकों में पानी से जुड़े काम, मजदूरों की बढ़ी हुई कमाई और सबसे बड़े आवंटन के कारण यूपी को इसका सीधा लाभ मिलेगा।


