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क्या मोरक्को के ‘एटलस लायंस’ रोक पाएँगे फ्रांस का विजय रथ? विश्व कप 2026

फुटबॉल का जुनून इन दिनों सिर चढ़कर बोल रहा है। एक ओर मोरक्को ने कनाडा को हराकर अपनी धाक जमाई है, तो दूसरी ओर फ्रांस का सफर जारी है।

फुटबॉल का सुरूर सब के सिर चढ़कर बोल रहा है। हाल ही की हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि विम्बल्डन को भारी नुक़सान झेलना पड़ रहा है क्योंकि फिलहाल तमाम लोगों को फुटबॉल का बुखार चढ़ा हुआ है। चलते मैचों के दौरान लोग अपने अपने मोबाइल फोनों में फुटबॉल मैचों में व्यस्त हैं। हाल ही में जैसे ही फीफा विश्व कप के मैच के अंतिम पन्द्रह मिनट में कप्तान हैरी केन ने DR Congo के विरुद्ध जरूरी गोल दाग कर स्कोर बराबर किया, विम्बल्डन के सेंटर कोर्ट व कोर्ट नम्बर एक की दर्शक-दीर्घा में मौजूद दर्शकों ने खुशी में जोर से शोर मचाया, वहां चल रहे खेल के खिलाड़ियों को लगा वह उनके खेल पर उनकी हौसला-अफजाई कर रहे हैं, परन्तु, ऐसा था नहीं। फीफा विश्व कप सब को अपने आगोश में ले चुका है। हर ओर बस उसके ही चर्चे हैं।

बीती रात राउंड ऑफ 16 के दो मैच खेले गए। पहला मैच था यूएस के टेक्सास प्रांत के सबसे घनी आबादी वाले शहर ह्यूस्टन के स्टेडियम में जहां कनाडा का सामना होने जा रहा था टूर्नामेंट की मजबूत टीमों में शुमार मोरक्को से। गौरतलब है कि पिछले विश्व कप के ग्रुप चरण में भी यह दोनों आपस में भिड़ती नजर आई थीं।

मैच शुरू होता है। शुरुआती क्षणों से ही कोच जेस्से मार्श्च की कनाडा लगातार मोरक्को पर दबाव बनाए हुई थी। यह देखना वाकई आश्चर्यजनक था कि कैसे कनाडा मोरक्को को, जो पिछले कुछ सालों में एक सशक्त टीम बन कर उभरे हैं, यूं पछाड़ रही थी। कनाडाई टीम निरंतर मोरक्को के खिलाड़ियों को प्रेस किए जा रही थी व मैदान में उनकी एक भी न चलने दे रही थी। वह शुरुआती पलों में मोरक्को के गोलपोस्ट पर कुछ वाकई बेहद घातक हमले भी करते नजर आते हैं, परन्तु गोलपोस्ट पर खड़े अनुभवी गोलकीपर यासीन बोनू लगातार बेहतरीन बचाव किए जा रहे थे। इससे एटलस लायंस को कनाडा द्वारा दिए जा रहे शुरुआती झटकों से उबरने में मदद मिलती है। पहले हाफ में कनाडा शुरू से अंत तक मोरक्को पर भीषण दबाव बनाए रखती है। परन्तु वह गोल स्कोर करने में नाकाम रहते हैं। सो, पहले हाफ की समाप्ति पर स्कोर 0-0 ही रहता है।

दूसरे हाफ की शुरुआत होती है। एटलस लायंस के कोच बदली रणनीति के साथ अपनी टीम को मैदान पर उतारते हैं। और, अब तो खेल पूरी तरह बदल जाता है। अनुभवी मोरक्को कनाडा को अपने शिकंजे में कस लेती है। मैच के पचासवें मिनट में कनाडाई गोलपोस्ट की दाईं ओर मोरक्को को एक फ्री किक मिलती है, जिसे अचरफ हाकिमी और अज़्ज़ेदीन ऊनाही ने मिलकर एक सेट-पीस मूव के जरिए अंजाम दिया, जहाँ मौका पाते ही ऊनाही ने कनाडाई बॉक्स के बाहर से गोलपोस्ट के बॉटम राइट कॉर्नर की ओर एक ताकतवर राइट फुटर किक दाग गोल स्कोर कर लिया। मोरक्को अंततः मैच में बढ़त बना लेती है। फिर, बयासिवें मिनट में ब्राहीम डियाज़ के पास पर दुबारा अज़्ज़ेदीन ऊनाही एक गोल दाग स्कोर 2-0 कर देते हैं। फिर 90+8 मिनट में मोरक्को एक गोल और दागते हुए मैच 3-0 से जीत जाती है।

पिछले विश्व कप में सेमीफाइनल तक का सफर तय करने वाले एटलस लायंस इस जीत के संग क्वार्टर फाइनल में जगह बना लेते हैं। कनाडाई टीम, विश्व कप के इतिहास में इस बार पहली दफा नॉकआउट चरण में कोई मुकाबला जीतने के पश्चात, अच्छा खेल दिखाते हुए टूर्नामेंट को अलविदा कहने के लिए मजबूर थे।

देर रात अगला मैच फ्रांस और पेराग्वे के मध्य फिलाडेल्फिया में खेला गया। यहां भीषण गर्मी तो थी ही, परन्तु मैदान के भीतर भी गरमा-गरमी देखने को मिली। पेराग्वे 5-4-1 की फॉर्मेशन के साथ एक अति-रक्षात्मक खेल खेलने मैदान में उतरा था। मैच में लगभग छिहत्तर प्रतिशत वक्त गेंद फ्रेंच टीम के कब्जे में थी। मगर बेहद सजग तरीके से डिफेंसिव फुटबॉल खेल रही पेराग्वे फ्रेंच टीम को अटैक करने के मौके ही नहीं दे रही थी। गुजरे दिन हमने अर्जेंटीना को काबो वर्दे के खिलाफ संघर्ष करते देखा था। फ्रांस भी आज बाकी मैच-डेज़ की भांति विपक्षी बॉक्स में खतरा पैदा करती नजर नहीं आ रही थी।

मगर, मैच के सतत्तरवें मिनट में फ्रांस को एक पेनाल्टी मिल जाती है जिसे उनके स्टार खिलाड़ी कीलिएन एमबाप्पे सफलतापूर्वक गोल में तब्दील कर देते हैं।

एक नॉकआउट चरण के मुकाबले में कौन अच्छा खेला इससे ज्यादा यह मायने रखता है कि मैच समाप्ति पर किसने ज्यादा गोल मार कर बढ़त हासिल की हुई थी। इस एक गोल की बढ़त के दम पर लेस ब्ल्यूज़ क्वार्टर फाइनल में जगह बना लेती है जहां अब उनका सामना होगा एटलस लायंस से। यह दोनों ही टीमें बहुत अच्छे खेल का प्रदर्शन कर रही हैं। फीफा की वैश्विक रैंकिंग में शीर्ष-10 में शामिल मोरक्को अंततः तक हार नहीं मानती और लड़ती रहती है, जूझती रहती है। उसका हर खिलाड़ी मैदान में अपना सबकुछ झोंक देता है। वहीं, फ्रांस एक बेहद ही घातक अटैकिंग फोर्स बनकर उभरी है, जो अपने घातक अटैक जितनी ही मजबूत रक्षापंक्ति लेकर इस टूर्नामेंट में उतरे हैं। निश्चित रूप से यह एक बड़ा मुकाबला होने जा रहा है।

खैर, अब, आज रात डेढ़ बजे न्यूयॉर्क के न्यूजर्सी स्टेडियम में खेला जाएगा एक महामुकाबला। आज ब्राजील अपने राउंड ऑफ 16 मुकाबले में नॉर्वे के खिलाफ मैदान में उतरेगी। ब्राजील की टीम, कुछ अहम खिलाड़ियों के चोटिल होने के बावजूद, अच्छी फॉर्म में नजर आई है। वहीं, नॉर्वे के पास एक तुरुप का पत्ता है – अर्लिंग हालांड। नॉर्वे हालांड के साथ साथ एंटोनियो नूसा व एलेक्सैन्डर सोरलोथ से गोल स्कोर करने की उम्मीदें लगाए होगी। मिडफील्ड में एक दफा फिर कप्तान ओद्देगार्द मौजूद होंगे जो अंत तक मैदान में अपना सर्वस्व झोंक देंगे। तमाम पंडितों का कहना है कि ब्राजील यह मैच 2-1/3-0 से जीत जाएगी, मगर क्योंकि यह एक नॉकआउट मुकाबला है, कोई भी टीम यहां कुछ भी कर सकती है।

फिर, कल सुबह साढ़े पांच बजे अपने गढ़ ऐज़्टेका स्टेडियम में मेक्सिको इंग्लैंड से दो-दो हाथ करती नजर आएगी। मेक्सिको अबतक इस विश्व कप में अविजित रही है। काबो वर्दे से प्रेरणा लेकर वह जरूर एक बड़ा उलटफेर करना चाहेंगे। सबकी नजरें एक बार फिर युवा गिल्बर्टो मोरा पर टिकी होंगी। वहीं इंग्लैंड एक बार फिर अपने कप्तान हैरी केन के नेतृत्व में वापस एकजुट होकर एक शानदार जीत दर्ज कर क्वार्टर फाइनल के लिए क्वालीफाई करना चाहेंगे।

यह विश्व कप हमें नित नई कहानियां परोस रहा है। हर रोज़ एक सांसें थाम देने वाला रोमांचक मैच होता है। और जब लगता है कि इससे बेहतरीन क्या ही हो सकेगा, अगले ही पल एक और ज्यादा रोमांचक मैच हो जाता है। हर दिन कोई खिलाड़ी अपने शानदार खेल के दम पर पूरे विश्व के खेलप्रेमियों का दिल जीत रहा है। कभी अयुब बउदादी, तो कभी वोजिन्हा। कभी, गिल्बर्टो मोरा तो कभी सिडनी लोपेज़ काबराल। हमें नित नए सितारे जगमगाते हुए दिख रहे हैं। इन खिलाड़ियों को खेलते देखना बेहद सुखद अहसास देता है। कल का दिन रहा अज़्ज़ेदीन ऊनाही के नाम‌। ऊनाही ने कल दो बेहद शानदार गोल जड़ते हुए, कनाडाई कोच जेस्से मार्श्च का ख्वाब तोड़ कर, अपनी टीम को क्वार्टर फाइनल में पहुंचाया। उनके दोनों ही गोल ऐसे हैं जिन्हें आप यूट्यूब पर जाकर कई बार देख सकते हैं।

गौरतलब है कि जब 2022 विश्व कप के राउंड ऑफ 16 के अपने मुकाबले में मोरक्को ने पेनाल्टी शूटआउट में यूरोपीय जाएंट्स स्पेन को 3-0 से हरा कर बाहर किया था तो एक पत्रकार ने मैच पश्चात होने वाली प्रेस-वार्ता में जब स्पेन के कोच लुई एनरिके को पूछा कि उन्हें मोरक्को के किस खिलाड़ी ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया तो सभी को लगा था कि वह पेनाल्टी शूटआउट में शानदार प्रदर्शन करने वाले गोलकीपर यासीन बोनू का नाम लेंगे, मगर उन्होंने जो नाम लिया था वह नाम था अज़्ज़ेदीन ऊनाही का। उन्होंने कहा था कि मुझे यकीन ही नहीं हुआ वह कितना बेहतरीन खेला। मुझे माफ़ करिए मुझे उनका नाम नहीं पता, मगर, मोरक्को के लिए आठ नम्बर की जर्सी पहना खिलाड़ी पूरे मैच के दौरान बिन रुके दौड़ता रहा। वह एक पल के लिए भी रुकता नहीं था। उसने अकेले स्पेन के मिडफील्ड के नाक में दम कर के रख दिया।

उस रोज़ स्पेनिश कोच लुई एनरिके उस आठ नम्बर की जर्सी पहने खिलाड़ी का नाम नहीं जानते थे। आज उस खिलाड़ी का नाम सारी दुनिया जान गई। वह खिलाड़ी हैं अज़्ज़ेदीन ऊनाही। सिग्मंड फ्रॉएड ने सच ही तो कहा था कि एक दिन वर्षों का संघर्ष बहुत खूबसूरत तरीके से तुमसे टकराएगा।

हर छोटा कदम, तुम्हें एक बड़ी मंजिल की ओर पहुंचा रहा होता है। कौन जाने, क्या पता रातें पिघला कर ऑपइंडिया के लिए विश्व कप की यह मैच-रिपोर्ट्स लिखना भी शायद कोई ऐसा ही कदम हो।

बने रहिएगा साथ। फुटबॉल के किस्से जारी रहेंगे।

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गौरव बडोला
गौरव बडोला
दिन में दिहाड़ी करता हूं, रात को कोरे कागज़ पर अपने ख्वाबों की दुनिया बुनता हूं। फुटबॉल और साहित्य को जीता हूं।

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