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FIFA World Cup: फुटबॉल की सबसे लंबी रात; नेमार की विदाई, हालांड का इतिहास और रोनाल्डो का इम्तिहान

एक दिन, दो ऐतिहासिक मुकाबले और कई भावनात्मक पल। ब्राज़ील का सफर समाप्त हुआ, इंग्लैंड मुश्किल से बच निकला और अब बारी है रोनाल्डो बनाम स्पेन की। फीफा विश्व कप की सबसे नाटकीय रात का विस्तृत विश्लेषण।

आर्थर जी. लेविस ने अपने काव्य-संग्रह ‘Stub Ends of Thoughts and Verse’ में लिखा था, “It’s not the size of the dog in the fight, but the size of the fight in the dog.” अर्थात, जीत हमेशा आकार नहीं, बल्कि भीतर धधकते साहस और संघर्ष की भूख तय करती है।

बीते दिन खेले गए दो मुकाबलों ने इस विचार को मानो हरे मैदान पर सजीव कर दिया।

न्यू जर्सी स्टेडियम की रोशनी में एक ओर पाँच बार की विश्वविजेता ब्राज़ील थी, तो दूसरी ओर वाइकिंग्स की अदम्य विरासत अपने कंधों पर लिए नॉर्वे। कागज़ पर ब्राज़ील कहीं अधिक शक्तिशाली दिख रही थी, लेकिन फुटबॉल का इतिहास बार-बार याद दिलाता है कि मैदान पर प्रतिष्ठा नहीं, प्रदर्शन बोलता है।

कोच कार्लो एन्सेलोटी ने अपनी टीम को 4-2-3-1 की पारंपरिक संरचना में उतारा। मिडफ़ील्ड की धुरी पर अनुभवी कैसेमीरो के साथ ब्रूनो गुइमाराएज़ थे। उनके आगे विनीसियस जूनियर, गेब्रियल मार्टिनेली और रायान की तेज़तर्रार तिकड़ी विपक्षी रक्षा-पंक्ति को भेदने के लिए तैयार थी, जबकि आक्रमण की अगुवाई शानदार फॉर्म में चल रहे माथियूस कुन्हा कर रहे थे। लाखों प्रशंसकों की निगाहें एक बार फिर नेमार जूनियर को खोज रही थीं, लेकिन वह लगातार दूसरी बार शुरुआती एकादश का हिस्सा नहीं थे।

रेफ़री इस्माइल एलफ़ात की पहली सीटी के साथ ही मुकाबले का आगाज़ होता है। शुरुआती क्षणों से ही नॉर्वे ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह केवल बचाव करने नहीं आई है। मानो किसी मतवाले हाथी की ऊर्जा उनके पैरों में उतर आई हो। तीसरे ही मिनट में नॉर्वे ने एक खतरनाक आक्रमण रचा, लेकिन एलेक्सांडर सोरलोथ ऑफ़साइड करार दिए गए। उधर ब्राज़ील ने भी कुछ ही मिनटों में अपनी लय पकड़ ली। गेंद पर नियंत्रण बढ़ा, पासिंग की गति तेज़ हुई और रायान ने एक शानदार अवसर भी बनाया, मगर अंतिम स्पर्श उन्हें गोल का सुख नहीं दे सका।

बारहवें मिनट में मुकाबले का पहला बड़ा मोड़ आता है। नॉर्वे के पेनाल्टी बॉक्स में ब्राज़ील के एक खिलाड़ी को गलत टैकल से गिरा दिया जाता है और रेफ़री बिना देर किए पेनाल्टी स्पॉट की ओर इशारा कर देते हैं।

विनीसियस जूनियर गेंद उठाकर आगे बढ़ते हैं। पूरा स्टेडियम मानो उनकी ओर देख रहा था। तभी डगआउट से निर्देश आता है और पेनाल्टी लेने की ज़िम्मेदारी ब्रूनो गुइमाराएज़ संभाल लेते हैं।

लेकिन अगले ही पल न्यू जर्सी स्टेडियम गूँज उठता है।

पिछले मुकाबले के नायक ओर्हान नायलांड अपनी दाईं ओर बिजली-सी फुर्ती के साथ डाइव लगाते हैं और शानदार बचाव करते हुए ब्राज़ील की पेनाल्टी को गोल में बदलने से रोक देते हैं। यह केवल एक सेव नहीं थी; यह पूरे मुकाबले की मानसिक दिशा बदल देने वाला क्षण था। नॉर्वे का आत्मविश्वास कई गुना बढ़ चुका था और ब्राज़ील पहली बार दबाव महसूस करती दिखाई दी।

इसके बाद खेल लगातार एक छोर से दूसरे छोर तक बहता रहा। ब्राज़ील की ओर से रायान और विनीसियस जूनियर लगातार नॉर्वे की रक्षापंक्ति को परखते रहे, जबकि दूसरी ओर अर्लिंग हालांड और कप्तान मार्टिन ओडेगार्द भी गोल की दिशा में कई प्रयास करते रहे। दोनों टीमें आक्रमण कर रही थीं, दोनों अवसर बना रही थीं, लेकिन गोल जैसे दोनों गोलपोस्टों से रूठ गया था।

पहले हाफ़ की समाप्ति पर स्कोरबोर्ड अब भी 0-0 ही दिखा रहा था।

दूसरे हाफ़ की शुरुआत के साथ ही नॉर्वे ने अपनी रणनीति में बदलाव किया। कोच सोलबाक्केन ने एंटोनियो नूसा और एलेक्सांडर सोरलोथ को बाहर बुलाकर आंद्रेस शेल्डेरुप और ऑस्कर बॉब को मैदान पर उतारा। जवाब में ब्राज़ील ने भी माथियूस कुन्हा की जगह युवा एंड्रिक को मौका दिया।

समय आगे बढ़ता गया और मुकाबला पहले से कहीं अधिक खुलने लगा। दोनों टीमें जीत की तलाश में लगातार जोखिम उठा रही थीं। ब्राज़ील गेंद पर अधिक नियंत्रण रख रही थी, जबकि नॉर्वे हर जवाबी हमले में खतरनाक दिख रही थी।
फिर भी घड़ी जब पैंसठवें मिनट तक पहुँची, स्कोर अब भी शून्य पर अटका हुआ था।

मैदान पर ऐसे खिलाड़ी मौजूद थे जो एक स्पर्श, एक दौड़ या एक शॉट से पूरे मुकाबले की कहानी बदल सकते थे। लेकिन फुटबॉल कभी-कभी धैर्य की भी परीक्षा लेता है; और इस रात, गोल अब भी दोनों टीमों की पहुँच से दूर था।

मुकाबले का अड़सठवाँ मिनट।

अचानक पूरा न्यू जर्सी स्टेडियम शोर से भर उठता है।

टचलाइन के पास एक परिचित चेहरा वार्म-अप समाप्त कर चौथे अधिकारी के साथ खड़ा था। वह खिलाड़ी, जिसे देखने के लिए करोड़ों लोग अब भी हर बार टीवी स्क्रीन के सामने बैठ जाते हैं।

एक गोल की तलाश में कोच कार्लो एन्सेलोटी आखिरकार अपना सबसे बड़ा दाँव चलते हैं।

गेब्रियल मार्टिनेली की जगह नेमार जूनियर मैदान पर उतरते हैं।

जैसे ही वह हरी घास पर कदम रखते हैं, स्टेडियम तालियों और नारों से गूँज उठता है। यह केवल एक बदलाव नहीं था; यह ब्राज़ील की आख़िरी उम्मीद थी।

लेकिन समय किसी का इंतज़ार नहीं करता।

पचहत्तरवें मिनट तक स्कोरबोर्ड अब भी 0-0 पर स्थिर था। हर बीतता सेकंड दोनों देशों के समर्थकों की धड़कनें और तेज़ कर रहा था। अब किसी भी टीम के लिए सबसे बड़ा भय एक लेट गोल था—वह गोल जो पूरे अभियान की दिशा बदल देता है।

और फिर…

उन्नासीवें मिनट में वही हुआ जिसकी कल्पना बहुत कम लोगों ने की थी।

बाएँ फ्लैंक पर स्थानापन्न खिलाड़ी आंद्रेस शेल्डेरुप गेंद लेकर आगे बढ़ते हैं। बॉक्स के किनारे पहुँचकर वह एक सटीक पास अर्लिंग हालांड की ओर बढ़ाते हैं। हालांड अपने सामने खड़े ब्राज़ीली डिफेंडर को एक झटके में छकाते हैं, संतुलन बनाते हैं और अगले ही पल दाएँ पैर से गोल की दिशा में विस्फोटक प्रहार करते हैं।

एलिसन बेकर पूरी ताकत से डाइव लगाते हैं। लेकिन इस बार उनकी उँगलियाँ गेंद तक नहीं पहुँच पातीं।

गेंद जाल से टकराती है।

गोल।

नॉर्वे 1, ब्राज़ील 0।

कुछ क्षण पहले तक पीले रंग में डूबा न्यू जर्सी स्टेडियम अचानक मौन हो चुका था। यह केवल एक गोल नहीं था; यह उस आत्मविश्वास पर पहला गहरा प्रहार था जिसके सहारे ब्राज़ील मैदान में उतरी थी।

ब्राज़ील संभल भी नहीं पाई थी कि दस मिनट बाद नॉर्वे ने दूसरी चोट कर दी।

एक बार फिर बाएँ किनारे से आंद्रेस शेल्डेरुप ने शानदार क्रॉस उठाया। एक बार फिर गेंद अर्लिंग हालांड तक पहुँची। और एक बार फिर विश्व फुटबॉल के इस घातक स्ट्राइकर ने एलिसन बेकर को छकाते हुए गेंद को गोलपोस्ट के भीतर पहुँचा दिया।

नॉर्वे 2, ब्राज़ील 0।

ब्राज़ील के खिलाड़ियों के कंधे झुक चुके थे।

दर्शक-दीर्घा में बैठे लाखों समर्थकों के चेहरों से रंग उतर चुका था। दस मिनट पहले तक जो मुकाबला बराबरी पर था, वह अचानक ब्राज़ील की पकड़ से फिसल चुका था। निगाहें बार-बार डगआउट की ओर उठ रही थीं, लेकिन कार्लो एन्सेलोटी के पास भी इस तूफ़ान का कोई तत्काल उत्तर नहीं था।

फिर भी ब्राज़ील ने हार स्वीकार नहीं की।

हर आक्रमण के साथ वह वापसी की उम्मीद तलाशती रही। दूसरी ओर नॉर्वे अब अपने प्रत्येक खिलाड़ी के साथ केवल एक लक्ष्य लेकर खेल रही थी; किसी भी कीमत पर यह बढ़त बचानी है।

इंजरी टाइम चल रहा था।

90+8वें मिनट में नॉर्वे से एक चूक हो जाती है। अपने ही पेनाल्टी बॉक्स में किया गया फाउल रेफ़री इस्माइल एलफ़ात की नज़र से नहीं बचता और ब्राज़ील को पेनाल्टी मिल जाती है।

अब गेंद के पीछे खड़े थे नेमार जूनियर।

कंधों पर करोड़ों उम्मीदों का भार था, लेकिन यह भार उनके लिए नया नहीं था।

नेमार लंबी साँस लेते हैं।

दौड़ते हैं।

और सटीक प्रहार के साथ गेंद को गोलपोस्ट के भीतर पहुँचा देते हैं।

स्कोर अब 2-1 था।

उम्मीद अभी पूरी तरह मरी नहीं थी।

लेकिन फुटबॉल कभी-कभी आशा को केवल कुछ क्षणों का ही समय देता है।

दो मिनट बाद रेफ़री इस्माइल एलफ़ात अंतिम सीटी बजा देते हैं।

और उसी सीटी के साथ केवल ब्राज़ील का विश्व कप अभियान समाप्त नहीं होता।

उसके साथ समाप्त होता है एक ऐसे राजकुमार का अंतरराष्ट्रीय अध्याय भी, जो अपार प्रतिभा के बावजूद कभी विश्व फुटबॉल का ताज अपने सिर पर नहीं सजा सका।

कई प्रशंसकों को यह एहसास था कि शायद वे नेमार को आख़िरी बार विश्व कप में देख रहे हैं।

उनकी आँखें नम थीं।

ब्राज़ील के खिलाड़ी रो रहे थे।

दर्शक-दीर्घा में बैठे हज़ारों समर्थकों की आँखें भीग चुकी थीं।

उधर दूसरी ओर नॉर्वे इतिहास रच रही थी।

खिलाड़ी अपने समर्थकों के साथ विजय का उत्सव मना रहे थे। स्टेडियम में मौजूद अल्फ-इंगे हालांड अपने पुत्र को निहार रहे थे। जो सपना उनकी पीढ़ी पूरा नहीं कर सकी थी, उसे आज अर्लिंग हालांड ने साकार कर दिया था।

नॉर्वे ने पाँच बार की विश्व चैंपियन ब्राज़ील को पराजित कर क्वार्टर फ़ाइनल में प्रवेश कर लिया था।

यह केवल एक जीत नहीं थी; यह नॉर्वेजियन फुटबॉल के इतिहास में स्वर्णाक्षरों से लिखी जाने वाली रात थी।

ओस्लो की सड़कों पर उत्सव शुरू हो चुका था।

स्टेडियम में वाइकिंग क्लैप्स की गूँज दूर तक सुनाई दे रही थी।

मैच के बाद कोच स्टाले सोलबाक्केन ने कहा; यह नॉर्वेजियन फुटबॉल के इतिहास की सबसे महान रात है।

उधर अर्लिंग हालांड इस टूर्नामेंट में अपने सातवें गोल के साथ अब गोल्डन बूट की दौड़ में सबसे आगे निकल चुके थे।

मैच से पहले अधिकांश विशेषज्ञों ने ब्राज़ील की सहज जीत की भविष्यवाणी की थी। किसी ने 2-1 कहा, किसी ने 3-0।

लेकिन फुटबॉल भविष्यवाणियों से नहीं, मैदान पर लिखी गई कहानियों से याद रखा जाता है।

अपने सबसे घातक योद्धा अर्लिंग हालांड के दो गोल, ओर्हान नायलांड के अद्भुत बचाव और अंतिम क्षण तक अडिग रहे सामूहिक जज़्बे के दम पर नॉर्वे ने न केवल ब्राज़ील को पराजित किया, बल्कि विश्व फुटबॉल को यह भी याद दिला दिया कि साहस, अनुशासन और विश्वास जब एक साथ मैदान पर उतरते हैं, तब दिग्गज भी धराशायी हो जाते हैं।

लेकिन यह दिन अभी समाप्त नहीं हुआ था।

कुछ ही घंटों बाद, भारतीय समयानुसार सुबह साढ़े छह बजे, विश्व फुटबॉल की निगाहें मेक्सिको सिटी के ऐतिहासिक ऐज़्टेका स्टेडियम पर टिक गईं।

यहाँ मेज़बान मेक्सिको के सामने थी यूरोप की सबसे प्रबल दावेदारों में गिनी जाने वाली इंग्लैंड।

दर्शक-दीर्घा गहरे हरे रंग की जर्सियों से पट चुकी थी। हजारों मेक्सिकन समर्थक अपने पारंपरिक गीतों और नारों के साथ अपनी टीम का उत्साह बढ़ा रहे थे।

ऐज़्टेका; वह दुर्ग जिसने दशकों तक मेक्सिकन फुटबॉल की सबसे बड़ी जीतों का साक्षी बनकर इतिहास रचा है, आज एक और अविस्मरणीय अध्याय अपने भीतर दर्ज करने के लिए तैयार खड़ा था।

अब बारी थी दिन के दूसरे महासंग्राम की।

ऐज़्टेका स्टेडियम में अपनी पारंपरिक गहरे हरे रंग की जर्सी पहने मेक्सिको मैदान पर उतरती है। दूसरी ओर कप्तान हैरी केन के नेतृत्व में इंग्लैंड की ‘थ्री लायन्स’ पूरे आत्मविश्वास के साथ इतिहास की एक और सीढ़ी चढ़ने को तैयार थी।

रेफ़री की पहली सीटी बजती है।

और मुकाबला शुरू होते ही तनाव अपने चरम पर पहुँच जाता है।

पहले ही मिनट में इंग्लैंड के मिडफ़ील्डर डेक्लन राइस को पीला कार्ड दिखा दिया जाता है। तीसरे मिनट में राउल जिमिनेज़ इंग्लैंड के गोल पर पहला गंभीर हमला बोल देते हैं।

शुरुआती क्षणों से ही मेक्सिको ने इंग्लैंड की कमर कस दी थी।

गेंद पर नियंत्रण, तेज़ पासिंग और आक्रामक प्रेसिंग; हर विभाग में मेक्सिको इंग्लैंड से एक कदम आगे दिखाई दे रही थी। इंग्लिश खिलाड़ियों के पास गेंद पहुँचती भी तो अगले ही क्षण हरे रंग की जर्सियाँ उन्हें चारों ओर से घेर लेतीं और गेंद वापस अपने कब्ज़े में ले लेतीं।

ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा मुकाबला इंग्लैंड के आधे हिस्से में सिमट गया हो।

राउल जिमिनेज़ ने एक और शानदार अवसर बनाया, लेकिन इंग्लिश डिफेंस ने समय रहते ख़तरा टाल दिया। कुछ ही देर बाद गिल्बर्टो मोरा ने भी गोल की दिशा में दमदार प्रयास किया। पहले हाइड्रेशन ब्रेक तक इंग्लैंड किसी तरह स्कोरलाइन को 0-0 पर रोकने में सफल रही।

ब्रेक के बाद इंग्लैंड ने अपनी रणनीति बदली।

अब उनका लक्ष्य गेंद पर नियंत्रण नहीं, बल्कि जवाबी हमले थे। वे धैर्य के साथ मेक्सिको को आगे आने दे रहे थे ताकि गेंद छीनते ही बिजली की गति से पलटवार किया जा सके।

यही बदलाव आगे चलकर निर्णायक साबित होने वाला था।

एंथनी गॉर्डन ने एक तेज़ आक्रमण रचा, लेकिन उनका प्रयास लक्ष्य से बाहर चला गया। दूसरी ओर मेक्सिको भी बिना किसी भय के लगातार हमले करती रही।

फिर अचानक…

छत्तीसवें मिनट में बुकायो साका के सटीक पास पर ज्यूड बेलिंघम बॉक्स के भीतर पहुँचते हैं और गेंद को गोल में बदल देते हैं।

इंग्लैंड 1, मेक्सिको 0।

मेक्सिको अभी इस झटके से उबर भी नहीं पाई थी कि दो मिनट बाद बेलिंघम ने फिर वही कहानी दोहरा दी।

एक और शानदार मूव।

एक और सटीक फ़िनिश।

और देखते ही देखते स्कोर 2-0 हो चुका था।

जो टीम कुछ क्षण पहले तक पूरे मैच पर हावी थी, वह अचानक बैकफुट पर पहुँच गई थी। ऐज़्टेका की गूँज कुछ पल के लिए थम-सी गई।

लेकिन मेक्सिको ने हार मानना नहीं सीखा था।

सिर्फ पाँच मिनट बाद हूलियान क्विन्योनेस ने हवा में उछलती गेंद पर अद्भुत वॉली लगाई और इंग्लैंड की बढ़त आधी कर दी।

स्कोर 2-1।

ऐज़्टेका एक बार फिर जीवित हो उठा।

45+1वें मिनट में राउल जिमिनेज़ ने दूर से जोरदार प्रहार किया, लेकिन गेंद लक्ष्य से भटक गई। कुछ ही देर बाद उनका हेडर भी गोल में तब्दील नहीं हो सका। फिर एक कॉर्नर मिला, फिर एक अवसर बना, लेकिन बराबरी का गोल नहीं आया।

पहला हाफ़ इंग्लैंड की 2-1 की बढ़त के साथ समाप्त हुआ, मगर स्कोरलाइन यह नहीं बता पा रही थी कि मेक्सिको ने इस मुकाबले में कितनी ऊर्जा और साहस झोंक दिया था।

दूसरे हाफ़ का आगाज़ हुआ।

मेक्सिको ने फिर वही आक्रामक लय पकड़ ली।

और चौवनवें मिनट में मुकाबले का सबसे बड़ा मोड़ सामने आया।

एक ख़तरनाक टैकल के लिए जारेल क्वान्सा को सीधा रेड कार्ड दिखा दिया गया।

अब इंग्लैंड को शेष मुकाबला केवल दस खिलाड़ियों के साथ खेलना था।

मौका देखकर मेक्सिको ने दबाव और बढ़ा दिया। हूलियान क्विन्योनेस ने फिर गोल की ओर हमला बोला, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। उधर इंग्लैंड के कोच ने तुरंत सामरिक बदलाव करते हुए एक आक्रमणकारी खिलाड़ी को बाहर बुलाकर अतिरिक्त डिफेंडर मैदान पर उतार दिया।

लेकिन ठीक उसी समय मेक्सिको से एक ऐसी भूल हुई जिसकी कीमत उन्हें बहुत भारी पड़ने वाली थी।

सत्तावनवें मिनट में अपने ही पेनाल्टी बॉक्स के भीतर किया गया अनावश्यक फाउल इंग्लैंड के पक्ष में पेनाल्टी में बदल गया।

कप्तान हैरी केन गेंद के पीछे खड़े थे।

उन्होंने बिना कोई गलती किए गेंद को गोल में पहुँचा दिया।

इंग्लैंड 3, मेक्सिको 1।

जो संख्यात्मक बढ़त रेड कार्ड के कारण मेक्सिको को मिली थी, वह एक पल की असावधानी में लगभग निष्प्रभावी हो चुकी थी।

फिर भी मेक्सिको झुकी नहीं।

साठ मिनट के बाद एक बार फिर उसने लगातार आक्रमणों की झड़ी लगा दी।

और अड़सठवें मिनट में इस बार इंग्लैंड से चूक हुई।

हैरी केन अपने ही पेनाल्टी बॉक्स में मेक्सिको के खिलाड़ी को गिरा बैठते हैं और रेफ़री बिना हिचकिचाहट पेनाल्टी स्पॉट की ओर इशारा कर देते हैं।

राउल जिमिनेज़ आगे बढ़ते हैं।

एक शांत, सटीक और आत्मविश्वास से भरा प्रहार।

गेंद जाल में समा जाती है।

स्कोर अब 3-2 था।

ऐज़्टेका फिर गरज उठा।

अब दबाव पूरी तरह इंग्लैंड के कंधों पर था।

अगले बीस मिनट विश्व कप फुटबॉल के सबसे रोमांचक क्षणों में बदल गए।

मेक्सिको लगातार आक्रमण करती रही। हर पास, हर क्रॉस और हर शॉट के साथ स्टेडियम साँसें रोक लेता।

लेकिन दूसरी ओर जॉर्डन पिकफ़र्ड मानो दीवार बनकर खड़े थे।

उन्होंने एक के बाद एक कई ऐसे बचाव किए जो लगभग असंभव प्रतीत हो रहे थे।

दस खिलाड़ियों के साथ खेल रही इंग्लैंड ने अंतिम सीटी तक अनुशासन नहीं छोड़ा।

और अंततः वही अनुशासन उन्हें क्वार्टर फ़ाइनल का टिकट दिला गया।

इंग्लैंड 3, मेक्सिको 2।

मेक्सिको हार चुकी थी।

लेकिन यह उन हारों में से नहीं थी जिनमें सम्मान छिन जाता है।

वे लड़कर गिरे थे।

और शायद इसी कारण पूरे ऐज़्टेका ने अंतिम सीटी के बाद भी अपने खिलाड़ियों का सिर झुकने नहीं दिया।

विश्व कप के इतिहास में कुछ मुकाबले केवल परिणामों से नहीं, बल्कि अपने साहस, गति और भावनाओं से अमर हो जाते हैं।

यह भी उन्हीं में से एक था।

ज्यूड बेलिंघम के दो मिनट में आए दो गोल निर्णायक साबित हुए और ‘थ्री लायन्स’ क्वार्टर फ़ाइनल में पहुँच गई।

अब निगाहें अगले महासंग्राम पर टिक चुकी हैं।

आज रात डलास स्टेडियम में यूरोपीय फुटबॉल की दो महाशक्तियाँ; पुर्तगाल और स्पेन आमने-सामने होंगी।

यदि स्पेन विजयी होती है, तो संभव है कि फुटबॉल प्रेमी ठीक वैसे ही एक युग का अंत देखें, जैसा उन्होंने ब्राज़ील की हार के साथ नेमार के विदाई क्षणों में देखा।

क्या आज क्रिस्टियानो रोनाल्डो भी राष्ट्रीय टीम की जर्सी में अपना अंतिम मुकाबला खेलेंगे?

या फिर जीत के लिए सदैव भूखे रहने वाले रोनाल्डो एक बार फिर स्पेन जैसी दिग्गज टीम को टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखाकर अपने सफ़र को आगे बढ़ाएँगे?

याद रहे, स्पेन मौजूदा यूरोपीय चैंपियन है, लेकिन पुर्तगाल ने इसी स्पेन को यूईएफ़ए नेशन्स लीग के फ़ाइनल में पेनाल्टी शूटआउट में हराकर ट्रॉफी अपने नाम की थी।

इतिहास, प्रतिद्वंद्विता और दिग्गजों का यह टकराव; हर मायने में एक फ़ाइनल जैसा होने वाला है।

इसके बाद कल सुबह साढ़े पाँच बजे सिएटल में मेज़बान अमेरिका का सामना शानदार लय में चल रही बेल्जियम से होगा।

लेकिन उससे पहले…

पूरी दुनिया की निगाहें आज रात साढ़े बारह बजे डलास पर टिकी होंगी।

क्या यह क्रिस्टियानो रोनाल्डो की आख़िरी रात होगी?

या फिर एक बार फिर इतिहास उनके पक्ष में झुक जाएगा?

इस प्रश्न का उत्तर देगा केवल मैदान। यही रात अंतिम। यही रात भारी।

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गौरव बडोला
गौरव बडोला
दिन में दिहाड़ी करता हूं, रात को कोरे कागज़ पर अपने ख्वाबों की दुनिया बुनता हूं। फुटबॉल और साहित्य को जीता हूं।

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