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फीफा विश्व कप 2026: मिकेल मेरीनो के जादुई गोल से स्पेन क्वार्टर फाइनल में, पुर्तगाल की हार के साथ रोनाल्डो का सपना टूटा; अब मेस्सी और सालाह में टक्कर

अर्जेंटीना के लिए लाउतारो मार्टिनेज और हूलियन अल्वारेज़ का फॉर्म में लौटना बेहद जरूरी है ताकि वे कप्तान लियोनेल मेस्सी का साथ दे सकें। वहीं वैंकूवर में एक और दिलचस्प मुकाबले में स्विट्जरलैंड का सामना कोलंबिया से होगा।

नासिर आज़मी का एक बेहतरीन शेर है जो मेरे दिल के बेहद करीब है।

दाएम आबाद रहेगी दुनिया

हम न होंगे कोई हम सा होगा।

नासिर साहब की यह बात सही तो है परन्तु हर किसी के जीवन में कुछ लोग ऐसे जरूर होते हैं जिनके जाने के बाद उनकी कमी कभी भी पूरी नहीं हो पाती। खेल की दुनिया में भी ऐसे कुछ खिलाड़ी हुए हैं जो खेलप्रेमियों की स्मृतियों में हमेशा के लिए जिंदा रहते हैं। फुटबॉल प्रेमियों के लिए आज भी पेले, माराडोना, योहान क्रुएफ, प्लातीनी आदि खिलाड़ी दिलों में बसते हैं। ऐसे ही कई सितारा खिलाड़ियों को इस विश्व कप में हम सब एक अंतिम बार खेलते हुए देख रहे थे। लूका मॉद्रिच, नेमार, गुईलेर्मो ओचोआ आदि ऐसे ही खिलाड़ी हैं जो अब आगे कभी हमें फुटबॉल खेलते हुए नहीं दिखाई देंगे। यह विश्व कप इसलिए भी कई मायनों में खास है।

खैर, बात करते हैं बीती रात (6 जुलाई 2026) हुए मुकाबलों की।

बीती रात निर्धारित समय पर भारतीय समयानुसार साढ़े बारह बजे इस राउंड का सबसे ज्यादा चर्चा में रहा मुकाबला अनुभवी रेफरी एंथोनी टेलर की सीटी बजते ही डलास स्टेडियम में शुरू होता है। मौजूदा यूरो चैंपियन स्पेन का सामना युएफा नेशन्स लीग के फाइनल में पेनाल्टी शूटआउट में उन्हें हराकर ट्राफी जीतने वाली पुर्तगाल की टीम से था।

दोनों ही टीमें काफी दमदार खिलाड़ियों की खेप लेकर इस मैच में उतरी थीं। पुर्तगाल का मिडफील्ड तो खैर फिलहाल संपूर्ण जगत में सब से खास है ही। मिडफील्ड में ब्रुनो फर्नानदेज़ के संग मौजूद थे पीएसजी के साथ लगातार दो चैंपियन्स लीग खिताब जीत चुके विटिन्हा और चौबीस वर्षीय सनसनीखेज खिलाड़ी ज़ाओ नेवेज़। अटैक का दारोमदार था होआओ फेलिक्स, क्रिस्टियानो व पेड्रो नेटो पर। वहीं बेंच पर लियाओ, बर्नार्डो सिल्वा, कोंकेकाओ, दिओगो दालो, ट्रिंकाओ, नूनेस व नेवेज़ जैसे अनुभवी खिलाड़ी मौजूद थे, जो जीत के लिए भूखे हैं।

वहीं कोच लुई डे ला फुएन्ते ने 4-1-2-3 की फॉर्मेशन में अपनी टीम को मैदान पर उतारा। मिडफील्ड में रोड्री के संग पेड्री व दानी ओल्मो मौजूद थे। आगे अटैकिंग लाइन में सेंट्रल फॉरवर्ड ओयारजाबाल का साथ देने के लिए विंगर्स के रूप में एलेक्स बाएना व लामीन यमाल को मैदान पर उतारा गया, जबकि नीको, फेराँ तोरे, गावी, मिकेल मेरीनो, विक्टर मुनोज़, फैबियान रुईज़ जैसे मजबूत खिलाड़ी बेंच पर मौजूद थे। हालाँकि चोट से उबर रहे नीको को मैदान में देखने की उम्मीदें कम ही थीं।

दोनों ही टीमें मैदान में आती हैं। पुर्तगाल की टीम अपनी गहरी लाल रंग की जर्सी में मैदान पर उतरी थी। वहीं स्पेनिश टीम ने अपनी क्रीम/सफेद रंग की बेहद प्यारी अवे जर्सी पहनी थी। रेफरी से इशारा मिलते ही मैच शुरू होता है।

शुरुआती क्षणों से ही स्पेनिश टीम पुर्तगाल पर शिकंजा कस देती है। तीसरे मिनट में ही मिकेल ओयारजाबाल पुर्तगाली गोलकीपर की परिक्षा लेते हैं। मगर गेंद निशाने से दूर रह जाती है। स्पेन का प्रयास था कि मैच के शुरुआती पलों से ही पुर्तगाली मिडफील्ड का दम घोंट दिया जाए जिसके चलते वह अपनी अटैकिंग लाइन के खिलाड़ियों तक गेंद पहुँचा ही न पाएँ। वह काफी हद तक इसमें सफल होते भी नजर आते हैं। मगर बारहवें मिनट में क्रिस्टियानो रोनाल्डो स्पेनिश पोस्ट पर एक जानदार किक लगाते हैं। मगर स्पेनिश गोलकीपर यह मजबूत शॉट रोक लेते हैं। जवाबी कार्रवाई करते हुए लामीन यमाल पुर्तगाली गोलपोस्ट पर एक हमला करते हैं, मगर स्कोर अब भी 0-0 ही रहता है।

पहले हाइड्रेशन ब्रेक तक स्कोर बराबरी पर ही रहता है। शुरुआती दबाव को बेहतरीन तरीके से झेलकर पुर्तगाल अब मैच में अपना खेल खेलने लगे थे। होआओ फेलिक्स व नूनो मेंडेस लगातार बाईं ओर से स्पेन पर हमले करने लगते हैं। यह दोनों ही खिलाड़ी मिलकर लामीन यमाल को बांध कर रख देते हैं। वह उन्हें अपने गोलपोस्ट की ओर बढ़ने ही नहीं दे रहे थे।

स्पेनिश लेफ्ट बैक पेड्रो पोर्रो गोल लगाने का एक जोरदार प्रयास करते हैं मगर उन्हें सफलता नहीं मिलती। एलेक्स बाएना मैदान की बांई फ्लैंक से स्पेन के लिए मौके बनाने के प्रयास जरूर कर रहे थे मगर अब पुर्तगाल स्पेनिश मिडफील्ड को बिल्कुल बाँध कर रखे हुए थी। इकतालीसवें मिनट में नूनो मेंडेस एकबार फिर एक बेहद शानदार किक लगा कर गोल स्कोर करने का प्रयास करते हैं मगर गेंद स्पेनिश डिफेंडर से छिटक कर मैदान से बाहर चली जाती है। हाफ टाइम की समाप्ति पर 0-0 के स्कोर पर दोनों टीमें डगआउट की दिशा में बढ़ती हैं।

उम्मीदों के विपरीत अब तक यह मैच बेहद नीरस रहा था। दोनों ही टीमें कोई खास मूव्स बनाने में सफलता हासिल नहीं कर सकी थीं। खैर, दूसरे हाफ का खेल शुरू होता है। दोनों टीमें मैदान में वापस उतरती हैं। रेफरी सीटी बजा कर खेल आगे बढ़ाते हैं। मैच के चौवनवें मिनट में कुछ ऐसा होता है जो आगे के मैच का रुख मोड़ सकता था। वर्तमान समय में विश्व के सबसे शानदार लैफ्ट बैक पुर्तगाल के नूनो मेंडेस दर्द से कराहते नजर आते हैं। उनको हैमस्ट्रिंग में खिंचाव के चलते मैदान से बाहर जाना पड़ा। नेल्सन सेमेडो चोटिल नूनो मेंडेस की जगह मैदान के भीतर लाए जाते हैं। खेल आगे बढ़ता है।

59वें मिनट में क्रिस्टियानो पुर्तगाल के लिए जबकि एक मिनट पश्चात ही स्पेन के लिए पेड्री विरोधी गोलपोस्ट पर एक शॉट लगाते हैं। दोनों ही खिलाड़ी गेंद को निशाने पर रखने में असफल रहते हैं। तुरंत ही लामीन यमाल भी एक शॉट लेते हैं, मगर यह प्रयास भी बचा लिया जाता है। कुछ ही देर में एलेक्स बाएना पुर्तगाली गोलपोस्ट पर एक शॉट लेते हैं, मगर वह गोल स्कोर नहीं कर पाते। खेल यूँ ही मंद गति से आगे बढ़ता रहता है। पुर्तगाल की तुलना में स्पेन ज्यादा अटैक करती नजर आ रही थी मगर टीम में एक अदद सेंट्रल फॉरवर्ड की कमी साफ खलती नजर आ रही थी। यह कैसा अजीब संयोग है कि स्पेन की माटी अब डेविड विया व फर्नान्दो तोरेस जैसे खिलाड़ी पैदा नहीं कर पा रही है।

70वें मिनट में पुर्तगाल के कोच दो परिवर्तन करते हुए मैदान में नवीन ऊर्जा का प्रवाह करने का प्रयास करते हैं।

पांच मिनट बाद ही स्पेनिश कोच लुई डे ला फुएन्ते भी एलेक्स बाएना की जगह फेराँ तोरेस को मैदान में उतारते हैं।

80 मिनट की समाप्ति पर भी दोनों ही टीमें गोल दागने में असफल रही थीं। अब यह मैच एक्स्ट्रा-टाइम की ओर बढ़ता दिख रहा था। पुर्तगाल के कोच रॉबर्टो मार्टीनेज़ कोंकेकाओ व बर्नार्डो सिल्वा को मैदान में उतारते हैं। कोंकेकाओ इस पूरे टूर्नामेंट में हमेशा बेंच से मैदान में आकर काफी असरकारी नजर आए थे। आज फिर एक बार तमाम समर्थकों को उनसे उम्मीद थी कि वह टीम के लिए एक घातक मौका बनाएं।

85वें मिनट तक भी जब स्कोर 0-0 पर ही अटका था और मैच एक्स्ट्रा टाइम की ओर बढ़ रहा था तो स्पेन के कोच पेड्री व दानी ओल्मो को बाहर बुलाकर फैबियान रुईज़ व मिकेल मेरीनो रुपी दो अनुभवी मिडफील्डरों को मैदान के भीतर लाते हैं। उनका यह कदम एक बेहद शानदार सामरिक चातुर्य की अनुभूति कराता है।

90+1 मिनट में फेराँ तोरेस एक मेस्सीस्क्यू ( मेस्सी की भाँति) अंदाज में तीन-चार पुर्तगाली डिफेंडरों को चकमा देते हुए गेंद को साथी खिलाड़ी मिकेल मेरीनो की ओर बढ़ाते हैं। मिकेल गेंद को बिना कोई ग़लती किए बेहतरीन तरीके से जाल के भीतर पहुँचा देते हैं। अंतिम क्षणों में स्पेन उनके इस गोल के दम पर करो या मरो वाले इस मैच में अहम बढ़त ले लेती है। कुछ ही पलों में मैच समाप्त हो जाता है। स्पेन क्वार्टर फाइनल में जगह बना लेती है। क्रिस्टियानो रोनाल्डो का विश्व कप जीतने का ख्वाब टूट जाता है। पूरा स्टेडियम लाल रंग के लहराते झंडों से पट जाता है। एस्पाना-एस्पाना के नारे लगाते स्पेनिश समर्थकों की खुशी में सारा स्टेडियम डूब गया था। मिकेल मेरीनो द्वारा अंतिम क्षणों में दागा गया यह गोल इस विश्व कप के मैचों में किसी टीम द्वारा अंतिम घड़ी में दागा गया दसवाँ गोल था।

एक मिडफील्डर होने के बावजूद मिकेल मेरीनो ने यूरो कप व यूएफा नेशन्स लीग के सेमीफाइनल मुकाबलों में भी स्पेन के लिए गोल स्कोर किए थे। और आज तो उनके इस ख़ास गोल के चलते ही ला रोजा आज पुर्तगाल व क्रिस्टियानो रोनाल्डो को घर की राह दिखा कर क्वार्टर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर चुकी थी। वह हमेशा ही एक बेहद क्लच खिलाड़ी रहे हैं जो बेंच से आकर भी स्पेन के लिए मैच बदल देते हैं।

इसके पश्चात अगला मैच आज सुबह साढ़े पाँच बजे सिएटल स्टेडियम में बेहतरीन फॉर्म में चल रही मेजबान अमेरिकी टीम बनाम बेल्जियम का था। यह भी एक रोचक मुकाबला होगा। इस मैच से पहले इस बात की चर्चा चल रही थी कि आखिर क्यों डोनाल्ड ट्रम्प के कहने पर फीफा ने पिछले मैच में रेड कार्ड पाने वाले अमेरिकी सेंट्रल फॉरवर्ड फोलारिन बालोगन का बैन हटा दिया था। बेल्जियम पिछले मैच में बेहद शानदार तरीके से लड़ते हुए अंतिम क्षणों में स्कोर किए गोलों की बदौलत यहाँ पहुँची थी। अमेरिका का अबतक का सफर बेहद शानदार रहा था। उन्हें अपने घरेलू समर्थकों का साथ भी मिलने जा रहा था। हजारों दर्शक आज अपनी टीम का हौसला बढ़ाने हेतु सीएटल स्टेडियम में मौजूद थे। खैर दोनों ही टीमें मैदान में उतरती हैं और खेल शुरू होता है।

यह मैच बेहद एकतरफा रहता है। बेल्जियम की टीम ने अपने अनुभव के दम पर अमेरिकी टीम को मैदान में कुछ करने ही नहीं दिया। बेल्जियम मैच के शुरुआती पलों से ही विरोधी गोलपोस्ट पर हमले करती रहती है। कुल पन्द्रह शॉट लगाए जाते हैं जिसमें से सात निशाने पर रहे। इसके चलते चार्ल्स डि किटिलीरी के दो व वानाकेन और लुकाकू के एक एक गोल के बदौलत बेल्जियम ने शानदार अंदाज में 4-1 से यह मैच जीत लिया और अब क्वार्टर फाइनल में उनका सामना होगा स्पेन की टीम से।

और आगे आज रात फीफा विश्व कप के गत विजेता अटलांटा स्टेडियम में अपने राउंड ऑफ 16 मुकाबले में मिस्र का सामना करने उतरेंगे। गौरतलब है कि मिस्र की ओर से विपक्षी दल को उकसाने हेतु कुछ दिनों से बयानबाजी भी चल रही है। हाल ही में प्रेस-वार्ता में उनके असिस्टेंट कोच ने बयान दिया था कि क्या हुआ अगर उनके पास मेस्सी है। हमारे पास मोहम्मद सालाह है। हम मेस्सी को नहीं देखते। हम तो अपने खिलाड़ियों को निर्देश देते हैं कि वो मैदान में जाएँ और बिन यह देखें कि उनके सम्मुख कौन खड़ा हे, अपना खेल खेलें। और हमारे पास कुल छब्बीस खिलाड़ी हैं, जो सभी हमारी नज़रों में हमारे लिए मेस्सी हैं।

ऐसे ही मेस्सी को लेकर कई और बयान भी किये गए। इसके चलते इस मैच से पूर्व माहौल गरमा गया है। अर्जेंटीना की टीम अपने पिछले मुकाबले में काबो वर्दे के खिलाड़ियों के सामने संघर्ष करती नजर आई थी। काबो वर्दे ने अपनी जिद से सारी दुनिया को बतला दिया था कि इस टीम की भी कई कमियाँ हैं और इस टीम को भी हराया जा सकता है। कहते हैं वीर भोग्य वसुंधरा।

आज रात एक दफा फिर जंगल के राजा को फिर साबित करना होगा कि आखिर क्यों वो इस जंगल का राजा है। आज एक बार फिर लियोनेल मेस्सी का जादू हमें देखने को मिलेगा। इससे पहले कि वो सदैव के लिए इस खेल को अलविदा कह दें, हमें उनको खेलते हुए देखने का कोई भी मौका हाथों से जाने नहीं देना चाहिए। मगर मिस्र भी निश्चित ही बुलंद हौसलों के संग मैदान में उतरेगी।

मोहम्मद सालाह आज रात मैदान में बेहतरीन प्रदर्शन कर निश्चित ही अपने देश को खुशियाँ देना चाहेंगे। अर्जेंटीना का किसी भी उलटफेर का शिकार होने से बचने हेतु यह जरूरी है कि अबतक खामोश रहे उसके दो स्टार फॉर्वर्ड लाउतारो मार्टिनेज व हूलियन अल्वारेज़ जल्द से जल्द फॉर्म में लौटें और फॉरवर्ड लाइन में लियोनेल मेस्सी का अच्छा साथ निभाएं।

इसके बाद अगला मैच देर रात भारतीय समयानुसार रात डेढ़ बजे वैंकूवर में खेला जाना है। इस मैच में स्विट्जरलैंड का सामना कोलंबिया की टीम से होगा। यह दोनों ही टीमें अलग विचारधारा के साथ फुटबॉल खेलती नजर आती हैं लेकिन दोनों ही टीमों ने अबतक इस विश्व कप में अच्छा प्रदर्शन कर अपने समर्थकों का दिल जीता है। यहाँ कोई भी एक टीम फेवरेट नहीं होगी, जो कल रात नब्ज़ पर काबू रखते हुए अच्छा खेल जाएगा, वह क्वार्टर फाइनल में जगह बना लेगा।

कल हमने नेमार को फुटबॉल की दुनिया को अलविदा कहते देखा। हमारी पीढ़ी के जो लोग फुटबॉल को लेकर पागलपन दिलों में लिए फिरते हैं, उनका 1998 या 2002 विश्व कप के दौरान फुटबॉल से पहला राब्ता हुआ था। 2002 के विश्व विजेता ब्राजीली टीम को जिसने अपने चिर-परिचित अंदाज में खेलते देखा था वह फिर किसी और टीम से दिल लगा ही नहीं सकता था। उनका खेल बेहद खूबसूरत हुआ करता था। उसमें लातिनी जादू और स्ट्रीट स्टाइल फुटबॉल की महक हुआ करती थी। नेमार उस अंदाज में खेलने वाले अंतिम खिलाड़ी थे।

वैश्विक फुटबॉल ने जब बाजारवाद के आगे झुक कर यूरोपीयन चेहरे को अपना लिया, तब ही से ब्राजीली टीमें भी अपना सांबा भूल बैठीं। अफसोस अब सांतोस के हरे मैदानों से कोई नेमार निकल कर नहीं आएगा। वह अपनी तरीके के आखिरी खिलाड़ी थे। उनके साथ फुटबॉल का लातिनी जादू भी अब फिर कभी देखने के लिए नहीं मिलेगा।

कौन जाने क्या पता बीती रात स्पेन के हाथों मिली हार के पश्चात टूर्नामेंट से बाहर हो गई पुर्तगाल के इकतालीस वर्षीय स्टार खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो भी जल्द फुटबॉल को अलविदा कह दें। शायद कल हमने उनका अंतिम नृत्य देखा हो।

Cherish them, while they are there. Football will never be this beautiful.

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गौरव बडोला
गौरव बडोला
दिन में दिहाड़ी करता हूं, रात को कोरे कागज़ पर अपने ख्वाबों की दुनिया बुनता हूं। फुटबॉल और साहित्य को जीता हूं।

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