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बंगाल के आदिनाथ मंदिर को वापस पाने में जुटे सनातनी, इस्लामी आक्रांताओं ने कब्जा कर बना दी थी अदीना मस्जिद: जानिए कब से चल रहा हिंदुओं का संघर्ष, अब तक क्या-क्या हुआ

अदीना मस्जिद की दीवारों, दरवाजों, मेहराबों और मिहराब (नमाज की दिशा बताने वाला स्थान) पर भगवान शिव, भगवान गणेश और अन्य हिंदू प्रतीकों की नक्काशी दिखाई देती है। यहाँ फूलों की आकृतियाँ, चैत्य मेहराब, कीर्तिमुख, मोतियों की मालाएँ और जंजीर-घंटी जैसे कई डिजाइन भी बने हुए हैं।

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में स्थित करीब 650 साल पुरानी अदीना ‘मस्जिद’ को लेकर बड़ा धार्मिक और राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। स्थानीय बीजेपी नेताओं के समर्थन से एक हिंदू संगठन ने मस्जिद के पास पूजा-पाठ शुरू कर दिया है। संगठन का कहना है कि यह ऐतिहासिक ढाँचा एक प्राचीन हिंदू मंदिर को तोड़कर बनाया गया था।

‘आदिनाथ पुरातन शिव मंदिर’ संगठन ने घोषणा की कि वह मस्जिद परिसर के बाहर 3.6 फीट ऊँचा और करीब 1.5 टन वजनी शिवलिंग स्थापित करेगा। यह शिवलिंग तारकेश्वर से लाया जा रहा है, जो यहाँ से करीब 289 किलोमीटर दूर है।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, संगठन के मुख्य संरक्षक और बीजेपी नेता काजल गोस्वामी ने कहा, “इस तथाकथित मस्जिद में हिंदू और बौद्ध धर्म की मूर्तियाँ मौजूद हैं। आदिनाथ मंदिर को तोड़कर यहाँ मस्जिद बनाई गई थी।” उन्होंने आगे कहा, “हमारा उद्देश्य मंदिर को फिर से स्थापित करना है और शिवलिंग को उसके अंदर रखना है।”

हालाँकि, काजल गोस्वामी ने कहा कि उनका संगठन कानून का पूरी तरह पालन करेगा और किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा नहीं होने देगा। उन्होंने बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और पुलिस अधिकारियों ने उन्हें निर्देश दिया कि संरक्षित स्मारक क्षेत्र के बाहर ही पूजा-अर्चना की जाए।

इन घटनाक्रमों के बाद मालदा जिला पुलिस ने सख्त सलाह जारी की। पुलिस ने लोगों को याद दिलाया कि अदीना स्मारक 1958 के AMASR (प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष) अधिनियम के तहत केंद्र सरकार द्वारा संरक्षित स्मारक है। इसलिए परिसर के भीतर बिना अनुमति किसी भी तरह की धार्मिक पूजा या अनुष्ठान करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।

इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रूप भी ले लिया है। BJP के राज्यसभा सांसद समित भट्टाचार्य ने संसद में यह मामला उठाते हुए केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से मूल आदिनाथ मंदिर की सुरक्षा पर ध्यान देने की माँग की। वहीं, विपक्षी नेताओं ने बीजेपी पर निशाना साधा है। CPI(M) के पोलित ब्यूरो सदस्य मोहम्मद सलीम ने आरोप लगाया कि BJP आने वाले चुनावों से पहले लोगों को बाँटने के लिए अपनी पुरानी राजनीतिक रणनीति अपना रही है।

प्राचीन मंदिर का मस्जिद में परिवर्तन

बंगाल के मालदा जिले के पांडुआ में स्थित अदीना मस्जिद के बारे में सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है कि इसका निर्माण 1373 से 1375 ईस्वी के बीच इलियास शाही वंश के सुल्तान सिकंदर शाह ने कराया था। इतिहास की कई किताबों में इसे भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे बड़ी मध्यकालीन मस्जिद बताया जाता है।

हालाँकि, पुरातात्विक और वास्तु संबंधी कई प्रमाण बताते हैं कि इस स्थान का इतिहास इससे भी कहीं अधिक पुराना है। इन प्रमाणों के मुताबिक, मस्जिद का निर्माण मुख्य रूप से पाल-सेन काल (8वीं से 12वीं शताब्दी) के पहले से मौजूद हिंदू और बौद्ध धार्मिक स्थलों से लिए गए पत्थरों, स्तंभों और नक्काशीदार सामग्री का उपयोग करके किया गया था।

मस्जिद में मौजूद कई मूर्तियाँ औऱ अन्य अवशेष इस बात की ओर संकेत करते हैं कि यहाँ पहले भगवान शिव को समर्पित भव्य आदिनाथ मंदिर और भगवान विष्णु का एक मंदिर मौजूद था। मस्जिद का मिंबर (जहाँ से इमाम संबोधन देते हैं) भी काले बेसाल्ट पत्थर से बने एक ऐसे दरवाजे का उपयोग करके बनाया गया है, जिसे मंदिर के खंडहरों से लिया गया था।

इसके अलावा मस्जिद की दीवारों, दरवाजों, मेहराबों और मिहराब (नमाज की दिशा बताने वाला स्थान) पर भगवान शिव, भगवान गणेश और अन्य हिंदू प्रतीकों की नक्काशी दिखाई देती है। यहाँ फूलों की आकृतियाँ, चैत्य मेहराब, कीर्तिमुख, मोतियों की मालाएँ और जंजीर-घंटी जैसे कई डिजाइन भी बने हुए हैं। इस तरह की सजावट आम तौर पर इस्लामी वास्तुकला का हिस्सा नहीं मानी जाती। इसलिए माना जाता है कि ये नक्काशी और डिजाइन पाल-सेन काल के समय के हैं।

इस मस्जिद के केंद्रीय मिहराब में इस स्थान के हिंदू अतीत के कई संकेत दिखाई देते हैं। मिहराब का सामने का हिस्सा तीन पत्तियों जैसी आकृति वाली मेहराब से सजाया गया है। मेहराब के दोनों ओर बने हिस्सों पर फूलों जैसी आकृतियाँ उकेरी गई हैं। मिहराब के अंदर बने पैनलों पर भी मेहराब, फूलों की आकृतियाँ और मेहराब के ऊपरी हिस्से से लटकती जंजीत और घंटी के डिजाइन दिखाई देते हैं।

इतिहासकारों के मुताबिक, जंजीर और घंटी जैसे ये डिजाइन हिंदू वास्तुकला की विशेष पहचान माने जाते हैं। इस तरह की नक्काशी हिंदू काल में बनाए गए स्तंभों पर भी देखी जाती है।

आज भी इस परिसर और इसके आसपास की दीवारों में टूटे हुए शिवलिंग और उलटी पड़ी हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ दिखाई देती हैं। कई लोगों का मानना है कि ये अवशेष इस बात की ओर इशारा करते हैं कि मध्यकालीन आक्रमणों के दौरान इस क्षेत्र की हिंदू विरासत को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुँचाया गया था।

इस मुद्दे को कानूनी और सामाजिक स्तर पर तब अधिक चर्चा मिली, जब वरिष्ठ अधिवक्ता हरि शंकर जैन ने हिंदुओं से इस स्थल पर पूजा करने का अपना अधिकार वापस पाने की अपील की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सुल्तान सिकंदर शाह के शासनकाल के दौरान हुए ऐतिहासिक विध्वंस का भी मुद्दा उठाया।

TMC सांसद यूसुफ पठान ने इसे मस्जिद के तौर पर पेश करने की कोशिश की

यह विवाद उस समय राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया, जब तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के सांसद यूसुफ पठान ने इस स्थल का दौरा किया और इसे केवल इस्लामी वास्तुकला की एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया।

सोशल मीडिया पर अपनी यात्रा की तस्वीरें साझा करते हुए यूसुफ पठान ने लिखा, “बंगाल के मालदा में स्थित अदीना मस्जिद 14वीं शताब्दी की एक ऐतिहासिक मस्जिद है। इसका निर्माण इलियाह शाही वंस के दूसरे शासक सुल्तान सिकंदर शाह ने 1373 से 1375 ईस्वी के बीच कराया था। अपने समय में यह भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे बड़ी मस्जिद थी और उस दौर की शानदार वास्तुकला का उदाहरण है।”

इसके बाद सोशल मीडिया पर कई लोग और राजनीतिक कमेंटेटर ने TMC सांसद की आलोचना की। उनका कहना था कि उन्होंने इस स्थल से जुड़े हिंदू इतिहास और विरासत का कोई उल्लेख नहीं किया। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने परिसर में मौजूद नक्काशियों और मूर्तियों की तस्वीरें साझा करते हुए अपने दावे पेश किए। अधिवक्ता शेखर कुमार झा ने दीवार पर बनी भगवान गणेश की एक नक्काशी की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, “इतिहास: आदिनाथ मंदिर को अदीना मस्जिद बना दिया गया।”

वहीं, ‘PlanH’ नाम के एक यूजर ने यूसुफ पठान को जवाब देते हुए लिखा, “प्रिय यूसुफ पठान, आप भारत के सबसे बड़े हिंदू मंदिरों में से एक आदिनाथ मंदिर के परिसर में खड़े हैं, जिसे इस्लामी आक्रमणकारियों ने अपवित्र कर अपने कब्जे में ले लिया था। आपके संदर्भ के लिए कुछ तस्वीरें अटैच हैं। अब समय आ गया है कि इस अन्याय और बर्बरता को समाप्त कर मंदिर की पुरानी गरिमा को फिर से स्थापित किया जाए।”

एक और यूजर ‘अब्दुल किताबी’ ने लिखा, “एक सच्चे मुसलमान के तौर पर हमें यह मस्जिद हिंदुओं को वापस कर देनी चाहिए।”

वहीं, कुछ अन्य लोगों ने इतिहास को लेकर सवाल उठाते हुए कहा, “क्या

BJP सरकार के दौरान अधिकारों की बहाली और पुनर्स्थापना की दिशा में कदम

कई दशकों तक स्थानीय हिंदुओं को इस विवादित स्थल पर पूजा-पाठ या किसी भी तरह का धार्मिक अनुष्ठान करने की अनुमति नहीं थी। यह परिसर ASI के संरक्षण में था। इसके कारण यहाँ पूजा और आगे पुरातात्विक जाँच कराने की कोशिशों पर रोक लगी रही। हालाँकि, साल 2024 की शुरुआत में इस स्थल को लेकर माहौल बदलना शुरू हुआ।

युवा पुजारी हिरण्मय के नेतृत्व में हिंदू श्रद्धालुओं का एक समूह परिसर के अंदर पहुँचा। उन्होंने वहाँ मौजूद मूर्तियों और वास्तुकला में बने एक शिवलिंग की पहचान की। इसके बाद उन्होंने मंत्रोच्चार करते हुए पूजा शुरू कर दी। स्थानीय मुस्लिमों की शिकायत के बाद पुलिस मौके पर पहुँची और उस समय पूजा रुकवा दी। हालाँकि, इस घटना को स्थानीय हिंदुओं के लिए एक बड़ा मोड़ माना गया।

अब BJP नेताओं के समर्थन के साथ इस स्थल को वापस पाने की माँग और तेज हो गई है। इस अभियान से जुड़े लोग अयोध्या राम जन्मभूमि, ज्ञानवापी और मथुरा जैसे मामलों का उदाहरण देते हुए कहते हैं कि लोगों की धार्मिक आस्था को हमेशा के लिए दबाया नहीं जा सकता।

साथ ही, इस मामले में कोलकाता हाई कोर्ट में पूरे परिसर का ASI से सर्वे कराने की माँग करने की तैयारी भी चल रही है। इसके अलावा, परिसर के बाहर शिवलिंग स्थापित करने का काम भी जारी है। हिंदू समुदाय का कहना है कि वह कानूनी और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी धार्मिक विरासत को वापस पाने की दिशा में कदम उठा रहा है।

(मूल रूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में लिखी गई है, जिसे पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।)

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Shriti Sagar
Shriti Sagar
Journalist

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