केरल लोक सेवा आयोग (PSC) परीक्षा में एक बड़े घोटाले को लेकर विवाद हो रहा है। राज्य योजना बोर्ड में ‘चीफ (उद्योग और बुनियादी ढाँचा)’ के बेहद महत्वपूर्ण पद के लिए एक परीक्षा आयोजित की गई थी।
इस परीक्षा में मेरिट और ईमानदारी को ताक पर रखकर, सत्ताधारी दल CPM से जुड़े एक संगठन के नेता अरुण जे प्रताप को अवैध तरीके से पहला रैंक (टॉपर) दिला दिया गया। मामला सामने आने के बाद जब विशेष जाँच टीम (SIT) और क्राइम ब्राँच ने जाँच शुरू की, तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।
जाँच में सामने आया कि यह कोई छोटी-मोटी लापरवाही नहीं थी, बल्कि बड़े अधिकारियों और राजनेताओं की मिलीभगत से रची गई एक सोची-समझी साजिश थी, ताकि अपने पसंदीदा उम्मीदवार को इस पद पर बैठाया जा सके।
मूल्यांकन में धांधली और मार्क्स का गणित
जाँच टीम SIT को पता चला है कि इस घोटाले को अंजाम देने के लिए परीक्षा के पूरे इवैल्यूएशन प्रोसेस को ही हैक कर लिया गया। जो उम्मीदवार पहले स्थान पर आया, वह असल में केरल वॉटर अथॉरिटी में CPM समर्थित सर्विस ऑर्गनाइजेशन का एक नेता था।
गड़बड़ी यह की गई कि पहली रैंक पाने वाले इस नेता ने परीक्षा के पहले पेपर में 4 सवालों के गलत जवाब दिए थे और 6 सवाल ऐसे थे जिन्हें उसने छुआ तक नहीं था। आरोपित अधिकारियों ने दिमाग लगाया और प्रश्न संख्या 9 से लेकर 18 तक के इन 10 सवालों को डिजिटल इवैल्यूएशन के प्रोसेस से ही बाहर कर दिया।
इसका नतीजा यह हुआ कि जिन 228 से ज्यादा दूसरे उम्मीदवारों ने इन 10 सवालों के सही जवाब दिए थे, उन्हें भी इसके कोई नंबर नहीं मिले। इस तरह से बाकी उम्मीदवारों के लगभग 50 से 54 मार्क्स का नुकसान कर दिया गया।
Kerala PSC paper leakage is brutal. The CPM nominee who was to get job couldnt attend questions of abt 54 marks. So the valuer didnt check answers of anybody and simply helped the CPM comrade score 1st rank.
— Yuvraj Gokul (@yuvrajsays) July 30, 2026
Will @CJP_for_India ask Aishe Ghosh and John Brittas abt this ??
Dear… pic.twitter.com/c8GpJtMWbS
अगर सभी सवालों की सही तरीके से जाँच होती, तो असली टॉपर कोई और होता। जाँच के मुताबिक, मौजूदा पहले रैंक वाले नेता के नंबर असली हकदार (जो दूसरे नंबर पर रहा) से 53 मार्क्स कम होते। हालत यह थी कि अगर ईमानदारी से कॉपी जाँची जाती, तो यह नेता शॉर्टलिस्ट होने के लायक भी नहीं था, लेकिन धांधली करके उसे टॉपर बना दिया गया।
इंटरव्यू का खेल और एक लाख से ऊपर की सैलरी
यह पूरा खेल सिर्फ एक ही पद को भरने के लिए खेला गया था। यह नौकरी कोई आम नौकरी नहीं थी, बल्कि इसका वेतन ₹1,23,700 से लेकर ₹1,66,800 प्रति माह तक था। इतनी भारी-भरकम सैलरी और रसूख वाले पद पर अपने आदमी को बैठाने के लिए सिर्फ लिखित परीक्षा में ही नहीं, बल्कि इंटरव्यू में भी जमकर नंबर लुटाए गए।
जब लिखित परीक्षा के बाद इंटरव्यू का दौर आया, तो सेटिंग के तहत इस वामपंथी नेता को 40 में से 36 मार्क्स दे दिए गए। वहीं दूसरी तरफ, जो उम्मीदवार अपनी काबिलियत के दम पर दूसरे नंबर पर था और जो असल में इस पद का असली हकदार था, उसे इंटरव्यू में 40 में से सिर्फ 11 मार्क्स देकर रेस से बाहर कर दिया गया।
इस बेईमानी का भंडाफोड़ तब हुआ जब मुहम्मा के रहने वाले वी एस जयलाल नाम के एक उम्मीदवार ने अपनी आंसर-शीट की कॉपी के लिए अप्लाई किया। आयोग ने जानबूझकर नियुक्ति होने के एक साल बाद उसे कॉपी दी, जिसमें साफ दिख रहा था कि 28 में से सिर्फ 18 सवालों के ही नंबर जोड़े गए थे और 10 सवालों को गायब कर दिया गया था।
SIT की जाँच का शिकंजा और आगे की कार्रवाई
क्राइम ब्रांच और आईजी अजीता बेगम के नेतृत्व वाली SIT ने अब इस मामले में कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। मूल्यांकन विभाग में इस्तेमाल होने वाले कंप्यूटरों को सील कर दिया गया है और उनके डिजिटल लॉग्स कब्जे में ले लिए गए हैं ताकि फॉरेंसिक जाँच की जा सके।
शुरुआती जाँच के बाद SIT को शक है कि इस पूरे खेल के पीछे भारी लेन-देन यानी रिश्वतखोरी हुई है। इसलिए इस केस में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा आपराधिक विश्वासघात और पद के दुरुपयोग की धाराओं में भी जाँच चल रही है।
आरोपितों की बात करें तो जाँच की सुई PSC के परीक्षा विभाग के तीन वरिष्ठ अधिकारियों (एक डिप्टी सेक्रेटरी, एक जूनियर सुपरिटेंडेंट और एक सिस्टम एनालिस्ट) पर टिकी है, जिन्हें जल्द ही आरोपित बनाया जा सकता है।
इसके साथ ही PSC के चेयरमैन एम आर बैजू और इंटरव्यू लेने वाले दो अन्य बोर्ड सदस्यों को भी पूछताछ के लिए नोटिस भेजा जा रहा है। सरकार से इन अधिकारियों पर केस चलाने की मंजूरी माँगी जा रही है।
यह मामला सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। अब तक SIT को परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर 90 से ज्यादा शिकायतें मिल चुकी हैं, जिसके बाद जाँच का दायरा बढ़ाने और टीम में और अधिक पुलिस अधिकारियों को शामिल करने का फैसला किया गया है।


