Homeदेश-समाजअब पुराने कपड़े नहीं जाएँगे कूड़े में, दिल्ली सरकार की 'अर्पण योजना' से मिलेगा...

अब पुराने कपड़े नहीं जाएँगे कूड़े में, दिल्ली सरकार की ‘अर्पण योजना’ से मिलेगा नया जीवन: जरूरतमंदों तक पहुँचेगी मदद और महिलाओं को भी मिलेगा रोजगार

दिल्ली सरकार की 'अर्पण योजना' का सबसे बड़ा उद्देश्य शहर के कचरे को सही तरीके से संभालना है। आज के समय में नए कपड़े बहुत ज्यादा खरीदे जा रहे हैं। लोग थोड़े दिन कपड़े पहनकर उन्हें बेकार समझकर फेंक देते हैं। इससे हमारे शहरों में कचरे के बड़े-बड़े पहाड़ बन जाते हैं। इस समस्या को टेक्सटाइल वेस्ट कहा जाता है। इसी बड़ी समस्या से निपटने के लिए सरकार यह योजना लेकर आई है।

दिल्ली के एक आम घर की अलमारी में अक्सर ऐसे कपड़े दबे रहते हैं, जो समय के साथ छोटे हो गए हैं या जिन्हें अब पहना नहीं जाता है। ये कपड़े पूरी तरह से ठीक और पहनने योग्य होते हैं, लेकिन फैशन के बदलने या कम इस्तेमाल की वजह से वे किसी कोने में धूल फाँकते रहते हैं। आमतौर पर भारतीय घरों में इन पुराने कपड़ों का इस्तेमाल बहुत ही रचनात्मक और पारंपरिक तरीकों से किया जाता रहा है।

देश के आम नागरिक अपने घर के पुराने कपड़ों को संभाल कर रखते हैं और जरूरत पड़ने पर उनका बेहतरीन उपयोग करते हैं। कई लोग इन पुराने कपड़ों को अच्छी तरह नमक के पानी में धोकर साफ करते हैं, ताकि उनमें किसी तरह के कीटाणु न रहें। इसके बाद वे इन्हें बर्तन बेचने वाले या फेरी वाले को देकर अपने घर के लिए नए बर्तन या जरूरत का अन्य सामान ले लेते हैं।

इसके अलावा, हमारे देश में एक और लोकप्रिय तरीका पुराना कपड़ा प्रबंधन का रहा है, जिसे पारंपरिक रूप से खूब अपनाया जाता है। लोग पुराने सूती या अन्य मजबूत कपड़ों को लंबे समय तक सहेज कर रखते हैं और फिर उन्हें इकट्ठा करके किसी कुशल कारीगर के पास भेजते हैं। इन कपड़ों से घरों में बिछाने के लिए खूबसूरत और मजबूत दरियाँ, पायदान या अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुएँ बनवाई जाती हैं। वहीं, समाज का एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो इन पुराने और इस्तेमाल करने योग्य कपड़ों को सीधे तौर पर अपने आस-पास के जरूरतमंदों, गरीबों और बेघर लोगों को दान कर देता है। ऐसा करने से वे लोग कड़ाके की ठंड या अन्य मौसम में उन कपड़ों का पूरा इस्तेमाल कर पाते हैं और उनका जीवन थोड़ा आसान हो जाता है।

इसी भारतीय सांस्कृतिक परंपरा और जन-सहयोग की भावना को एक आधुनिक, बड़े और संगठित रूप में ढालने का काम अब दिल्ली सरकार ने किया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए राजधानी में ‘अर्पण योजना’ की शुरुआत की है। यह योजना न केवल पुराने कपड़ों को कचरे में फेंकने से रोकती है, बल्कि उन्हें एक नया उद्देश्य और नया जीवन प्रदान करती है।

क्या है दिल्ली सरकार की ‘अर्पण योजना’?

दिल्ली सरकार ने शहर में बढ़ रहे कपड़ों के कचरे को रोकने के लिए ‘अर्पण योजना’ शुरू की है। इस योजना का मुख्य मकसद पुरानी चीजों को दोबारा इस्तेमाल में लाना है। इसे चक्रीय अर्थव्यवस्था या सर्कुलर इकोनॉमी भी कहा जाता है। इसके तहत लोग अपने घर के बेकार कपड़े तय किए गए केंद्रों पर आसानी से जमा करा सकते हैं। इस खास योजना की शुरुआत पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार फेज-1 और पंजाबी बाग वेस्ट मेट्रो स्टेशन से की गई है।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने खुद आगे आकर इस अभियान की शुरुआत की है। उन्होंने पहले ‘अर्पण’ डोनेशन सेंटर का उद्घाटन किया और खुद अपने पुराने कपड़े दान किए। मुख्यमंत्री ने ऐसा करके आम जनता के सामने एक बहुत अच्छी मिसाल पेश की है। सरकार चाहती है कि लोग अपने पुराने कपड़ों को कूड़ेदान में न फेंकें। इन कपड़ों को सही जगह पहुँचाया जाए ताकि पर्यावरण की रक्षा हो सके और गरीबों की मदद की जा सके।

बहुत से लोग अपने पुराने और इस्तेमाल न होने वाले कपड़ों को यूँ ही फेंक देते हैं। इससे हमारे पर्यावरण पर बहुत बुरा असर पड़ता है और कचरा बढ़ता है। इसी समस्या को हल करने के लिए सरकार लोगों को जागरूक कर रही है। सरकार चाहती है कि नागरिक अपने साफ और पहनने योग्य कपड़े इन केंद्रों पर दान करें। इससे बेकार कपड़े कचरे में नहीं जाएँगे और उनका सही इस्तेमाल हो पाएगा।

इस योजना की सोच बहुत साफ है कि घरों में रखे अनचाहे कपड़ों को सही व्यक्ति तक पहुँचाया जाए। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि छोटी-छोटी कोशिशों से ही बड़ा बदलाव आता है। यह योजना सिर्फ कपड़ों का दान करने तक सीमित नहीं है। यह हमारे पर्यावरण को बचाने और समाज को जोड़ने का एक बड़ा तरीका है। जब हम मिलकर काम करेंगे, तभी हमारी दिल्ली साफ और सुंदर बनेगी।

इन केंद्रों पर जमा होने वाले कपड़ों को बहुत सावधानी से छांटा जाता है। वैज्ञानिक तरीकों से यह देखा जाता है कि कौन सा कपड़ा किसके काम आ सकता है। इस प्रक्रिया में यह ध्यान रखा जाता है कि कोई भी अच्छा कपड़ा बेकार न जाए। इन सभी प्रयासों से दिल्ली को स्वच्छ और पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाने में मदद मिल रही है। यह योजना हम सबके लिए एक बेहतरीन मौका है।

अर्पण केंद्र किन मेट्रो स्टेशनों पर है?

दिल्ली सरकार ने पुरानी कपड़ों को दान करने के इस काम को बेहद आसान बना दिया है। इसके लिए सार्वजनिक मेट्रो नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया है ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। पहले चरण में दिल्ली के कुल 10 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों पर ‘अर्पण केंद्र’ बनाए जा रहे हैं। इन सभी 10 स्टेशनों पर यात्री अपने रोज आने-जाने के सफर के दौरान आसानी से पहुँच सकते हैं।

इन सभी 10 प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के नाम बहुत साफ हैं। इनमें मयूर विहार फेज-1, पंजाबी बाग वेस्ट, शालीमार बाग और शाहदरा शामिल हैं। इसके अलावा रोहिणी वेस्ट, हौज खास, लाजपत नगर, मालवीय नगर, द्वारका और मोहन एस्टेट स्टेशन भी हैं। इन जगहों पर रोजाना लाखों लोग सफर करते हैं। इसलिए सरकार ने इन स्टेशनों को चुनकर कपड़ों को जमा करना बहुत आसान कर दिया है।

इन केंद्रों पर कपड़े दान करने की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और सरल है। केंद्र पर एक विशेष स्कैनर लगा होता है जिसे आपको अपने फोन से स्कैन करना होता है। इसके बाद आपके फोन पर एक छोटा सा फॉर्म खुल जाता है। उस फॉर्म में आपको अपना नाम और मोबाइल नंबर लिखना होता है।

साथ ही, आपको दान किए जाने वाले कपड़ों का वजन किलो में दर्ज करना होता है। आप सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक अपने साफ और पहनने योग्य कपड़े यहाँ दे सकते हैं। DMRC के सहयोग से चल रही यह पहल बहुत ही व्यवस्थित है। यहाँ आने वाले कपड़ों की छंटनी करके अच्छे कपड़े जरूरतमंदों को दिए जाते हैं, और बाकी कपड़ों को रीसाइकिल किया जाता है।

अर्पण योजना का मुख्य उद्देश्य क्या?

दिल्ली सरकार की ‘अर्पण योजना’ का सबसे बड़ा उद्देश्य शहर के कचरे को सही तरीके से संभालना है। आज के समय में नए कपड़े बहुत ज्यादा खरीदे जा रहे हैं। लोग थोड़े दिन कपड़े पहनकर उन्हें बेकार समझकर फेंक देते हैं। इससे हमारे शहरों में कचरे के बड़े-बड़े पहाड़ बन जाते हैं। इस समस्या को टेक्सटाइल वेस्ट कहा जाता है। इसी बड़ी समस्या से निपटने के लिए सरकार यह योजना लेकर आई है।

पुराने कपड़ों को दोबारा इस्तेमाल करने से पर्यावरण पर पड़ने वाला बुरा असर कम होता है। इससे हमारी प्राकृतिक चीजें सुरक्षित रहती हैं। साथ ही, नए कपड़े बनाने में जो ऊर्जा खर्च होती है, उसकी भी बचत होती है। जब हम पुरानी चीजों का फिर से उपयोग करते हैं, तो प्रकृति को बहुत राहत मिलती है। यह योजना इसी सोच पर काम करती है।

इस योजना का एक और बहुत जरूरी मकसद लोगों में समझदारी बढ़ाना है। सरकार चाहती है कि लोग सामानों को यूँ ही न फेंके। लोगों को चीजों को दोबारा इस्तेमाल करने और रीसाइकिल करने की आदत डालनी चाहिए। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस अभियान की शुरुआत करते समय एक बात बहुत साफ कही थी। उन्होंने कहा था कि जब तक आम जनता का साथ नहीं मिलेगा, तब तक कोई भी सरकारी योजना सफल नहीं हो सकती।

इसलिए सरकार इस काम को एक बड़ा जन-आंदोलन बनाना चाहती है। इसका मकसद हर नागरिक को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाना है। यह योजना सिर्फ कचरा साफ करने तक सीमित नहीं है। यह लोगों के दिलों में समाज की सेवा और प्रकृति के प्रति प्यार जगाने का एक बहुत अच्छा तरीका भी है। जब सब लोग मिलकर साथ चलेंगे, तभी हमारी दिल्ली साफ और हरी-भरी बन पाएगी।

पुराने कपड़ों का क्या होता है? रीसायकल और अपसाइक्लिंग की पूरी प्रक्रिया

‘अर्पण योजना’ के तहत जब लोग अपने पुराने कपड़े जमा कराते हैं, तो सबके मन में यह सवाल आता है कि उन कपड़ों का आगे क्या किया जाएगा? इस बात का जवाब देते हुए सरकार ने साफ किया है कि इन कपड़ों को तीन मुख्य तरीकों से नया जीवन दिया जाएगा। ये तीन तरीके दोबारा इस्तेमाल करना, रीसाइकिल करना और अपसाइक्लिंग करना हैं। इस पूरी प्रक्रिया के जरिए यह पक्का किया जाता है कि कोई भी कपड़ा बेकार न जाए और उसका सही सदुपयोग हो सके।

सबसे पहले इन सभी कपड़ों की बहुत सावधानी से छंटनी की जाती है। छंटनी के बाद जो कपड़े पूरी तरह सुरक्षित और पहनने योग्य होते हैं, उन्हें ‘रीस्यू’ यानी दोबारा इस्तेमाल की श्रेणी में रखा जाता है। इन अच्छे और साफ कपड़ों को बिना किसी बदलाव के सीधे गरीबों और जरूरतमंद लोगों में बांट दिया जाता है। इससे समाज के गरीब लोगों को मुफ्त में अच्छे कपड़े मिल जाते हैं। सर्दियों के मौसम में या किसी भी मुश्किल समय में यह मदद उनके बहुत काम आती है। यह तरीका समाज में आपसी प्यार और इंसानी मदद की भावना को और ज्यादा मजबूत बनाता है।

जो कपड़े सीधे पहनने लायक नहीं बचते हैं, उन्हें दूसरे चरण में रीसाइक्लिंग इकाइयों में भेजा जाता है। वहाँ आधुनिक मशीनों की मदद से इन कपड़ों के रेशों को अलग किया जाता है। इन पुराने रेशों से नए धागे या कारखानों में काम आने वाले अन्य उत्पाद बनाए जाते हैं। इसके अलावा, अपसाइक्लिंग की प्रक्रिया भी बहुत खास होती है। इसमें पुराने और कटे-फटे कपड़ों को रचनात्मक तरीके से काटकर नई और सुंदर चीजें बनाई जाती हैं।

इस अपसाइक्लिंग प्रक्रिया के जरिए पुराने कपड़ों से डिजाइनर बैग, सुंदर कुशन कवर और घर की सजावट का सामान तैयार किया जाता है। इसके अलावा और भी कई उपयोगी वस्तुएँ बनाई जाती हैं जो रोजमर्रा के काम आती हैं। यह पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया यह पक्का करती है कि कपड़े का छोटे से छोटा टुकड़ा भी बेकार न फेंका जाए। इस तरह पुराने कपड़ों को रीसाइकिल करके प्रकृति को बचाया जाता है और उनका अधिकतम उपयोग किया जाता है।

महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर

दिल्ली सरकार की ‘अर्पण योजना’ सिर्फ पर्यावरण को साफ रखने या कपड़े दान करने तक सीमित नहीं है। इस योजना का एक बहुत ही मजबूत और अच्छा सामाजिक पहलू भी है। इस योजना के जरिए दिल्ली की महिलाओं के लिए रोजगार के नए और सुनहरे रास्ते खोले जा रहे हैं। जब लोग मेट्रो स्टेशनों पर बने केंद्रों पर कपड़े दान करते हैं, तो वे कपड़े आगे प्रोसेसिंग यूनिट्स में जाते हैं। इन जगहों पर काम करने के लिए बहुत सारे लोगों की जरूरत होती है।

इन कपड़ों की छंटनी करने, उन्हें धोने और अलग-अलग भागों में बांटने का काम किया जाता है। इसके अलावा पुराने कपड़ों से नई चीजें यानी अपसाइक्लिंग करने के कामों में भी महिलाओं को जोड़ा जा रहा है। सरकार का यह कदम महिलाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें मजबूत बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ी और अच्छी सोच है। इससे महिलाओं को किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकेंगी।

इस व्यवस्था की मदद से महिलाएँ अपने घर के पास ही इन केंद्रों या जुड़ी हुई फैक्ट्रियों में काम कर सकती हैं। वे वहाँ काम करके अपनी आजीविका चला सकती हैं और अपने परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बना सकती हैं। सरकार का सोचना है कि जब महिलाएँ ऐसे पर्यावरण और समाज से जुड़े कामों में हिस्सा लेती हैं, तो देश और समाज का विकास बहुत तेजी से होता है।

इससे महिलाओं का आत्मविश्वास भी काफी बढ़ता है और वे शहर की तरक्की में अपनी अहम भूमिका निभाती हैं। इस तरह ‘अर्पण योजना’ एक साथ कई अच्छे काम कर रही है। एक तरफ जहाँ इससे हमारा पर्यावरण साफ हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ गरीबों की मदद भी हो रही है। साथ ही साथ, इससे महिलाओं का आर्थिक विकास भी पूरी तरह सुरक्षित हो रहा है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

विशेषता
विशेषता
मीडिया में 7+ वर्षों का सफर। ETV भारत, इंडिया न्यूज़, सुदर्शन न्यूज़, MH1 और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य किया। डेस्क, ग्राउंड रिपोर्टिंग, एंकरिंग और सोशल मीडिया, हर प्लेटफॉर्म पर सक्रिय भूमिका निभाई। वर्तमान में ऑपइंडिया के साथ जुड़ी हूँ।

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘फ्लाइट का इंजन हवा में बंद…’ केजरीवाल जिस डर को बेच चमका रहे राजनीति, समझिए उस SAF का पूरा विज्ञान; कितनी खतरनाक है E50...

अरविंद केजरीवाल ने ATF में एथेनॉल और भविष्य में E50 पेट्रोल को लेकर सवाल उठाए हैं। जानिए SAF क्या है और उनके दावों में कितना दम है।

अमेरिकी सांसद राइली मूर ने FCRA संशोधन विधेयक पर भारत को दी चेतावनी: आखिर विदेशी नेताओं और चर्च समूहों को इस बदलाव से इतनी...

FCRA संशोधन विधेयक को चर्चों पर हमले के रूप में पेश किया जा रहा है, जबकि विवाद की असली वजह विदेशी फंडिंग, धर्मांतरण नेटवर्क और भारत-विरोधी गतिविधियों पर सरकार की बढ़ती निगरानी है
- विज्ञापन -