गुजरात के अहमदाबाद की एक विशेष NIA अदालत ने 2025 के आईएसआईएस Ricin आतंकी साजिश मामले में मुख्य आरोपित जिहादी डॉ सैयद अहमद मोहिउद्दीन की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। सैयद अहमद मोहिउद्दीन की ओर से पेश अधिवक्ता- के एम दस्तूर ने दलील दी कि उनका मुवक्किल निर्दोष है और उसे झूठे मामले में फँसाया गया है।
बचाव पक्ष ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री से किसी आतंकी संगठन के साथ उसके संबंध स्थापित नहीं होते और न ही यह साबित होता है कि उसका लोगों को नुकसान पहुँचाने का इरादा था।
बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि मोहिउद्दीन को यह जानकारी नहीं थी कि उन बैगों के अंदर क्या था, जिनमें हथियार बरामद किए गए थे और उसे Ricin तैयार करने की प्रक्रिया की भी कोई जानकारी नहीं थी।
अदालत को आरोपित के खिलाफ प्रथम दृष्टया सामग्री मिली
विशेष न्यायाधीश (एनआईए) हेमंग आर रावल ने कहा कि मामले में गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 16, 17, 18, 18-B और 20, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2) और आर्म्स एक्ट के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
अदालत ने कहा कि जाँच में 2025 के आईएसआईएस Ricin आतंकी साजिश मामले के आरोपित जिहादी मोहिउद्दीन के खिलाफ प्रथम दृष्टया सामग्री सामने आई है और मामले में आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है।

अदालत ने कहा कि डॉक्टर मोहिउद्दीन पर बिना आवश्यक अनुमति के हैदराबाद स्थित अपने घर में एक प्रयोगशाला स्थापित करने का आरोप है। जाँचकर्ताओं के अनुसार, वहाँ अरंडी के बीज और रसायनों का इस्तेमाल कर Ricin तैयार किया गया था।
अदालत ने कहा कि मोहिउद्दीन के मेडिकल बैकग्राउंड को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता कि वह Ricin की प्रकृति से पूरी तरह अनजान था। Ricin एक अत्यधिक जहरीला जैविक विष है, जिसमें बड़े पैमाने पर मौतें करने की क्षमता होती है।
अभियोजन का दावा- डॉक्टर हैंडलर के साथ मिलकर कर रहा था काम
जमानत याचिका का विरोध करते हुए विशेष लोक अभियोजक एम जी कपाड़िया ने अदालत को बताया कि मोहिउद्दीन गंभीर अभियोजन का सामना कर रहा है और वह बिना लाइसेंस के तीन पिस्तौल तथा 30 जिंदा कारतूस लेकर मेहसाणा की ओर यात्रा कर रहा था। अभियोजन ने कहा कि यह तथ्य और अन्य साक्ष्य व्यापक साजिश में उसकी संलिप्तता को दर्शाते हैं।
अभियोजन के अनुसार, मोहिउद्दीन ने अपने हैदराबाद स्थित आवास को अरंडी के बीजों से रिसिन निकालने के लिए एक गुप्त प्रयोगशाला में बदल दिया था।
अभियोजन ने बताया कि उसके मोबाइल फोन में अबू खदीजा नामक एक टेलीग्राम यूजर के साथ बातचीत मिली, जिसे वांछित आरोपित बताया गया है। इन बातचीत में रिसिन तैयार करने के लिए एसीटोन, अरंडी के बीज और हथियार हासिल करने को लेकर चर्चा हुई थी।
गौरतलब है कि रिसिन एक अत्यधिक जहरीला प्रोटीन है, जो अरंडी के पौधे, Ricinus communis, से प्राप्त होता है। रिसिन कोई वायरस या बैक्टीरिया नहीं है, बल्कि यह एक लेक्टिन विष है, जो कोशिकाओं में प्रोटीन के निर्माण को बाधित करता है। इसके सेवन से अंगों का काम करना बंद हो जाने और तेजी से मौत होने की आशंका रहती है।
रिसिन निकालने की प्रक्रिया में अरंडी के बीजों को पीसना, उनका तेल निकालना और फिर बचे हुए पदार्थ को रासायनिक प्रक्रिया से गुजारकर रिसिन-युक्त गूदे को अलग करना शामिल है। हालाँकि यह एक जटिल प्रक्रिया है, लेकिन इसके लिए बुनियादी प्रयोगशाला उपकरण, दस्ताने और एसीटोन जैसे सामान की आवश्यकता होती है।
सरकारी पक्ष ने कोर्ट को आगे बताया कि मोहिउद्दीन एक मजहबी वजह के नाम पर अबू खदीजा की मदद करने के लिए तैयार हुआ था। दोनों टेलीग्राम से संपर्क में आए थे। बाद में उसने अपना काम शुरू करने के लिए लगभग 4 लाख अमेरिकी डॉलर (तकरीबन 3.3 करोड़ रुपये) की माँग भी की थी। अपनी योजना के सिलसिले में वह दिल्ली गया, जहाँ उसने पैसों, फंडिंग और आगे के काम और योजनाओं पर बात की।
इसके अलावा, मोहिउद्दीन ने अबू खदीजा के कहने पर एक कसम ली, उसका वीडियो बनाकर अपने हैंडलर को भेजा। फिर उसने अब्दुल वाजिद और नावेद पामिदी से भी ऐसी ही कसम दिलवाकर अपना गिरोह/नेटवर्क बढ़ाने की कोशिश की। उसने जहर तैयार करने की तस्वीरें और वीडियो भी अबू खदीजा को भेजे थे।
अदालत ने मोहिउद्दीन पर लगे आरोपों को दर्ज किया
अदालत में पेश चार्जशीट के सारांश के अनुसार, मोहिउद्दीन 2025 में टेलीग्राम के माध्यम से अबू खदीजा के संपर्क में आया और उसकी मदद करने के लिए सहमत हुआ। उसने कारोबारी गतिविधियों के लिए करीब 4 लाख अमेरिकी डॉलर की माँग की और अगस्त 2025 में एक सहयोगी से मिलने तथा योजनाओं और फंडिंग पर चर्चा करने के लिए दिल्ली की यात्रा की।
अदालत ने यह भी दर्ज किया कि मोहिउद्दीन सितंबर 2025 में अहमदाबाद गया और मेहसाणा के छत्राल के पास एक पूर्व निर्धारित स्थान से 1.90 लाख रुपए की राशि हासिल की, जिसे आतंकी गतिविधियों से प्राप्त धन बताया गया। बाद में उसने एक शपथ रिकॉर्ड की और उसे अपने हैंडलर के साथ साझा किया। नेटवर्क के विस्तार के प्रयासों के तहत अन्य लोगों को भी इसी तरह की शपथ दिलाई गई।

आरोपपत्र में आगे कहा गया है कि मोहिउद्दीन ने अरंडी के बीज, तेल निकालने वाले उपकरण और एसीटोन जैसे रसायन हासिल किए। अदालत ने अभियोजन के इस पक्ष को दर्ज किया कि इन सामग्रियों का इस्तेमाल उसके हैदराबाद स्थित आवास में बनी प्रयोगशाला में रिसिन तैयार करने के लिए किया गया था।
आरोप पत्र में रिसिन को रासायनिक हथियार सम्मेलन की अनुसूची-I में सूचीबद्ध अत्यधिक जहरीला जैविक विष बताया गया है।
अदालत ने यह भी दर्ज किया कि मोहिउद्दीन ने अतिरिक्त धन और सामग्री हासिल करने की व्यवस्था की थी और नवंबर 2025 में अहमदाबाद जाने की योजना बनाई थी, जहाँ उसे आतंकी वारदात के लिए उन्नत हथियार प्राप्त हुए। इन आरोपों के आधार पर अदालत ने कहा कि आरोप गंभीर हैं और प्रथम दृष्टया मामले में उसकी संलिप्तता दिखाई देती है।
मोहिउद्दीन रिसिन आतंकी साजिश से अवगत था, उसे पता था कि बैग में हथियार थे
अदालत ने ISIS रिसिन आतंकी साजिश के आरोपित सैयद अहमद मोहिउद्दीन के हथियारों के बारे में जानकारी नहीं होने संबंधी बचाव पक्ष की दलील को खारिज कर दिया। अदालत ने तीन पिस्तौल, 30 जिंदा कारतूस, भारतीय और अमेरिकी मुद्रा तथा चार लीटर अरंडी के तेल वाली एक बोतल की बरामदगी का उल्लेख किया।
न्यायाधीश ने कहा कि आरोपपत्र में मौजूद सामग्री से संकेत मिलता है कि मोहिउद्दीन अबू खदीजा के निर्देशों पर काम कर रहा था और हथियार किसी अनुचित उद्देश्य के लिए हासिल किए गए थे।

अदालत ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड से मोहिउद्दीन, अबू खदीजा और अन्य आरोपितों के बीच साजिश के संकेत मिलते हैं।
अदालत ने कहा, “इस प्रकार, आवेदक-आरोपित के खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के प्रतीत होते हैं और प्रथम दृष्टया संबंधित अपराध में आवेदक-आरोपित की संलिप्तता को दर्शाते हैं।”
विशेष एनआईए अदालत ने आगे इस बात पर जोर दिया कि आरोपित सैयद अहमद मोहिउद्दीन एक डॉक्टर है। इसलिए, यह नहीं कहा जा सकता कि वह अपने द्वारा तैयार किए गए पदार्थ रिसिन से बिल्कुल अनजान था, जो एक जहरीला जैविक विष है और बड़े पैमाने पर लोगों की हत्या करने की क्षमता रखता है। इसके अलावा, सक्षम प्राधिकारी से किसी लाइसेंस/अनुमति के बिना आवेदक-आरोपित के आवास पर प्रयोगशाला का अस्तित्व प्रथमदृष्टया आवेदक-आरोपित की दुर्भावनापूर्ण मंशा को दर्शाता है।
अदालत ने यह भी कहा कि आरोपित जिहादी मोहिउद्दीन ने कथित तौर पर दिल्ली और अहमदाबाद सहित विभिन्न स्थानों की यात्रा की, जहाँ उसने ऑपरेटिव्स से मुलाकात की और छिपाकर रखी गई खेपें हासिल कीं।
इसके अलावा आरोपित से तीन पिस्तौल, 30 जिंदा कारतूस, भारतीय और अमेरिकी मुद्रा तथा चार लीटर अरंडी के तेल वाली एक बोतल की बरामदगी प्रथमदृष्टया “यह दर्शाती है कि आवेदक-आरोपित की मंशा पवित्र या किसी मानवीय उद्देश्य के लिए नहीं थी।”
आरोपपत्र का हवाला देते हुए विशेष एनआईए अदालत ने कहा कि आरोपित डॉ सैयद अहमद मोहिउद्दीन मुख्य वांछित आरोपित के संपर्क में था और उसके निर्देशों के अनुसार काम कर रहा था। इसके परिणामस्वरूप रिसिन तैयार किया गया और हथियारों के रूप में पिस्तौल की खरीद तथा उन्हें अपने कब्जे में रखने की कार्रवाई की गई। इसलिए अदालत ने बचाव पक्ष की इस दलील को खारिज कर दिया कि मोहिउद्दीन को बैग और उनमें मौजूद हथियारों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
अदालत ने कहा, “आवेदक-आरोपित से हथियारों की बरामदगी प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट करती है कि उक्त हथियार अनुचित उद्देश्य के लिए हासिल किए गए थे। इसलिए आवेदक-आरोपित के अधिवक्ता की यह दलील कि आवेदक-आरोपित को बैग और उसके अंदर मौजूद सामग्री के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, इस अदालत द्वारा स्वीकार किए जाने योग्य नहीं है।”
अदालत ने आगे कहा, “इसके अलावा, आरोपित नंबर 1 के मोबाइल फोन से बरामद वीडियो भी आवेदक-आरोपित की दुर्भावनापूर्ण मंशा को दर्शाता है और यह नहीं बताता कि आवेदक-आरोपित किसी पवित्र मार्ग पर चल रहा था या मानवता की भलाई कर रहा था।”
आरोपों की गंभीरता और UAPA की धारा 43D(5) के तहत लगाए गए प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए विशेष न्यायाधीश हेमंग आर रावल ने जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने बिना किसी लागत संबंधी आदेश के जमानत याचिका खारिज कर दी।
अदालत ने आदेश दिया, “उपरोक्त तथ्यों और गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम की धारा 43D(5) की कठोरता को ध्यान में रखते हुए, यह अदालत आवेदक-आरोपित के पक्ष में इस अदालत को प्रदत्त विवेकाधीन अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल न करना उचित समझती है। अतः वर्तमान आवेदन को बिना किसी लागत संबंधी आदेश के खारिज किया जाता है।”
मामले की पृष्ठभूमि
बता दें कि यह मामला तब सामने आया जब गुजरात एटीएस ने आईएसआईएस-खुरासान प्रांत (ISKP) से जुड़े नेटवर्क के सिलसिले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया। जाँचकर्ताओं के अनुसार, समूह के सदस्यों ने अहमदाबाद, दिल्ली और लखनऊ में भीड़भाड़ वाले बाजारों तथा धार्मिक या संगठनात्मक स्थलों की रेकी की थी और संभावित आतंकी हमले के लिए इस्तेमाल की जा सकने वाली जानकारी जुटाई थी।
चीन में चिकित्सा की पढ़ाई करने वाले तेलंगाना के डॉक्टर मोहिउद्दीन को हथियारों, गोला-बारूद और अरंडी के तेल के साथ गिरफ्तार किया गया था। जाँचकर्ताओं ने कहा कि वह हैदराबाद स्थित अपने आवास पर अरंडी के बीजों से रिसिन तैयार करने की कोशिश कर रहा था। एटीएस ने ISKP से जुड़े एक अफगान हैंडलर के साथ उसकी बातचीत का भी पता लगाया था। इसके बाद जाँच में फंडिंग, अन्य सदस्यों और व्यापक नेटवर्क से संभावित संबंधों की भी पड़ताल की गई।


