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कार्टूनिस्टों का सर काटने पर ₹51 करोड़ देने वाले कसाई याकूब को बसपा का टिकट, शैम्पेन लिबरल्स ‘खामोश’

महागठबंधन के लिए महत्वपूर्ण बसपा द्वारा याकूब कुरैशी नामक कसाई, जिन्होंने पैगम्बर माने जाने वाले मुहम्मद का कार्टून बनाने वाले कार्टूनिस्ट का सर कलम करने के लिए ₹51 करोड़ का इनाम रखा था, को अपना मेरठ लोकसभा क्षेत्र का उम्मीदवार बनाया है।

नरेंद्र मोदी सरकार पर अभिव्यक्ति की आज़ादी ख़त्म करने का आरोप अक्सर लगता रहा है। यह आरोप लगाने वाले भी ज्यादातर या तो महागठबंधन वाले होते हैं या फिर महागठबंधन वालों के वैचारिक समर्थक ‘शैंपेन लिबरल्स’। और महागठबंधन के लिए महत्वपूर्ण बसपा द्वारा याकूब कुरैशी नामक कसाई, जिन्होंने पैगम्बर माने जाने वाले मुहम्मद का कार्टून बनाने वाले कार्टूनिस्ट का सर कलम करने के लिए ₹51 करोड़ का इनाम रखा था, को अपना मेरठ लोकसभा क्षेत्र का उम्मीदवार बनाया है

बताते हैं कि यह केवल उनके गुस्से की क्षणिक अभिव्यक्ति नहीं थी, बल्कि जब फ़्रांसीसी पत्रिका शार्ली हेब्दो के 8 पत्रकार सच में मार डाले गए (उन्होंने कार्टून बनाने वाले के समर्थन में वह कार्टून फिर से छापा था) तो याकूब कुरैशी ने अपना बयान दोहराया, और कहा कि वे अभी भी इनामी राशि उन कसाइयों (pun intended) को देने के लिए तैयार हैं

और साक्षी महाराज- साध्वी प्राची के बयानों को देश में बढ़ती असहिष्णुता का सबूत मानने वाले शैम्पेन लिबरल्स आज चुप हैं।

पर्यावरण कार्यकर्ताओं पर हिंसा का भी आरोपित

कसाई कुरैशी पर इसी फरवरी में पर्यावरण कार्यकर्ताओं के साथ भी हिंसा करने का आरोप लगा था। वह कार्यकर्ता पर्यावरण बचाने के लिए (जो कि शैम्पेन लिबरल्स के पसंदीदा विषयों में से एक माना जाता है) के लिए माँस संयंत्रों पर प्रतिबन्ध चाहते थे। पर्यावरण सुधार संघर्ष समिति के पीड़ित पदाधिकारियों ने यह आरोप लगाया कि उन पर हमला 20-25 लोगों ने किया, जिनमें कुरैशी के माँस संयंत्र के मैनेजर साहब भी थे। मैनेजर साहब हमले वाली जगह के आस-पास ही कहीं रहने वाले बताए गए। हमले से पहले समिति के लोगों को धमकी भी दी गई थी। 15 दिन पहले भी हमला किया गया था।

अवैध होने के कारण बंद हुआ था कसाईखाना, बेटे पर जमीन कब्जियाने का आरोप

कसाई कुरैशी का कत्लखाना बंद करने के पीछे अधिकारियों ने जो कारण बताए थे, उनमें सबसे बड़ा उसके कई हिस्सों का अवैध होना था। बिना कई हिस्सों का नक्शा पास हुए उस कसाईखाने में भैंसे काटे जा रहे थे। मेरठ का पर्यावरण वैसे ही कसाईखानों की भीड़ से चरमरा रहा था। लिहाजा कसाई कुरैशी का कत्लखाना बंद कर दिया गया। उसी मामले में उन कत्लखानों के दोबारा चालू किए जाने का विरोध कर रही पर्यावरण सुधार संघर्ष समिति के लोग हमले का शिकार बने।

इसके अलावा कसाई कुरैशी के बेटे पर भी अवैध तरीके से एक किसान की जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगा था। पीड़ित की जमीन हथियाने के अलावा उसे जान से मार डालने की धमकी भी मिली थी

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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