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6 जगह, 32 बॉक्स, हर बॉक्स में 960 सिम कार्ड: बेंगलुरु में पाकिस्तानी जासूस चला रहे थे अवैध टेलीफोन एक्सचेंज

पुलिस आयुक्त ने बताया कि जो ग्राहक इनके पास नए फोन कनेक्शन के लिए पहुँचते थे, उनका फिंगरप्रिंट ये दोनों इस्तेमाल कर सिम हासिल करते थे।

कर्नाटक पुलिस और सैन्य खुफिया की दक्षिणी कमान ने पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले एक अवैध नेटवर्क का खुलासा किया है। नेटवर्क से जुड़े लोग छह टेलीफोन एक्सचेंज की मदद से सैन्य प्रतिष्ठानों की सूचनाओं और सेना की गतिविधियों को अपने पाकिस्तानी आकाओं तक पहुँचाते थे।

अप्रैल में सेना की सिलीगुड़ी हेल्पलाइन पर सेना की गतिविधियों की जानकारी माँगने वाले कई कॉल आने के बाद सेना के अधिकारियों के कान खड़े हो गए। कॉल करने वाला पाकिस्तानी जासूस खुद को सैन्य अधिकारी बताकर जानकारियाँ हासिल करना चाह रहा था।

जाँच में खुफिया एजेंसी ने पाया कि इस तरह के फोन कॉल मूवमेंट कंट्रोल ऑफिस (एमसीओ) के साथ-साथ प्रधान रक्षा लेखा नियंत्रक (पीसीडीए) के दफ्तरों में भी आए थे। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ने इन कॉल के लिए अवैध टेलीफोन एक्सचेंज का इस्तेमाल किया ताकि वे भारतीय नागरिकों और सैन्य प्रतिष्ठानों में फोन कर जानकारियाँ जुटा सकें।

जाँच में पता चला कि ये कॉल बेंगलुरू से फॉरवर्ड किए जा रहे हैं। उसके बाद सेना ने बेंगलुरु पुलिस से संपर्क किया। सैन्य खुफिया और आतंकवाद निरोधी प्रकोष्ठ (एटीसी) ने 7 जून को संयुक्त छापेमारी कर दो व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि एक हवाला संचालक को तटीय कर्नाटक के भटकल से गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा नेटवर्क से जुड़े दो अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि तमिलनाडु और केरल के रहने वाले दो लोगों को शहर से सात जून को गिरफ्तार किया गया था। उन दोनों की पहचान केरल के मलप्पुरम के इब्राहिम पुलत्ती बिन मोहम्मद कुट्टी और शहर के बीटीएम लेआउट में रहने वाले तिरुपुर, तमिलनाडु के गौतम बी विश्वनाथन के रूप में हुई है। दोनों ने बीटीएम लेआउट में छह अवैध टेलीफोन एक्सचेंजों का नेटवर्क स्थापित किया था। वहाँ से 32 सिम बॉक्स जब्त किए हैं जिनमें 960 सिम कार्ड एक बार में इस्तेमाल हो सकते हैं। इन्होंने शहर के छह अलग-अलग हिस्सों में ये 32 सिम बॉक्स लगाए थे।

खुफिया अधिकारियों के मुताबिक पाकिस्तानी एजेंसियाें ने अवैध टेलीफोन एक्सचेंजों में निवेश किया। इनके जरिए वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल को भारतीय मोबाइल कॉल में परिवर्तित कर सैन्य ठिकानों में सेंध लगाने की कोशिश। ‘दुश्मन देश’ अक्सर इन अवैध सिम बॉक्स का उपयोग संवेदनशील जानकारी प्राप्त करने और दूसरे देशों में अपने एजेंटों के साथ संपर्क बनाए रखने के लिए करते हैं और इन्हें ट्रेस करना आसान भी नहीं होता है।

बेंगलुरु शहर के पुलिस आयुक्त कमल पंत ने बताया कि जो ग्राहक इनके पास नए फोन कनेक्शन के लिए पहुँचते थे, उनका फिंगरप्रिंट ये दोनों इस्तेमाल करके सिम हासिल करते थे। वहीं, भटकल का रहने वाला हवाला के जरिए रकम की हेरफेर करता था।

बकौल पुलिस प्रमुख, इब्राहिम दुबई में ड्राइवर का काम कर चुका है और वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) का इस्तेमाल कर बेंगलुरु में टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित करने के लिए लौटा था। तमिलनाडु का रहने वाला गौतम एक्सचेंज का संचालन करता था। पंत ने बताया कि अधिकतर फोन कॉल्स पश्चिम एशिया से आते थे और वहाँ कुछ लोग कॉल करने में इब्राहिम की मदद करते थे। कॉल के लिए भुगतान दुबई में होता था और धन शोधन नेटवर्क के जरिए उसे भारत पहुँचाया जाता था।

पुलिस ने गिरफ्तार किए गए लोगों पर भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण और सरकारी खजाने को अवैध रूप से एक टेलीफोन एक्सचेंज बनाकर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया गया है। वहीं, सेना की खुफिया और कानून प्रवर्तन प्रेस नोट में कहा गया है कि गिरफ्तार किए गए लोगों पर देश की सुरक्षा को बाधित करने का भी आरोप लगाया गया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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