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J&K में लश्कर-टीआरएफ के 900 से अधिक समर्थक गिरफ्तार, गैर-मुस्लिमों की टारगेट किलिंग के बाद सुरक्षाबलों ने की बड़ी कार्रवाई

कश्मीर में आतंकियों द्वारा अल्पसंख्यक नागरिकों पर किए गए हमले के बाद यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है और एजेंसियाँ जानना चाह रही है कि आतंकियों द्वारा जम्मू-कश्मीर के अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को ही क्यों निशाना बना रहे हैं।

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, अल बद्र और टीआरएफ व रेजिस्टेंस फ्रंट के 900 से अधिक ओवर ग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में हिरासत में लिए गए संदिग्धों से विभिन्न एजेंसियाँ पूछताछ कर रही हैं। एजेंसियाँ जम्मू-कश्मीर में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की टारगेट किलिंग के पीछे के उद्देश्य और वर्किंग मॉडल को समझने और उनकी कड़ियों को आपस में जोड़ने का प्रयास कर रही हैं।

सीएनएन न्यूज18 ने सूत्रों के हवाले से बताया कि कश्मीर में आतंकियों द्वारा अल्पसंख्यक नागरिकों पर किए गए हमले के बाद यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है और एजेंसियाँ जानना चाह रही है कि आतंकी जम्मू-कश्मीर के अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को ही क्यों निशाना बना रहे हैं।

सूत्रों ने बताया कि टीआरएफ के ओवर ग्राउंड वर्कर हाल ही में मुख्य कैडर के रूप में सामने आए हैं और टारगेट किलिंग को अंजाम दे रहे हैं। एजेंसियों का मानना है कि टीआरएफ पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का ही एक फ्रंट है। गौरतलब है कि ओवर ग्राउंड वर्कर उन लोगों को कहा जाता है, जो आतंकियों को मदद उपलब्ध कराते हैं। इनमें रहने के लिए घर से लेकर लॉजिस्टिक तक शामिल हैं।

सीएनन न्यूज18 ने विश्वस्त सूत्र के हवाले से लिखा है, “हम हिंसा के पैटर्न में बदलाव देख सकते हैं। वे एक बहुत ही खास संदेश देना चाहते हैं कि गैर-मुसलमानों और अल्पसंख्यकों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इन आतंकी समूहों को नए डोमिसाइल एक्ट और नई चुनावी प्रक्रिया से दिक्कत है। ये बहुत आसान टारगेट होते हैं। वे वही हैं जो समाज में और कश्मीर के लिए काम कर रहे हैं।”

इसके पहले खबर आई थी कि जम्मू-कश्मीर में 570 लोग पकड़े गए हैं। खबर में बताया गया था कि NIA आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों के खिलाफ अपनी स्ट्रैटेजी के तहत 15-16 स्थानों पर छापेमारी की। इसके अलावा घाटी के 40 शिक्षकों को पूछताछ के लिए समन किया गया।

गौरतलब है कि घाटी में कश्मीरी पंडित माखनलाल बिंदरू और स्ट्रीट वेंडर वीरंजन पासवान की हत्या के बाद श्रीनगर के एक स्कूल के दो शिक्षकों की आईडी कार्ड चेक करने के बाद गैर-मुस्लिम पाए जाने पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या की जिम्मेवारी टीआरएफ ने ली थी।

इसके बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, गृह सचिव अजय भल्ला, इंटेलिजेंस ब्यूरो के प्रमुख अरविंद कुमार, बीएसएफ के महानिदेशक पंकज सिंह और सीआरपीएफ के महानिदेशक कुलदीप सिंह के साथ उच्चस्तरीय बैठक की थी। बैठक में उन्होंने सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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