Homeविविध विषयभारत की बातनरेंद्र मोदी को मालदीव का सर्वोच्च पुरस्कार, करेंगे 'मजलिस' को संबोधित

नरेंद्र मोदी को मालदीव का सर्वोच्च पुरस्कार, करेंगे ‘मजलिस’ को संबोधित

इस द्विपक्षीय यात्रा का उद्देश्य मालदीव के साथ भारत की सामरिक साझेदारी स्थापित करना है। इससे चीन के प्रभुत्व को कम करने में मदद मिलेगी।

प्रधानमंत्री को मालदीव के सर्वोच्च सम्मान से नवाज़ा जाएगा। यह सम्मान मालदीव में किसी विदेशी महानुभाव को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने यह घोषणा की कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आर्डर ऑफ़ दी रूल ऑफ़ इज़्ज़ुद्दीन से सम्मानित किया जाएगा।

मालदीव के राष्ट्रपति कार्यालय ने बयान जारी करते हुए कहा है कि नरेंद्र मोदी को यह सम्मान दोनों देशों के बीच संबंध प्रगाढ़ करने के लिए दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में भारत ने जिस प्रकार मालदीव की सहायता की उसके लिए मालदीव आभार प्रकट करता है।

प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद नरेंद्र मोदी श्री लंका और मालदीव की यात्रा पर हैं। यह उनके दूसरे कार्यकाल की पहली विदेश यात्रा है। मोदी विगत आठ वर्षों में मालदीव की आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा करने वाले प्रथम भारतीय प्रधानमंत्री हैं। इस द्विपक्षीय यात्रा का उद्देश्य मालदीव के साथ भारत की सामरिक साझेदारी स्थापित करना है। इससे चीन के प्रभुत्व को कम करने में मदद मिलेगी। मालदीव यात्रा के दौरान नरेंद्र मोदी वहाँ की पार्लियामेंट ‘मजलिस’ को भी संबोधित करेंगे। ऐसा करने वाले वह विश्व के दूसरे शासनाध्यक्ष होंगे। पिछले महीने ही मालदीव की पार्लियामेंट ने यह प्रस्ताव पारित किया था।

इससे पहले नरेंद्र मोदी भूटान, नेपाल, ऑस्ट्रेलिया, फिजी, मॉरीशस, श्री लंका, मंगोलिया, अफ़ग़ानिस्तान, अमेरिका, ब्रिटेन, और युगांडा की पार्लियामेंट को संबोधित कर चुके हैं। उन्हें रूस, संयुक्त अरब अमीरात, अफ़ग़ानिस्तान और सऊदी अरब का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिल चुका है। उन्हें 2018 में सिओल पुरस्कार भी मिल चुका है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

विवादों में ‘कॉकरोचों’ का 6 जून का प्रदर्शन, दिपके ने माना- ‘नहीं ली प्रोटेस्ट की परमिशन’: समझें- SC का फैसला, 7 दिन वाला नियम...

CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन के बहाने समझिए जंतर-मंतर पर धरना देने की पूरी प्रक्रिया, दिल्ली पुलिस के नियम और सुप्रीम कोर्ट का रुख।

‘पहले मंदिर में नमाज पढ़ेंगे, फिर कहेंगे मस्जिद थी’: बुलंदशहर से भोजशाला तक, हिंदू पवित्र स्थलों पर दावों का कट्टरपंथियों का पैटर्न और लिबरल...

हिंदुओं के पवित्र स्थानों पर नमाज अदा करना भूल नहीं, सोची-समझी साजिश है। यदि कट्टरपंथियों का मन इतना ही साफ होता तो मंदिरों पर कब्जा नहीं करते।
- विज्ञापन -