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SC ने गिरफ्तार पत्रकार प्रशांत कनौजिया को फौरन रिहा करने का दिया आदेश

सोशल मीडिया पर टीका-टिप्पणी को लेकर एडिशनल सॉलिशिटर जनरल को कहा कि हम जज लोगों को भी यहाँ काफी कुछ सुनने को मिलता है, इसका मतलब यह नहीं कि हम किसी को भी उठा कर जेल में डाल दें।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट करने को लेकर यूपी पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए पत्रकार प्रकाश कनौजिया को फौरन रिहा करने का आदेश दिया है। यही नहीं, मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने यूपी पुलिस को फटकार भी लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर प्रशांत को किन धाराओं के तहत अरेस्ट किया गया। शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रशांत कनौजिया ने जो शेयर किया और लिखा, इस पर यह कहा जा सकता है कि उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था। लेकिन, उसे अरेस्ट किस आधार पर किया गया था?

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की भी याद दिलाई। कोर्ट ने कहा कि एक नागरिक के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता है, उसे बचाए रखना जरूरी है। गौरतलब है कि प्रशांत कनौजिया पर यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ एक टिप्पणी करने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, उन्होंने एक विडियो को शेयर करते हुए एक विवादित कैप्शन लिखा था।

प्रशांत की पत्नी जिगीशा अरोड़ा ने सोमवार (जून 10, 2019) को शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए इस गिरफ्तारी को चुनौती दी थी। उनकी अर्जी में कहा गया है कि पत्रकार पर लगाई गई धाराएँ जमानती अपराध में आती हैं। ऐसे मामले में कस्टडी में नहीं भेजा जा सकता। याचिका पर तुरंत सुनवाई की जरूरत है, क्योंकि यह गिरफ्तारी अवैध और असंवैधानिक है। जिगिशा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (जून 11, 2019) को सुनवाई करते हुए प्रशांत की गिरफ्तारी पर सवाल उठाया और तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के जज ने सोशल मीडिया पर टीका-टिप्पणी को लेकर एडिशनल सॉलिशिटर जनरल को कहा कि हम जज लोगों को भी यहाँ काफी कुछ सुनने को मिलता है, इसका मतलब यह नहीं कि हम किसी को भी उठा कर जेल में डाल दें।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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