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1971 में पैदा हुआ बांग्लादेश, पहली बार पाकिस्तान से डायरेक्ट आया कार्गो जहाज: जानिए समंदर के रास्ते का यह कारोबार भारत के लिए कैसा सौदा?

पाकिस्तान से आए इस जहाज में 115 कंटेनर में सोडा एश, 46 कंटेनर में डोलोमाइट, 35 कंटेनर में लाइमस्टोन, 24 कंटेनर में केमिकल और 42 कंटेनर में प्याज था। इसके अलावा बाकी सामान भी इस जहाज पर लोड था, जिसे चटगाँव में उतार दिया गया। इसके बाद यह जहाज 12 नवंबर को रवाना ही इंडोनेशिया के लिए रवाना हो गया।

बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना के तख्तापलट के बाद युनुस सरकार पाकिस्तान से रिश्ते मजबूत करने की कवायद कर रही है। इसी कड़ी में 1971 बाद पहली बार कोई जहाज सामान लेकर पाकिस्तान के किसी बंदरगाह से सीधा बांग्लादेश पहुँचा है। इस घटना से भारत-पाकिस्तान-बांग्लादेश रिश्तों में नए आयाम उभर आए हैं। पाकिस्तान से सीधा पहुँचने वाले सामानों ने भारत की चिंता भी बढ़ा दी है। भारत को शक है कि अब पाकिस्तान इस रास्ते से बांग्लादेश में हथियार या ड्रग्स पहुँचाने की कोशिश कर सकता है।

कब पहुँचा जहाज, क्या लेकर आया?

दुबई की फीडर लाइंस DMCC कंपनी का जहाज युआन जियाँग फा झान कराची से सामान लेकर चला और 11 नवंबर को बांग्लादेश के चटगाँव बंदरगाह पहुँचा। चटगाँव बंदरगाह पर आए इस जहाज ने 370 कंटेनर उतारे। इनमें से 297 कंटेनर पाकिस्तान से आए थे जबकि बाक़ी दुबई से आए हुए थे।

पाकिस्तान से आए इस जहाज में 115 कंटेनर में सोडा एश, 46 कंटेनर में डोलोमाइट, 35 कंटेनर में लाइमस्टोन, 24 कंटेनर में केमिकल और 42 कंटेनर में प्याज था। इसके अलावा बाकी सामान भी इस जहाज पर लोड था, जिसे चटगाँव में उतार दिया गया। इसके बाद यह जहाज 12 नवंबर को रवाना ही इंडोनेशिया के लिए रवाना हो गया।

पाकिस्तान से जहाज का बांग्लादेश पहुँचना बड़ी घटना क्यों?

1971 के बाद पहली बार कोई जहाज कराची से सामान लेकर बिना रास्ते में कहीं रुके बांग्लादेश के बंदरगाह पहुँचा। इससे पहले पाकिस्तान से जहाज चल कर सीधा बांग्लादेश नहीं जाते थे। पाकिस्तान से बांग्लादेश जाने वाला सामान या तो पहले सिंगापुर या फिर श्रीलंका के कोलम्बो बंदरगाह पर जाता था। इसके बाद इसे दूसरे जहाजों में डाल कर बांग्लादेश ले जाया जाता था।

दोनों देशों के बीच समुद्री रूट नहीं होने के पीछे 1971 के पहले का इतिहास है। बांग्लादेश के आजाद होने के पहले पाकिस्तान ने बंगालियों पर काफी अत्याचार किया था। पाक फ़ौज ने हजारों महिलाओं का रेप किया था और पुरुषों को मार दिया था। पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच रिश्तों में खटास के चलते ही समुद्री लिंक नहीं स्थापित हुआ था।

बांग्लादेश में स्थित पाकिस्तान के हाई कमीशन ने इसे एक बड़ा कदम बताया है। पाकिस्तानी हाई कमिश्नर ने कहा है कि आगे इससे दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ेगा जो सहयोग में सहायक होगा। बांग्लादेश में पाकिस्तानी सामान पहुँचने की यह घटना एक हालिया फैसले के बाद हुई है।

बांग्लादेश की युनुस सरकार ने हाल ही में पाकिस्तान से आने वाले सामानों की अनिवार्य चेकिंग की शर्त हटा ली थी। यह रोक शेख हसीना के कार्यकाल में लगाई गई थी ताकि पाकिस्तान से कोई भी ड्रग या हथियार जैसा सामान बांग्लादेश के भीतर ना पहुँच पाए।

वर्तमान में पाकिस्तान-बांग्लादेश के बीच व्यापार $1 बिलियन से भी कम है। यह समुद्री लिंक बनने से दोनों के बीच व्यापार बढ़ने के कयास हैं। हालाँकि, इस व्यापार में बांग्लादेश का ही पलड़ा भारी रहने वाला है।

पाकिस्तान-बांग्लादेश के बीच समुद्री लिंक चिंता का कारण क्यों?

पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच सीधा समुद्री लिंक बनने के बाद भारत कई कारणों से चिंतित है। पहला कारण तो यह है कि यह दोनों देशों के बीच बढ़ती नजदीकी को दिखाता है। यह भारत के हित में नहीं है। पाकिस्तान हमेशा से ही बांग्लादेश के सहारे भारत को घेरने की योजना बनाता रहा है।

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी बांग्लादेश के भीतर कट्टरपंथ फैलाने और फिर यहाँ से आतंकी भारत में भेजने की योजना भी बनाती रही है, ऐसे में भारत की सुरक्षा चिंताएँ भी बढ़ती हैं। इसके अलावा दूसरी चिंता ड्रग्स और हथियारों को लेकर है।

बांग्लादेश के चटगाँव बंदरगाह का इस्तेमाल पाकिस्तान ड्रग्स और हथियार भेजने में कर सकता है। पाकिस्तान लगातार सीमापार और समुद्री रास्ते से भारत में हथियार और ड्रग्स भेजने की कोशिश करता रहा है। हालाँकि, इसमें उसको अधिक सफलता नहीं मिली है।

वह बांग्लादेश की भारत के साथ खुली सीमा का इस्तेमाल इस काम के लिए कर सकता है। ऐसे में भारत की चिंताएँ और बढ़ गई हैं। इसके अलावा पाकिस्तानी नौसेना के जहाजों और पनडुब्बियों को भी बांग्लादेश में लंगर डालने का मौका अब मिल सकता है। यह भारत की सामरिक चुनौतियों को कई गुना बढ़ा देगा।

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