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1000 ट्रैक्टर के साथ संसद मार्च करेंगे किसान: टीकरी-गाजीपुर बॉर्डर पर जमावड़ा शुरू, सभी माँगें पूरी होने तक आंदोलन की चेतावनी

किसान नेता दर्शन पाल सिंह ने कहा कि उनकी माँगों में एमएसपी, किसान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेना, बिजली विधेयक 2020 व वायु गुणवत्ता अध्यादेश को वापस लेना और मृतक प्रदर्शनकारी किसानों का स्मारक बनाने के लिए स्थान का आवंटन शामिल है।

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा के बावजूद कथित किसान संगठन पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, किसान संगठन 29 नवंबर को संसद कूच करने वाले हैं। इसके लिए दिल्ली-एनसीआर के चारों बॉर्डर (सिंघु, टीकरी, गाजीपुर और शाहजहाँपुर) पर किसानों का जमावड़ा बढ़ाया जा रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता डॉ. दर्शन पाल सिंह का कहना है कि प्रदर्शनकारी किसानों की सिर्फ एक माँग (तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान) पूरी हुई है, लेकिन अभी उनकी आधा दर्जन महत्वपूर्ण माँगों पर केंद्र सरकार को गौर करना होगा।

बताया जा रहा है कि संयुक्त किसान मोर्चा की 9 सदस्यीय कमेटी ने फैसला लिया गया है कि 29 नवंबर को गाजीपुर बॉर्डर और टीकरी बॉर्डर से 500-500 किसान ट्रैक्टर पर संसद भवन के लिए रवाना होंगे। इस बीच अगर किसानों को कहीं रोका जाता है तो वे वहीं धरने पर बैठ जाएँगे। दर्शन पाल का कहना है कि वे अपने पुराने रूख पर कायम हैं कि जब तक उनकी पुरानी माँगे पूरी नहीं की जाती हैं, तब तक दिल्ली-एनसीआर के बॉर्डर पर धरना-प्रदर्शन चलता रहेगा। 

दर्शन पाल सिंह यही नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा, ”22, 26 और 29 नवंबर के हमारे कार्यक्रम हमेशा की तरह जारी रहेंगे। 22 को लखनऊ रैली, 26 को ऐतिहासिक किसान संघर्ष के एक साल पूरे होने पर एक सभा आयोजित करेंगे और 29 नवंबर को ट्रैक्टर मार्च (संसद तक) निकाला जाएगा। ये आंदोलन जारी रहेगा।”

उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों के अलावा उनकी और भी माँगे हैं। उनमें एमएसपी, किसान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेना, बिजली विधेयक 2020 व वायु गुणवत्ता अध्यादेश को वापस लेना और मृतक प्रदर्शनकारी किसानों का स्मारक बनाने के लिए स्थान का आवंटन शामिल हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इन मुद्दों को हल करने के लिए बैठक बुलाएगी।

किसान नेता ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ”22 तारीख को लखनऊ की रैली को कामयाब करना है। अगर लखीमपुर खीरी में हमारे साथियों को परेशान करने की कोशिश की जाती है तो फिर हम लखीमपुर खीरी इलाके में आंदोलन चलाएँगे।”

इससे पहले गाजीपुर बॉर्डर के धरना प्रदर्शन स्थल पर पहुँचे राकेश टिकैत ने कहा कि केंद्र सरकार से सिर्फ तीनों कृषि कानूनों पर ही नहीं, बल्कि एमएसपी, प्रदूषण और बिजली बिल जैसे मुद्दों पर भी बात की जानी चाहिए है और यह भी देखना चाहिए कि सरकार किसानों से बात करने आगे आती है या नहीं।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (19 नवंबर, 2021) को तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि इन कानूनों को किसानों के फायदे के लिए लाया गया था, लेकिन एक समूह को इसके फायदे समझाने में सरकार असफल रही।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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