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MVA की पार्टी ने समर्थन वापस लिया, उधर कॉन्ग्रेस विधायकों ने भी सोनिया गाँधी से की शिकायत: उद्धव सरकार में पड़ी फूट

शेट्टी ने हाल ही में अपनी पार्टी के एकमात्र विधायक देवेंद्र भुयार को निष्कासित कर दिया था। उन्होंने कहा कि भुयार 2019 के चुनावों के बाद से राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के नेताओं से लगातार मिलते रहे। वह पार्टी के मंच पर कभी नहीं देखे गए।

महाराष्ट्र में सत्ताधारी शिवसेना की अगुवाई वाली महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन में फूट पड़ गई है। गठबंधन की सहयोगी दल स्वाभिमानी पक्ष (SP) पार्टी ने मंलगवार (5 अप्रैल 2022) MVA से खुद के अलग होने की घोषणा कर दी है। वहीं, सत्ता में साझेदार कॉन्ग्रेस के विधायकों का प्रतिनिधिमंडल पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी से मुलाकात कर पार्टी विधायकों को नजरअंदाज करने की शिकायत की है।

सहयोगी दलों में फूट के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (CM Uddhav Thackeray) के लिए मुसीबत खड़ी होती नजर आ रही है। स्वाभिमानी पक्ष के नेता राजू शेट्टी (Raju Shetty) ने निर्णय लेने से पहले पार्टी के नेताओं के साथ विचार-विमर्श किया और उसके बाद उन्होंने कहा कि गठबंधन और पार्टी के बीच अब कोई संबंध नहीं है। वह सरकार का हिस्सा नहीं है। उन्होंने कहा कि गठबंधन सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया है।

शेट्टी ने कहा कि महा विकास अघाड़ी गठबंधन के न्यूतम साझा कार्यक्रमों में किसानों का हित प्रमुख बिंदू था, लेकिन राज्य सरकार ने इसे अमल में नहीं लाया। उन्होंने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में बाढ़ से नुकसान के लिए किसानों को मुआवजा नहीं दिया गया और किसानों की भूमि का अधिग्रहण का मुआवजा सरकार ने कम कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार के इन कदमों के कारण उन्हें विरोध करना पड़ा।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, शेट्टी ने हाल ही में अपनी पार्टी के विधायक देवेंद्र भुयार को निष्कासित कर दिया था। भुयार स्वाभिमानी पक्ष के अकेला विधायक थे। भुयार को निष्कासित करने के दौरान शेट्टी ने कहा था कि भुयार 2019 के चुनावों के बाद से राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के नेताओं से लगातार मिलते रहे। वह पार्टी के मंच पर कभी नहीं देखे गए।

पार्टी अधिवेशन में बोलते हुए शेट्टी ने कहा, “किसानों का हित एमवीए द्वारा तय किए गए न्यूनतम साझा कार्यक्रम का केंद्र बिंदु था। मेरी पार्टी भी इसका हिस्सा थी। हालांकि, पिछले ढाई वर्षों में, हमें बाढ़ के नुकसान के लिए उचित मुआवजे की मांग के लिए राज्य सरकार के खिलाफ विरोध करना पड़ा। हमें किसानों को भूमि अधिग्रहण मुआवजे को कम करने के सरकार के फैसले का विरोध करना पड़ा।”

गठबंधन के खिलाफ कॉन्ग्रेस नेता भी सोनिया गाँधी से मिले

इधर महाराष्ट्र के कॉन्ग्रेस विधायक भी गठबंधन में परेशान हैं। उनका कहना है कि सरकार का सारा ध्यान शिवसेना और NCP के विधायकों के क्षेत्रों में विकास पर है। उन्हें लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। इस संबंध में विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार (5 अप्रैल 2022) को सोनिया गाँधी से मुलाकात की।

सूत्रों के हवाले से TOI ने बताया कि 22 विधायकों वाले इस प्रतिनिधिमंडल ने 35 मिनट के अपने मुलाकात के दौरान सोनिया गाँधी के समक्ष पार्टी में समन्वय की कमी और विधायकों के लिए निर्धारित निधि की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री और NCP नेता अजीत पवार और शिवसेना नेता एकनाथ खडगे सिर्फ अपनी-अपनी पार्टी के नेताओं की मदद कर रहे हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि शिवसेना और NCP महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार चला रही है। इस दौरान विधायकों ने विभिन्न निगमों में खाली पड़ी सीटों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में सत्ताधारी गठबंधन में पारदर्शिता की भारी कमी है। इन लोगों ने पार्टी नेता बाला साहेब थोराट और अशोक चव्हाण की भी शिकायत की।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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