Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयकंगाल पाकिस्तान: इमरान ने दिया नान और रोटी की कीमतें कम करने का हुक्म

कंगाल पाकिस्तान: इमरान ने दिया नान और रोटी की कीमतें कम करने का हुक्म

"प्रधानमंत्री इमरान खान ने नान और रोटी की बढ़ती कीमतों पर कड़ा रुख अख्तियार किया है और उन्हें उनकी पुरानी दरों पर वापस लाने के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया है।"

डूबने के कगार पर पहुॅंच चुके पाकिस्तान में खाद्य पदार्थों की कीमतें आसमान छू रही है। इस बीच, प्रधानमंत्री इमरान खान ने नान और रोटी की कीमतें कम करने का हुक्म दिया है। उन्होंने इस आदेश को तत्काल लागू करने को कहा है।

इमरान की विशेष सहायक फिरदौस आशिक अवान ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया, “प्रधानमंत्री इमरान खान ने नान और रोटी की बढ़ती कीमतों पर कड़ा रुख अख्तियार किया है और उन्हें उनकी पुरानी दरों पर वापस लाने के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया है।”

डॉन ऑनलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक संघीय कैबिनेट की बैठक में पीएम के हस्तक्षेप के बाद नान और रोटी की कीमतों में कमी लाने का निर्णय लिया गया। बैठक के बाद पत्रकारों को अवान ने बताया, “कैबिनेट बैठक से अलग प्रधानमंत्री ने गैस, नान और रोटी की कीमतों को लेकर भी एक बैठक की।” उन्होंने बताया कि इसका मकसद गैस टैरिफ कम करना था, खासकर तंदूरवालों के लिए।

गौरतलब है कि गैस और आटे की कीमत बढ़ने के कारण पाकिस्तान के विभिन्न शहरों में नान 12 से 15 रुपए में बेचा जा रहा है। पहले नान की कीमत 8-10 रुपए थी। इसी तरह 7-8 रुपए में मिल रही रोटी अब 10-12 रुपए में बेची जा रही है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘मेविस्तान’ बनाने का सपना, अलवर-भरतपुर में हिंसा और फिर गाँधी-नेहरू का हस्तक्षेप: जानिए मेवात के उस इतिहास की पूरी कहानी, जिसने बदल दिया इलाके...

मेविस्तान की माँग, 1933 का गोविंदगढ़ संघर्ष, 1947 का अलवर-भरतपुर घटनाक्रम और गाँधी-नेहरू के हस्तक्षेप से जुड़ी मेवात की पूरी कहानी जानिए।

59 करोड़ अकाउंट्स, लाखों करोड़ की कैपिटल और आखिरी व्यक्ति तक पहुँचता बैंकिंग सिस्टम… फिर क्यों जनधन योजना से सुभाष गर्ग को लगी मिर्ची?

सुभाष गर्ग ने जनधन योजना के 59 करोड़ खातों पर सवाल उठाए, जानिए जीरो बैलेंस, इनएक्टिव अकाउंट्स और DBT से जुड़ी पूरी कहानी।
- विज्ञापन -