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370 का ‘पावर’ खत्म होने पर लिबरलों और मीडिया गिरोह की आँखों में आए आँसू, ट्विटर पर छलका दर्द

सोशल मीडिया पर सागरिका घोष का भी दर्द छलका जम्मू-कश्मीर राज्य के एक केंद्र शासित प्रदेश बनने की स्थिति पर अश्चर्य व्यक्त करते हुए लिखा कि बिना किसी परामर्श और चर्चा के कैसे यह बिल आगे बढ़ गया।

राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह द्वारा कश्मीर में लागू अनुच्छेद-370 और 35-A को खत्म करने के प्रस्ताव को पेश करते ही विपक्षी पार्टियों और लिबरल गैंग को झटके लगने शुरू हो गए हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने राज्‍यसभा में कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्‍छेद-370 के सभी खंड लागू नहीं होंगे। इसके साथ ही आर्टिकल 35-A को भी हटा दिया गया है।

इस फ़ैसले से नाराज़ समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सेठ ने पार्टी के साथ-साथ संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। बता दें कि संजय सेठ, मुलायम सिंह के बेहद क़रीबी रहे हैं। कॉग्रेस के सांसद भुवनेश्वर कालिता ने भी राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है। ऐसी संभावना है कि वो जल्द ही बीजेपी में शामिल होंगे।

दूसरी तरफ, लिबरल गैंंग भी इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर जमकर प्रतिक्रिया दे रहा है। बरखा दत्त ने ट्वीट किया, “एक डेस्क में दो विधानसभा, दो प्रधान, दो निशान नहीं हो सकते।” जैसे ही जम्मू-कश्मीर में सरकार आएगी तब क्या?

सोशल मीडिया पर सागरिका घोष का भी दर्द छलका जम्मू-कश्मीर राज्य के एक केंद्र शासित प्रदेश बनने की स्थिति पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए लिखा कि बिना किसी परामर्श और चर्चा के कैसे यह बिल आगे बढ़ गया।

स्वाति चतुर्वेदी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि इन फ़ैसलों पर दोनों सदनों में बहस होनी चाहिए। लोकतंत्र को रबर स्टैंप मत बनाइए।

जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट सेवा बाधित होने के बावजूद पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती का ग़ुस्सा सोशल सोशल मीडिया पर फूटा। उन्होंने ट्वीट किया हमारे जैसे लोग जिन्होंने संसद पर भरोसा रखा, उन्हें लोकतंत्र के मंदिर में धोखा दिया गया है।

राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने पीडीपी के मीर फ़ैयाज़ और नज़ीर अहमद लावे को संविधान को फाड़ने के बाद सदन से बाहर जाने के लिए कहा, इस पर प्रतिक्रिया स्वरूप आदित्य मेनन ने ट्वीट किया कि ये बीजेपी सरकार है जिसने आज संविधान की हत्या की है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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