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जिस गेट में अंदर से लगा ताला, वहाँ महबूबा मुफ्ती हो गईं नजरबंद: ‘कहीं भी जाने लिए स्वतंत्र’ लिख श्रीनगर पुलिस ने दिया जवाब

"उनके द्वारा ट्वीट की गई तस्वीर गेट के अंदर की है, जिसमें बंगले में रहने वाले लोगों ने अपना ताला लगाया है। वह कहीं भी जाने लिए स्वतंत्र हैं।" - पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती को पुलिस ने दिया जवाब।

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) ने आरोप लगाया है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) के कश्मीर दौरे के दौरान उन्हें नजरबंद कर दिया गया है। हालाँकि, पुलिस ने इन आरोपों का खंडन किया है।

महबूबा मुफ्ती ने बुधवार (5 अक्टूबर 2022) को ट्विटर पर एक बंद गेट की तस्वीर शेयर की है। इसके साथ ही उन्होंने लिखा:

“एक ओर गृहमंत्री अमित शाह कश्मीर में सब कुछ सामान्य होने का दावा करते हुए घूम रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री को घर में ही बंद कर दिया गया है। मुझे एक कार्यकर्ता की शादी के लिए पट्टन जाना था। अगर एक पूर्व सीएम के मौलिक अधिकारों को इतनी आसानी से छीना जा सकता है, तो आम आदमी की दुर्दशा के बारे में सोच भी नहीं सकते हैं।”

महबूबा मुफ्ती के दावे का खंडन करते हुए श्रीनगर पुलिस ने इसका जवाब दिया है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “उनके द्वारा ट्वीट की गई तस्वीर गेट के अंदर की है, जिसमें बंगले में रहने वाले लोगों ने अपना ताला लगाया है। वह कहीं भी जाने लिए स्वतंत्र हैं।” इसके आगे श्रीनगर पुलिस ने लिखा, “हमें बताया गया था कि वो पट्टन के लिए 1 बजे रवाना होंगी। उनकी यात्रा पर कोई प्रतिबंध नहीं है।”

इसके बाद महबूबा मुफ्ती ने श्रीनगर पुलिस के ट्वीट पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बारामूला के एसपी रईस मोहम्मद भट्ट का नाम लेते हुए लिखा, “मुझे मंगलवार (4 अक्टूबर 2022) रात बताया गया कि मैं पट्टन नहीं जा सकती हूँ। आज जम्मू-कश्मीर पुलिस ने खुद ही मेरे गेट को अंदर से लॉक कर दिया और अब वह झूठ बोल रहे हैं। यह दुखद है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ बड़ी ही बेशर्मी से अपनी गलतियाँ छिपाने के लिए इस तरह का झूठ बोल रही हैं।”

आपको बता दें कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 3 अक्टूबर 2022 से 3 दिन के जम्मू-कश्मीर दौरे पर हैं। अमित शाह ने राजौरी में मंगलवार (4 अक्टूबर 2022) को एक रैली को संबोधित करते हुए गाँधी, मुफ्ती और अब्दुल्ला परिवार पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा:

“70 साल तक जम्मू-कश्मीर पर 3 परिवारों ने राज किया। लोकतंत्र सिर्फ अपने परिवारों में बना दिया था। तीन परिवारों ने लोकतंत्र और जम्हूरियत का मतलब सिर्फ पीढ़ियों तक शासन करना बना दिया था। पहले जो हक 3 परिवारों के पास था, आज वह अधिकार 30 हजार लोगों को मिला है।”

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रैली में मोदी-मोदी के नारे लगने पर कहा कि यह उन लोगों के लिए जवाब है, जो कहते थे कि अनुच्छेद-370 हटेगा तो आग लग जाएगी… खून की नदियाँ बह जाएँगी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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